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हाईकोर्ट जज ने किया #MeToo का समर्थन, कहा- जुडिशियरी में भी हो रहीं ऐसी घटनाएं

बॉम्बे हाईकोर्ट के जज जस्टिस गौतम पटेल देश में चल रहे मी टू अभियान के समर्थन में खुल कर आए हैं और कहा है कि पितृसत्तात्मक दुनिया महिलाओं को खुल कर बोलने की अनुमति नहीं देती है

Updated On: Oct 12, 2018 04:04 PM IST

Bhasha

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हाईकोर्ट जज ने किया #MeToo का समर्थन, कहा- जुडिशियरी में भी हो रहीं ऐसी घटनाएं

बॉम्बे हाईकोर्ट के जज जस्टिस गौतम पटेल देश में चल रहे मी टू अभियान के समर्थन में खुल कर आए हैं और कहा है कि पितृसत्तात्मक दुनिया महिलाओं को खुल कर बोलने की अनुमति नहीं देती है. जस्टिस पटेल ने गुरुवार को कहा कि वह उन महिलाओं का ‘पूरी तरह समर्थन’ करते हैं जिन्होंने यौन उत्पीड़न के अनुभवों को साझा करने और प्रताड़ित करने वालों का नाम उजागर करने का निर्णय किया है.

इंडियन मर्चेंट चेंबर की महिला शाखा की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जस्टिस पटेल ने अमेरिकी हास्य अभिनेता बिल कॉस्बी के मामले का हवाला दिया. बिल को 14 साल पहले की यौन हिंसा की घटना के सिलसिले में पिछले महीने सजा हुई है.

उन्होंने कहा, मैं उन महिलाओं का पूरी तरह समर्थन करता हूं जो सामने आ रही हैं और जिनके पास बोलने का साहस है क्योंकि किसी वक्त बोलने के लिए बहुत अधिक साहस की जरूरत होती है.

दुनिया पितृसत्तात्मक, इसलिए महिलाएं नहीं आती सामने

पटेल ने कहा, महिलाएं आगे क्यों नहीं आती है, यह एक गंभीर समस्या है. इसका कारण है हमारी दुनिया का पितृसत्तात्मक होना. यह इतना पितृसत्तात्मक है और पूर्वाग्रह से ग्रसित है कि महिलाओं को कई बार बोलने की इजाजत नहीं देता जब उन्हें बेालना चाहिए या वे बोल सकती थीं.

उन्होंने कहा, अब हमें इस पर चर्चा करने की आवश्यकता है कि पूरी तरह इस छिन्न भिन्न और आस्यास्पद बन चुकी व्यवस्था से कैसे निताज पाई जाए और हमें ही इसकी पहचान करनी है. जस्टिस पटेल ने कहा कि जुडिशियरी में भी बड़े पैमाने पर इस तरह की घटनाएं हो रही है और यह भी पितृसत्तात्मक संस्कृति से घिरी हुई है. पटेल ने इस दौरान अदालतों में बढ़ते बोझ की तरफ भी ध्यान आकर्षित कराने की कोशिश की जो देश की जुडिशियरी के समक्ष एक अन्य समस्या है.

उन्होंने कहा, दिसंबर 2019 तक बंबई हाईकोर्ट के 11 जस्टिस अवकाश ग्रहण करेंगे और अभी केवल चार नामो को अंतिम रूप दिया गया है. हम एक बड़ी समस्या का सामना करने जा रहे हैं.

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