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सोहराबुद्दीन मामले में अदालत ने मीडिया पर पाबंदी का आदेश किया खारिज

'एक खुली सुनवाई की रिपोर्टिंग में प्रेस न केवल अपने अधिकार का प्रयोग करती है. बल्कि आम जनता को इस तरह की सूचनाएं उपलब्ध कराने के बड़े उद्देश्य को पूरा करती है’ जस्टिस रेवती

Bhasha Updated On: Jan 24, 2018 07:08 PM IST

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सोहराबुद्दीन मामले में अदालत ने मीडिया पर पाबंदी का आदेश किया खारिज

बंबई हाई कोर्ट ने आज निचली अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया. जिसमें सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई की कार्यवाही की रिपोर्टिंग या प्रकाशन करने से पत्रकारों को रोका गया था. जस्टिस रेवती मोहिते डेरे ने कहा कि विशेष सीबीआई अदालत ने अपनी शक्तियों से बाहर जाकर यह आदेश पारित किया.

जस्टिस रेवती ने याचिकाकर्ताओं से सहमति जताई कि दंड प्रक्रिया संहिता के तहत केवल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को ही इस तरह के पाबंदी जारी करने का अधिकार है. याचिकाकर्ताओं के समूह में अदालत कवर करने वाले रिपोर्टर्स और यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स शामिल थे.

उन्होंने कहा कि आरोपियों द्वारा सनसनी फैलाने की चिंता इस तरह के पाबंदी के आदेश जारी करने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकता. विशेष सीबीआई अदालत ने पिछले साल 29 नवंबर को पत्रकारों पर इस मामले की सुनवाई की कार्यवाही की रिपोर्टिंग या प्रकाशन पर रोक लगाई थी.

न्यायमूर्ति रेवती ने कहा कि इस तरह की पाबंदी अनुचित है और यह पत्रकारों को अभिव्यक्ति की आजादी के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है. उन्होंने कहा, ‘प्रेस के अधिकार अभिव्यक्ति की आजादी प्रदान करने वाले संवैधानिक अधिकार में निहित हैं. एक खुली सुनवाई की रिपोर्टिंग में प्रेस न केवल अपने अधिकार का प्रयोग करती है. बल्कि आम जनता को इस तरह की सूचनाएं उपलब्ध कराने के बड़े उद्देश्य को पूरा करती है.’

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