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J&K: बारूद डिपो के पास 'अवैध' मकान बना रहे निर्मल सिंह, आर्मी ने जताया विरोध

निर्मल सिंह ने कहा, आर्मी लोगों को शौचालय भी नहीं बनाने दे रही. लोग परेशान हैं. चूंकि मेरा घर बन रहा है, इसलिए राजनीतिक विरोध कर रहे हैं

FP Staff Updated On: May 12, 2018 01:52 PM IST

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J&K: बारूद डिपो के पास 'अवैध' मकान बना रहे निर्मल सिंह, आर्मी ने जताया विरोध

जम्मू और कश्मीर के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने नगरोटा आयुध डिपो के ठीक बगल में प्लॉट खरीदा है. इन नेताओं में प्रदेश विधानसभा के मौजूदा स्पीकर निर्मल सिंह और उप-मुख्यमंत्री कविंदर गुप्ता का नाम शामिल है.

इस प्लॉट पर निर्मल सिंह ने अपना मकान बनाना शुरू कर दिया है जिसका कड़ा विरोध हो रहा है. आर्मी के 16वें कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (ले.ज.) सरनजीत सिंह ने इस निर्माण पर ऐतराज जताया है. निर्मल सिंह को लिखी एक चिट्ठी में उन्होंने कहा है कि निर्माणाधीन मकान अवैध है 'जिसका असर आयुध डिपो और उसके आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर पड़ेगा.'

नगरोटा के एक आर्मी अफसर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि ले.ज. सिंह ने पहले तो स्थानीय प्रशासन को इस बाबत सूचना दी लेकिन उधर से कोई जवाब न मिलने पर उन्होंने सीधा निर्मल सिंह को पत्र लिखा.

इस बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में निर्मल सिंह ने कहा, निर्माण का विरोध 'राजनीति से प्रेरित है. इसके लिए कोई कानूनी बाध्यता नहीं है जो मैं घर न बना सकूं.' उन्होंने आगे कहा, 'आर्मी ने जो दावा किया है, वह उसका विचार है. मेरे लिए कोई बाध्यता नहीं है.'

जिस कंपनी से प्लॉट खरीदे गए, उसका नाम है हिमगिरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड. सन 2000 में बनी इस कंपनी के शेयरधारकों में कविंदर गुप्ता और पुंछ से बीजेपी सांसद जुगल किशोर के नाम शामिल हैं. संयोग से इसी कंपनी के पास हिमाचल प्रदेश के चांबा जिले में बन रहे एक बिजली प्लांट का भी ठेका है. निर्मल सिंह स्पीकर बनने से पहले प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ बिजली मंत्री भी रह चुके हैं.

कोर कमांडर ने अपने पत्र में लिखा है कि आयुध डिपो से सटे निर्माण का काम वर्क्स ऑफ डिफेंस एक्ट, 1903 का उल्लंघन है क्योंकि इसे भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय ने अधिसूचित किया है. इतना ही नहीं, 7 अगस्त 2015 को जम्मू के तत्कालीन डीसी ने एक अधिसूचना जारी कर '4 एएसडी की चारदीवारी के आसपास एक हजार यार्ड के दायरे में किसी प्रकार के निर्माण से रोका है.'

इन आरोपों का जवाब देते हुए निर्मल सिंह ने कहा, सन 1970 से नगरोटा में आयुध डिपो है. इससे सटा बन नाम का एक गांव है. उग्रवाद के समय आर्मी ने डिपो के चारों ओर दीवार खड़ी कर दी. आर्मी बोल रही है कि 1000 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं कर सकते. मेरा घर 530 मीटर पर बन रहा है. जब से मैंने घर बनाना शुरू किया है, तब से राजनीति से प्रेरित विरोध किया जा रहा है.

निर्मल सिंह ने आगे कहा, आर्मी लोगों को शौचालय भी नहीं बनाने दे रही. लोग परेशान हैं. आप वहां के लोगों से बात करके देखें. चूंकि यह मेरा घर है, इसलिए राजनीतिक विरोध हो रहा है. उन्होंने (आर्मी) ने अब तक इसके खिलाफ कोई स्थगन आदेश क्यों नहीं लिया?

निर्मल सिंह ने कहा, यह मेरी प्रॉपर्टी है. मैं जैसे चाहूं अपनी प्रॉपर्टी का उपयोग करने का अधिकार रखता हूं. यह मेरा मूल अधिकार है और आप (आर्मी) इसे नहीं दबा सकते. वे रक्षा मंत्री का हवाला दे रहे हैं. उन्हें यह जमीन पहले ही अधिग्रहित कर लेनी चाहिए थी. जब मैंने घर बनाना शुरू कर दिया तो इसके खिलाफ विरोध होने लगा.

घर की जमीन हिमगिरी कंपनी से खरीदी गई. इस बारे में निर्मल सिंह ने कहा, जमीन हिमगिरी इंफ्रा ने खरीदी. इसकी एक बिजली कंपनी भी है जिसमें मेरी पत्नी (ममता सिंह) निदेशक हैं. घर की जमीन भी उन्हीं के नाम है. उप-मुख्यमंत्री कविंदर गुप्ता ने भी यहां जमीन खरीदी है. पहले वे भी हिमगिरी में निदेशक थे लेकिन स्पीकर बनते ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया. हालांकि वे कंपनी में शेयरधारक अब भी हैं. सांसद जुगल किशोर भी इस कंपनी से जुड़े हैं. सुरिंदर महाजन कंपनी के चेयरमैन हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के एक सवाल पर कविंदर गुप्ता ने कहा, मैंने वहां एक प्लॉट खरीदा है लेकिन बनाया कुछ भी नहीं है. आर्मी के ऐतराज वाले सवाल पर उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया.

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