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बीजेपी सांसद के पैर धुलवाकर पी गया पानी, फिर कहा- भाई के साथ जुड़ा है इमोशन

निशिकांत दुबे के समर्थक पवन शाह ने कहा इस काम को राजनीतिक रूप न दें, उसने अपने गुरु के पांव धोए और वो पानी पी लिया तो कौन सा गुनाह कर दिया

Updated On: Sep 17, 2018 05:02 PM IST

FP Staff

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बीजेपी सांसद के पैर धुलवाकर पी गया पानी, फिर कहा- भाई के साथ जुड़ा है इमोशन

झारखंड के गोड्डा के बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे अपनी एक गलत हरकत की वजह से सुर्खियों में छा गए हैं. उनके एक फेसबुक पोस्ट की वजह से उन्हें लोग ट्रोल कर रहे हैं. दरअसल उस तस्वीर में दुबे अपने एक समर्थक से सार्वजनिक रूप से मंच पर पांव धुलवाते नजर आ रहे हैं. बाद में उस कार्यकर्ता ने पांव धुले उस पानी को चरणामृत समझकर पी भी लिया. सिर्फ इतना ही नहीं अब उस समर्थक ने अपनी तरफ से सफाई भी दी है. निशिकांत दुबे के समर्थक और कार्यकर्ता पवन शाह ने कहा- 'मेरे इस काम को राजनीतिक रूप न दें. मैनें अपने गुरु के पांव धोए और वो पानी पी लिया तो कौन सा गुनाह कर दिया. ये उनके प्रति मेरी भावनाएं थीं. वह मेरे भाई की तरह हैं. जो मेरी झूठी निंदा कर रहे हैं मैं उनके खिलाफ केस करूंगा.

आपको बता दें कि बीते रविवार को निशिकांत दुबे 21 करोड़ रुपए की लागत वाले कलाली कनभारा पुल के शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंचे थे. यहां मंच पर भाषण देने के बाद उनके एक समर्थक और कार्यकर्ता पवन शाह ने सैकड़ों लोगों की भीड़ के सामने उनका पैर धोकर स्वागत किया. यही नहीं उसने पांव धुले उस पानी को चरणामृत मानकर पी भी लिया. हैरानी की बात यह है कि जब यह सब हो रहा था तो निशिकांत दुबे खुशी-खुशी इसे देख रहे थे. उन्होंने उसे रोका भी नहीं. भीड़ में मौजूद किसी ने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया और इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया. यह वीडियो तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो गई.

वहीं निशिकांत दुबे ने भी इस तस्वीर को अपने फेसबुक पेज पर शेयर करते हुए कार्यकर्ता की महानता की तारीफ की. इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने कमेंट कर उनकी आलोचना की. यूजर्स ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया. ट्रोल होने के बाद बीजेपी सांसद ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि झारखंड में आदिवासी समाज में मेहमान के पैर धोने की पुरानी परंपरा है. फेसबुक पोस्ट पर विवाद बढ़ने पर निशिकांत दुबे ने दोबारा उसी तस्वीर के साथ दूसरी पोस्ट डाली. इसमें उन्होंने ट्रोल करने वालों पर पलटवार करते हुए लिखा, 'अपनों में श्रेष्ठता बांटी नहीं जाती. कार्यकर्ता यदि खुशी का इजहार पैर धोकर कर रहा है तो क्या गजब हुआ. उन्होंने जनता के सामने कसम खाई थी और उनको ठेस ना पहुंचे इसलिए उनका सम्मान किया.'

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