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HC की BMC को फटकार: निजी शौचालयों को किससे पूछकर बनाया सार्वजनिक?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, 'स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाने की यह आपकी जिम्मेदारी थी. आपने यह तो नहीं किया लेकिन निजी शौचालयों को ही सार्वजनिक शौचालय में बदल दिया'

FP Staff Updated On: Mar 07, 2018 05:26 PM IST

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HC की BMC को फटकार: निजी शौचालयों को किससे पूछकर बनाया सार्वजनिक?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के निजी शौचालयों को सार्वजनिक शौचालय में बदलने के कदम पर सवाल उठाया है. मंगलवार को अदालत ने पूछा कि ऐसा नियम कौन से कानून के अंतर्गत किया गया है.

यहां बता दें कि बीएमसी ने पिछले दिनों स्वच्छ भारत मिशन के तहत निजी शौचालयों को सार्वजनिक शौचालय में बदलने का निर्देश जारी किया था.

एनडीटीवी के अनुसार जस्टिस ए एस ओका और रियाज इकबाल चागला की डिविजनल बेंच ने मुंबई के विभिन्न पेट्रोल पंप मालिकों और पेट्रोल पंप असोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही.

याचिका में बीएमसी के 22 दिसंबर, 2017 के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई है जिसमें पेट्रोल पंपों पर साइनबोर्ड लगाकर कहा गया है कि ग्राहक वहां बने शौचालयों का इस्तेमाल कर सकते हैं.

बेंच ने कहा, 'स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाने की यह आपकी जिम्मेदारी थी. आपने यह तो नहीं किया लेकिन निजी शौचालयों को ही सार्वजनिक शौचालय में बदल दिया.'

BMC

मुंबई स्थित बीएमसी का दफ्तर

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से कहा था कि बीएमसी ने उन्हें स्वच्छ भारत मिशन के तहत आम जनता के इस्तेमाल के लिए पेट्रोल पंप परिसर में शौचालय बनाने का निर्देश दिया था. उन्होंने यह भी कहा कि बीएमसी ने इसके लिए कई पेट्रोल पंपों पर साइनबोर्ड तक लगाए थे.

अदालत ने पूछा कि बीएमसी किस बिनाह या ताकत पर निजी शौचालयों को सार्वजनिक शौचालय में बदलना चाहता है.

सुनवाई के दौरान बीएमसी के वकील ने कहा कि बीएमसी ने केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ाने के लिए ऐसा किया था.

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