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सबरीमाला मंदिर की परंपरा और रिवाजों की रक्षा के लिए BJP शुरू कर रही है 'सबरीमाला संरक्षण यात्रा'

कर्नाटक में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा इस रथयात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने वाले हैं

Updated On: Nov 08, 2018 02:04 PM IST

FP Staff

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सबरीमाला मंदिर की परंपरा और रिवाजों की रक्षा के लिए BJP शुरू कर रही है 'सबरीमाला संरक्षण यात्रा'
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अभी हाल फिलहाल केरल बीजेपी अध्यक्ष श्रीधरन पिल्लई का एक कथित ऑडियो वायरल हुआ था. ऑडियो में वह यह कहते हुए पाए गए थे कि सबरीमाला मंदिर विवाद बीजेपी के लिए एक सुनहरा मौका है. बाद में उन्होंने इसे एक राजनीतिक सुझाव भर करार दिया, लेकिन केरल में सबरीमाला विवाद को लेकर मचे घमासान से ऐसा नहीं लग रहा. बीजेपी ने मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में सबरीमाला संरक्षण यात्रा शुरू की है.

मंदिर की परंपरा और रिवाजों को बचाने का दावा करते हुए बीजेपी यह रथयात्रा निकाल रही है. इसकी शुरुआत केरल के कासरगोड जिले से होगी और 13 नवंबर को इरुमली पहुंचकर समाप्त होगी. इस दौरान बीजेपी अध्यक्ष पीएस श्रीधरन पिल्लई सहित कई विधायक और पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे. साथ ही सैकड़ों की संख्या में संन्यासी, 62 बिशप, 12 मौलाना भी शामिल होंगे.

SC के फैसले का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन लोगों की भावनाओं का सम्मान हो

कर्नाटक में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा इस रथयात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने वाले हैं. येदियुरप्पा ने कहा, 'हमारी संस्कृति ने हमेशा महिलाओं को प्रमुखता दी है. यह सब केरल सरकार की वजह से हुआ है. वह सुप्रीम कोर्ट के सामने इस केस को ठीक से रख नहीं पाए. इसी वजह से मामला इतना तनावपूर्ण हो गया है.

90 % से ज्यादा महिलाएं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में खड़ी हैं. यह अब जरूरी है कि केरल के मुख्यमंत्री कुछ जरूरी कदम उठाएं और सुप्रीम कोर्ट के से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को रोकने के लिए अपील करें. हमारी पार्टी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध नहीं कर रही है लेकिन लोगों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए.'

वहीं 16 नवंबर को मंदिर का कपाट नियमित वार्षिक तीर्थयात्रा के लिए खुलने वाला है. इस कार्यक्रम में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के शामिल होने की बात कही जा रही है.

सबरीमाला विवाद के शुरू होने के बाद से अमित शाह का केरल दौरा बढ़ गया है. पार्टी इस मुद्दे का जमकर इस्तेमाल करना चाहती है. कुछ दिनों पूर्व ही अमित शाह पार्टी कार्यालय का उद्धघाटन करने यहां पहुंचे थे. उसी दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि सरकार और कोर्ट को ऐसे आदेश देने ही नहीं चाहिए, जिसका पालन ना हो सके. जो लोगों की आस्था का सम्मान कर सकें. कन्नूर हमारे लिए तीर्थस्थल जैसा है. कम्युनिस्ट सरकार केरल के अंदर मंदिरों की परंपरा को खत्म करने की कोशिश कर रही है.

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