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छत्तीसगढ़: 24 साल बाद दिखा ब्लैक पैंथर लेकिन बाघ अपने ही घर से गायब

छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में आखिरकार पहली बार ब्लैक पेंथर की एक झलक देखने को मिली है

Updated On: Apr 24, 2018 05:06 PM IST

Subhesh Sharma

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छत्तीसगढ़: 24 साल बाद दिखा ब्लैक पैंथर लेकिन बाघ अपने ही घर से गायब
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छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में आखिरकार पहली बार ब्लैक पेंथर की एक झलक देखने को मिली है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, वन विभाग के अधिकारियों ने गरियाबंद जिले में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में ब्लैक पैंथर के होने की पुष्टि की है. 2016 से 2017 के बीच पूरे टाइगर रिजर्व में 200 से ज्यादा कैमरा लगाने के बाद ब्लैक पैंथर की दुर्लभ तस्वीर सामने आई हैं.

लौट आया मोगली का बघेरा

कुछ गार्ड्स ने ब्लैक पैंथर के दिखने की बात कही थी. जिसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने कैमरा लगाने का कदम उठाया था. 1800sqkm में फैले इस जंगल में 24 साल बाद ब्लैक पैंथर की वापसी हुई है. इस खबर के सामने आने से वन्यजीव प्रमियों में खुशी है. लेकिन अभी भी पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि ब्लैक पैंथर यहां फल-फूल रहे हैं.

प्रतिकातमक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

आपको बता दें कि ब्लैक पैंथर कोई अलग प्रजाति नहीं है, बल्कि ये तेंदुए ही हैं. लेकिन जीन्स में आए बदलावों के कारण इनका रंग आम तेंदुओं से अलग हो जाता है.

कब जागेगा वन विभाग

इससे पहले 2017 में 112 साल बाद पहली बार छत्तीसगढ़ में इंडियन माउस डियर दिखा था. हिरण की ये खतरे में पड़ी प्रजाति गारियाबंद में दिखी थी. विलुप्ति की कगार पर खड़े ये जानवर तेजी से जंगलों से गायब होते जा रहे हैं. लेकिन वन विभाग और सरकार में इसे लेकर कोई गंभीरता नजर आ रही है. ब्लैक पैंथर का दिखना एक अच्छी खबर है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से टाइगर का नामोनिशान मिट चुका है.

शिकार पर नहीं लग रही लगाम

यहां पिछले साल देखे गए बाघ के जोड़े का शिकार होने का अंदाजा लगाया जा रहा है. पुलिस ने बाघ की खाल बेचने की फिराक में घूम रहे दो लोगों को 14 फरवरी को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज दिया था. आरोपियों ने सोनाबेड़ा जंगल में बाघ का शिकार करने की बात कुबूल की थी. बाघों का ये जोड़ा दो-तीन साल पहले ही पास के जंगलों से उदंती-सीतानदी में माइग्रेट किया था. लेकिन अब यहां इनका एक भी सुराग नहीं मिल रहा है.

अपने ही घर से बाघ लापता

अगर ये सच है तो फिर मान लीजिए की अपने ही घर से बाघ विलुप्त हो गया है. 200 में से एक भी कैमरा ट्रेप में बाघ की मौजूदगी का एक भी सबूत वन विभाग के हाथ नहीं लगा है. उदंती और सीतानदी वाइल्डलाइफ सेंचुरी को मिलाकर टाइगर रिजर्व बनाए जाने से पहले सीतानदी वाइल्डलाइफ सेंचुरी में 2005 तक करीब पांच बाघ हुआ करते थे. लेकिन आज हालत ये है कि यहां के जंगल से बाघों का सफाया हो चुका है.

tiger

2009 में टाइगर रिजर्व का दर्जा पाने वाले उदंती-सीतानदी में आज भी इनसानी गतिविधियों (ह्यूमन इंटरफेरेंस) पर लगाम नहीं लगाई जा सकी है. ये दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है.

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