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बीजेपी नेताओं को लोकपाल से ‘नफरत’ हो गई है: हजारे

हजारे ने कहा, ‘लोकपाल और लोकायुक्त के मेरे रामलीला मैदान आंदोलन के दौरान पूरा देश मेरे साथ खड़ा हुआ. एक माहौल बना. यही कारण है कि आप (बीजेपी) सत्ता में आए.'

Updated On: Feb 04, 2019 10:29 PM IST

Bhasha

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बीजेपी नेताओं को लोकपाल से ‘नफरत’ हो गई है: हजारे

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का बीते छह दिन में अनशन के दौरान करीब सवा चार किलोग्राम वजन कम हो गया है. वह लोकपाल की नियुक्ति को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं.

हजारे के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ने के बीच, शिवसेना और मनसे ने बीजेपी नीत सरकार से हजारे का जीवन बचाने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की.

हजारे ने केंद्र और महाराष्ट्र में लोकपाल एवं लोकायुक्त नियुक्ति और किसानों के मुद्दों को लेकर महाराष्ट्र के अहमदनगर में अपने पैतृक गांव रालेगण सिद्धि में 30 जनवरी को अनशन शुरू किया था.

हजारे ने कहा, ‘लोकपाल और लोकायुक्त के मेरे रामलीला मैदान आंदोलन के दौरान पूरा देश मेरे साथ खड़ा हुआ. एक माहौल बना. यही कारण है कि आप (बीजेपी) सत्ता में आए. अब आप उन लोगों से धोखा कर रहे हैं जो आपको सत्ता में लेकर आए.’

उन्होंने कहा, ‘अरुण जेटली और सुषमा स्वराज जैसी नेताओं ने कभी संसद में लोकपाल की मांग का पुरजोर बचाव किया था. लेकिन सत्ता में आने के बाद वे इस पर चुप हैं. लगता है कि उन्हें लोकपाल और लोकायुक्त से नफरत हो गई है. आंदोलन से वे सत्ता में आए लेकिन वे इसे भूल गए हैं.’

हजारे को देखने वाले डाक्टर धनन्जय पोटे ने सोमवार को पीटीआई से कहा, 'अन्ना का अब वजन 71.1 किलोग्राम है और अनशन शुरू करने के समय से उनका सवा चार किलोग्राम वजन घट चुका है. उनका रक्तचाप भी अनशन के कारण बढ रहा है.' गांववालों ने हजारे के स्वास्थ्य पर नजर रखने तथा प्रतिदिन रिपोर्ट तैयार करने के लिए पोटे से कहा है.

सरकारी अधिकारियों सहित कई लोगों ने बीते छह दिन में हजारे से बात करके उनसे अनशन खत्म करने को कहा है. मनसे प्रमुख राज ठाकरे तथा जल पुरुष नाम से विख्यात राजेंद्र सिंह ने सोमवार को हजारे से मुलाकात की और उनके आंदोलन को अपना समर्थन दिया. ठाकरे ने हजारे से कहा कि वह 'बेकार' सरकार के लिए अपने जीवन का बलिदान ना दें.

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने उनसे समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायणन की तरह भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने को कहा. उद्धव ने रविवार को हजारे के आंदोलन को समर्थन दिया था.

शिवसेना ने सेामवार को अपने मुखपत्र ‘सामना’ में संपादकीय लिखकर बीजेपी नीत सरकार से उनकी जिंदगी बचाने की अपील की. हजारे यह भी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर मोदी सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किये तो वह पदम भूषण पुरस्कार वापस कर देंगे.

राज ठाकरे ने हजारे से अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने और बीजेपी नीत सरकार को 'दफन' करने के लिए उनके साथ मिलकर राज्य का दौरा करने का अनुरोध किया.

मनसे नेता और हजारे ने यादव बाबा मंदिर परिसर के एक बंद कमरे में 20 मिनट बैठक की. बैठक के बाद ठाकरे ने हजारे के प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों को संबोधित किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर देश को 'धोखा' देने एवं अपनी ही पार्टी के चुनावी घोषणापत्र को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, 'मैंने अन्ना से अपील की है कि वह इस बेकार सरकार के लिए अपने जीवन का बलिदान नहीं दें. मैंने उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके किसी वादे पर भरोसा नहीं करने को कहा है.' ठाकरे ने कहा कि मोदी ने 18 दिसंबर 2013 को लोकपाल विधेयक के समर्थन में ट्वीट किया था.

उन्होंने कहा, 'मोदी सरकार के पांच साल पूरे हो चुके हैं लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ. वर्ष 2013 में अन्ना के आंदोलन के कारण ही आज लोग सत्ता में हैं. उन्हें यह भूलना नहीं चाहिए.'

ठाकरे ने कहा, ' (दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद) केजरीवाल को अन्ना के आंदोलन के कारण पूरा देश जानता है. अब वह (केजरीवाल) सत्ता में हैं और अन्ना के स्वास्थ्य के प्रति कोई चिंता व्यक्त नहीं कर रहे.'

इससे पहले सुबह राजेंद्र सिंह ने भी हजारे से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त की. सिंह ने कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून 2013 में 'खामियों' और किसानों की समस्याओं पर चर्चा की.

अन्ना हजारे के अनिश्चितकालीन अनशन और पद्म भूषण पुरस्कार लौटाने की चेतावनी देने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को बुजुर्ग गांधीवादी नेता से अनशन खत्म करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी लगभग सभी मांगें मान ली हैं.

अपने राजनीतिक विरोधियों पर प्रहार करते हुए फडणवीस ने कहा कि हजारे को पहले में उन लोगों के बयान याद करने चाहिए जो आज उनका समर्थन कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा, 'हम अन्ना से आग्रह करते हैं कि अनशन खत्म करें. हमने उनकी लगभग सभी मांगें मान ली हैं और खासकर लोकायुक्त के गठन से संबंधित मांग को स्वीकार कर लिया है और संयुक्त समिति के गठन की मांग भी स्वीकार कर ली है. हमने उन्हें मान लिया है.

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