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मैं अगर आज जिंदा हूं तो केपीएस गिल साहब की वजह से: मनिंदरजीत सिंह बिट्टा

अगर केपीएस गिल नहीं होते तो हमारे से शायद पंजाब टूट जाता

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: May 26, 2017 07:40 PM IST

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मैं अगर आज जिंदा हूं तो केपीएस गिल साहब की वजह से: मनिंदरजीत सिंह बिट्टा

बात आतंकवाद की चले तो दो नाम किसी की भी जुबान पर आ ही जाते हैं. पंजाब के पूर्व आईपीएस अधिकारी केपीएस गिल और मनिंदरजीत सिंह बिट्टा. एक ने वर्दी पहनकर आतंक के खात्मे के लिए किसी शेर की तरह गरजता रहा तो दूसरा आतंकवाद के खिलाफ ही अपनी जिंदगी को मकसद बना गया.

केपीएस गिल के न रहने से मनिंदरजीत सिंह बिट्टा को निजी नुकसान हुआ है. बिट्टा के लिए गिल साहब पिता से कम नहीं थे. फर्स्टपोस्ट से बातचीत में मनिंदरजीत सिंह बिट्टा केपीएस गिल को लेकर भावुक हो गए. उन्हें याद आया वो वाकया जब उन पर सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ था.

‘मेरे गिल साहब के साथ बहुत ही व्यक्तिगत संबंध थे. वो मेरे पिता समान थे. एक बार मेरे ऊपर अमृतसर में बहुत बड़ा आतंकी हमला हुआ था. गिल साहब खुद मेरे लिए चंडीगढ़ से प्लेन लेकर आए. मुझे खुद उन्होंने अपने हाथों से पकड़ा,  खुद लिटाया फिर प्लेन से चंडीगड़ में पीजीआई हॉस्पिटल ले कर गए. हर रोज वो मेरा हाल पूछने आते थे. उनकी यादें कभी भुलाई नहीं जा सकती’

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बिट्टा केपीएस गिल की वजह से जिंदा हैं

बिट्टा के लिए केपीएस गिल की यादें आज भी ताजा हैं. उनका मानना है कि उन्हें नई जिंदगी केपीएस गिल की वजह से ही मिली.

‘मैं आज अगर जिंदा हूं तो उस बहादुर व्यक्ति की वजह से जिंदा हूं. मैं आज केपीएस गिल की वजह से जिंदा हूं. आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में केपीएस गिल साहब मेरी प्रेरणा बने कि एक आदमी वर्दी में लड़ सकता है तो मैं बिना वर्दी के क्यों न आतंकवाद से लड़ूं. गिल साहब मुझे बहुत हौसला देते थे. हम लोग आतंकवाद के खात्मे पर बहुत चर्चा किया करते थे.’

तकरीबन एक दशक तक आतंक की आग में झुलसे पंजाब को केपीएस गिल ने आतंकवाद से आजादी दिलाई.

बिट्टा कहते हैं कि अगर केपीएस गिल नहीं होते तो शायद पंजाब टूट जाता.

‘पंजाब के अंदर जो आतंकवाद समाप्त हुआ ये सब केपीएस गिल की वजह से हो सका. पंजाब के आतंकवाद को समाप्त करने मे गिल साहब का बहुत बड़ा रोल था. अगर केपीएस गिल नहीं होते तो हमारे से शायद पंजाब टूट जाता.’

केपीएस गिल का कद बहुत लंबा था

केपीएस गिल की बहादुरी के किस्से आज भी बिट्टा की आंखों के सामने मौजूद हैं. बिट्टा के मुताबिक ‘जब भी आतंकवादियों से मुकाबला होता था तो केपीएस गिल हमेशा खड़े रहते थे. उनका कद बहुत लंबा था. उनके अधिकारी उनसे कहते थे कि सर नीचे हो जाइए. नहीं तो आपको गोली लग जाएगी. लेकिन केपीएस गिल कहते थे कि मेरा जवान खड़ा है तो मैं भी खड़ा रहूंगा. आतंकियों से मुठभेड़ में उन्होंने गोली लगने की कभी परवाह नहीं की’.

केपीएस गिल की कार्यशैली पर कभी राजनीति या लालफीताशाही हावी नहीं हो सकी. वो अपने अंदाज और अपनी स्टाइल से काम किए जाने के लिए मशहूर थे

आतंकवाद के खिलाफ केपीएस गिल लड़ाई को लेकर बेहद संजीदा थे. वो पुलिस और राजनीति के बीच में निजी हितों को तवज्जो नहीं देते थे. उनके मुताबिक पहले आतंकवाद से लड़ाई का मिशन है. जाहिर तौर पर  केपीएस गिल के न रहने के बाद उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती. वो हमेशा नई पीढ़ी, सेना, सशस्त्रबल और नए आईपीएस अधिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे.

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