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महाराष्ट्र में सरकार ने रद्द किए 72 हजार सहकारी संस्थाओं के रजिस्ट्रेशन

राज्य की 72 हजार सहकारी संस्थाओं का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है.

Updated On: Jan 17, 2017 10:25 PM IST

Sanjay Sawant

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महाराष्ट्र में सरकार ने रद्द किए 72 हजार सहकारी संस्थाओं के रजिस्ट्रेशन

महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद पहली बार फर्जी सहकारिता संस्थाओं (कोऑपरेटिव यूनियन्स) पर लगाम लगाने की कोशिश की गई है. राज्य की 72 हजार सहकारी संस्थाओं का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है. इन संस्थाओं पर कई तरह के 12 मानदंडों के आधार पर कार्रवाई की गई है. महाराष्ट्र में कुल दो लाख 38 हजार पंजीकृत सहकारी संस्थाएं हैं.

इसके पहले के सरकार के दौरान फर्जी सहकारी संस्थाओं के मनमाने कामकाज को लेकर कभी भी दखल देने का प्रयास नहीं किया गया. पूर्व सहकारिता मंत्री हर्षवर्धन पाटिल ने महाराष्ट्र राज्य सहकारी परिषद का अध्यक्ष पद भरने में रूचि नहीं दिखाई. दरअसल वे अपने सामने किसी को भी नहीं चाहते थे, इसका परिणाम यह हुआ कि सहकारी संस्थाओं की ''मनमर्जियों'' पर लगाम लगाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं हो पाए.

प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद इस दिशा में प्रयास शुरू हुए. तत्कालीन सहकारिता मंत्री चंद्रकांत दादा पाटिल ने इस मसले पर पहल करते हुए महाराष्ट्र राज्य सहकारी परिषद के अध्यक्ष पद पर शेखर सुरेश चरेगांवकर को नियुक्त किया. चरेगांवकर की नियुक्ति के बाद बाकायदा फर्जी सहकारी संस्थाओं की लगाम कसनी शुरू हुई.

सहकारी संस्थाओं में खूब हुई है धांधली

साल 2015 से 2016 तक संस्थाओं का सर्वेक्षण किया गया. इस सर्वेक्षण में पता चला कि कई संस्थाओं ने कई साल से ऑडिट तक नहीं कराया. कई के पास संस्था गठित करने का कोई उद्देश्य ही नहीं था, संस्था कब शुरू की गई, इसकी किसी को जानकारी तक नहीं थी, या संस्था कब बंद कर दी गई, इसकी तक जानकारी नहीं थी.

पंजीकरण रद्द की गई संस्थाओं को एक माह का नोटिस भेजा गया है, जिसमें उनसे सफाई मांगी गई है. जिन संस्थाओं का पंजीकरण रद्द किया गया है, उनमें कामगार, पतपेढ़ी, गृह निर्माण संस्थाएं शामिल हैं. सबसे अधिक पश्चिम महाराष्ट्र और मराठवाडा की फर्जी सहकारी संस्थाओं का पंजीकरण रद्द किया गया है.

बता दें कि महाराष्ट्र में सहकारी संस्थाओं का अच्छा खासा जाल है. सहकारी संस्थाएं ग्रामीण संस्थाओं की रीढ़ मानी जाती हैं, लेकिन इन संस्थाओं के मनमाने कामकाज को लेकर ढेरों शिकायत मिल रही थी. सहकारिता संस्थाओं के माध्यम से फर्जी सदस्यों को दिखाना और उनके नाम पर लोन उठाने जैसे कई गलत काम किए जा रहे थे. ऐसी संस्थाओं के पंजीकरण रद्द होने से निश्चित तौर पर सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी.

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