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एक मजाक के लिए फांसी पर मत लटकाओ: रणदीप हुड्डा

रणदीप हुड्डा ने रामजस कॉलेज विवाद से किया किनारा

Updated On: Feb 28, 2017 10:47 AM IST

FP Staff

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एक मजाक के लिए फांसी पर मत लटकाओ: रणदीप हुड्डा

रामजस कॉलेज विवाद में किए एक ट्वीट ने रणदीप हुड्डा को परेशान कर दिया. ट्वीट के बाद रणदीप हुड्डा की इतनी आलोचना हुई कि अब उन्हें इस बारे में विस्तार से सफाई देनी पड़ी है. रणदीप हुड्डा ने फेसबुक पर एक लंबा पोस्ट लिखकर कहा है कि एक मजाक के लिए उन्हें फांसी पर न लटकाया जाए.

बॉलीवुड स्टार ने फेसबुक पर एक लेख पोस्ट किया है. उन्होंने लिखा है

हंसने के लिए मुझे फांसी पर लटकाओ मत. वीरू ने एक जोक साझा किया था और मैं स्वीकार करता हूं कि मुझे उस जोक पर हंसी आई थी. वह बहुत मजाकिया हैं और यह उन कई चीजों में से एक था जिसने मुझे हंसने पर मजबूर किया. बस इतना ही था.

लेकिन अब मैं हैरान हूं कि मुझे एक युवती के खिलाफ नफरत भड़काने के लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है. वह लड़की भी ऐसा ही मानती है. उसने यह बात कही थी और वह खुलकर सामने आई थी. ऐसे में उसे अपने ख़िलाफ़ आवाज भी धैर्य से सुनने का साहस दिखाना चाहिए था.

यदि आप किसी पर उंगली उठाते हैं और उस पर आने वाली प्रतिक्रियाओं के लिए किसी को जिम्मेदार ठहराते हैं तो यह सही नहीं है. मैं बिल्कुल उस लड़की के खिलाफ नहीं हूं.

मैं मजबूती के साथ इस बात को मानता हूं कि हिंसा गलत है. महिला को धमकी देना एक बड़ा अपराध है. ऐसा करने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

मैं उस लड़की के वीडियो को पसंद करता हूं जिसमें उसने जंग वाले देशों के बीच शांति की अपील की है. यह सराहने लायक है, लेकिन टकराव का बिन्दु यह नहीं है. उसे अधिकार है कि वह जो सोचती है उसके आधार पर किसी भी चीज का विरोध करे.

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रणदीप हुड्डा (फोटो: फेसबुक)

दूसरी तरफ वीरू को भी अधिकार है कि वह मज़ाक उड़ाएं. हम एक लोकतंत्र में रहते हैं और हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हक हासिल है. हम पर बदमाशी का आरोप लगाना और उस लड़की को ट्रोल करना गलत है.

सहवाग के जोक में उस लड़की को टैग नहीं किया गया था. वह हमारी हंसी में शामिल नहीं थी लेकिन कुछ पत्रकारों ने अन्य लोगों के साथ हमलोगों के ऊपर उंगली उठाना शुरू कर दिया.

उन्होंने अपने एजेंडे के हिसाब से हमें घेरना शुरू कर दिया. यह बदमाशी है. यदि आप सोचते हैं आप किसी को सता सकते हैं तो आपको दूसरी तरफ से भी सामना करना होगा.

डीयू में हुई हिंसा को युद्ध के खिलाफ उसकी अपील से कैसे जोड़ा गया? वीरू के जोक को हिंसा के समर्थन में कैसे जोड़ दिया गया?

मुद्दा यह है कि यह कोई मुद्दा ही नहीं है, लेकिन इस मामले में चीजों को जानबूझकर घालमेल किया जा रहा है.

लड़की की आवाज बहुत  महत्वपूर्ण है लेकिन सभी नागरिकों की आवाज़ से ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं है? ऐसा नहीं है कि वह सभी शहीदों और उनके बच्चों का प्रतिनिधित्व करती है.

यह उसकी निजी राय थी और उसी रूप में लिया जाना चाहिए. मेरी निजी राय है कि लोगों को युवाओं के कंधे पर बंदूक रखकर नहीं दागना चाहिए. छात्रों को पढ़ना चाहिए, बहस करनी चाहिए और उन्हें एक-दूसरे से सीखना चाहिए.

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वे हमारे देश के भविष्य हैं और मैं अपने भविष्य को लेकर दुखी नहीं हूं क्योंकि हमलोगों के चारों तरफ ऐसे साहसिक और खुलकर बोलने वाले लोग हैं.

एक शहीद की बेटी के प्रति असंवेदनशीलता को लेकर मैं आप सबसे कहना चाहता हूं कि मेरे 6 दोस्तों ने देश के लिए अपनी जान दे दी. इनके साथ मेरे और कई लोग भी हैं. मेरे राज्य के हर गांव में शहीद हैं.

हां, जंग गलत है, लेकिन इसकी शुरुआत हम नहीं करते हैं. हम अपनी सीमा की रक्षा करने से पीछे नहीं हट सकते चाहे इसके लिए हमें जान ही क्यों न गंवानी पड़े. हम आखिर इससे कैसे निपट सकते हैं? हंसी और मजाक से? अब इस मुद्दे को मैं यहीं खत्म करना चाहता हूं.

दरअसल रामजस कॉलेज में एबीवीपी और लेफ्ट संगठन के छात्रों में हिंसक झड़प हुई थी. कारगिल युद्ध में शहीद की बेटी गुरमेहर कौर ने एक पोस्ट किया था. इस पोस्ट पर सोशल मीडिया के ट्रोल्स ने उन्हें अपने निशाने पर लेना शुरू कर दिया था.

अपने एक ट्वीट में गुरमेहर कौर ने अपने पिता की मौत की वजह पाकिस्तान को नहीं भारत पाकिस्तान युद्ध को बताया था.

जिसके बाद वीरेंद्र सहवाग ने एक ट्वीट किया जिसमें सहवाग के पोस्टर पर लिखा था 'मैंने दो बार ट्रिपल सेंचुरी नहीं मारी मेरे बल्ले ने ये सेंचुरी मारी है.' सहवाग के इस ट्वीट को लोगों की काफी आलोचना का सामना करने पड़ा. क्योंकि इस ट्वीट को लोग गुरमेहर के ट्वीट से जोड़कर देख रहे थे.

सहवाग के ट्वीट को रणदीव हुड्डा ने रिट्वीट करते हुए कुछ स्माइली पोस्ट किए थे. लोगों ने इसका सीधा मतलब सहवाग का समर्थन और गुरमेहर के विरोध से निकाला था. और एक के बाद एक कई लोग रणदीप के इस ट्वीट की आलोचना करने लगे.

सहवाग के ट्वीट ने गुरमेहर कौर को भी दुखी कर दिया. गुरमेहर कौर ने NDTV के शो 'लेफ्ट, राइट एंड सेंटर' के दौरान भी कहा, '(वीरेंद्र) सहवाग का ट्वीट देखकर मेरा दिल टूट गया... मैं बचपन से उन्हें खेलते हुए देखती आ रही हूं.'

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