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भारतीय शादियों पर विदेशी अदालत को फैसला लेने का हक नहीं: हाई कोर्ट

दुबई की अदालत ने एक भारतीय दंपति को तलाक की अनुमति दी थी जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया

Updated On: Aug 20, 2017 05:11 PM IST

Bhasha

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भारतीय शादियों पर विदेशी अदालत को फैसला लेने का हक नहीं: हाई कोर्ट

अगर आपकी शादी भारत में हिंदू रीति रिवाजों से हुई है और उस वक्त आप विदेश में ही रह रहें हो तो भी वहां की अदालत आपकी शादी पर कोई फैसला नहीं ले सकती है. जी हां! बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने ताजा फैसले में यह बात कही है.

न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायमूर्ति अनुजा प्रभुदेसाई की खंडपीठ ने पिछले सप्ताह दुबई की एक अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें वहां रह रहे एक भारतीय व्यक्ति की तलाक याचिका को मंजूरी दी गई थी.

उच्च न्यायालय व्यक्ति की पत्नी द्वारा दायर अपील (यचिका) पर सुनवाई कर रहा था जिसमें मुंबई की एक परिवार अदालत द्वारा दिए आदेश को चुनौती दी गई. परिवार अदालत ने उसकी अपने और अपने दो बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने वाली याचिका खारिज कर दी थी.

क्या है मामला?

परिवार अदालत ने उसकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि दुबई की अदालत ने पहले ही इस मामले पर फैसला सुना दिया है और पति-पत्नी को तलाक की मंजूरी दे दी है.

बहरहाल, उच्च न्यायालय ने मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद कहा कि दोनों पक्ष (पति और पत्नी) भारतीय नागरिक हैं और पति के इस दावे को पुख्ता करने वाला कोई दस्तावेज नहीं है कि वे दुबई के निवासी हैं.

पीठ ने कहा, 'इन परिस्थितियों के तहत, दुबई की अदालत याचिकाकर्ता (पत्नी) और प्रतिवादी (पति) के बीच वैवाहिक विवाद पर फैसला करने के लिए सक्षम न्यायालय नहीं है.' न्यायालय ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्ष भारतीय नागरिक हैं और जन्म से हिंदू हैं. उन्होंने हिंदू वैदिक अधिकारों के अनुसार शादी की और उनकी शादी तथा तलाक का मामला हिंदू विवाद अधिनियम 1955 के तहत आता है.

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