Co Sponsor
In association with
In association with
S M L

नीतीश की समीक्षा विकास यात्रा पर बिहार में क्यों छिड़ा है संग्राम?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बीते मंगलवार से ही राज्य में विकास समीक्षा यात्रा पर हैं

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Dec 14, 2017 10:44 PM IST

0
नीतीश की समीक्षा विकास यात्रा पर बिहार में क्यों छिड़ा है संग्राम?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले मंगलवार से ही राज्य में विकास समीक्षा यात्रा पर हैं. नीतीश कुमार की यह यात्रा पश्चिमी चंपारण से शुरू हुई है. नीतीश कुमार यात्रा के पहले चरण में पांच दिनों तक राज्य के आठ जिलों का दौरा करेंगे.

इधर नीतीश कुमार पटना से निकले नहीं कि राजधानी के राजनीतिक तापमान में गर्माहट शुरू हो गई. राज्य की राजनीति में अचानक ही उबाल दिखना शुरू हो गया. ठंड के इस मौसम में नीतीश की समीक्षा यात्रा ने राज्य के राजनीतिक तापमान में गर्माहट पैदा कर दी.

राज्य के राजनीतिक तापमान में आई अचानक इस गर्माहट की कई वजहें निकल कर सामने आ रही हैं. किसी की कुर्सी जाने का गम तो किसी को सत्ता में रहते हुए भी सत्ता से दूर होने का दर्द सता रहा है.

ये भी पढ़ें: संसद के शीतकालीन सत्र में भी दिखेगा गुजरात चुनाव का असर

वैसे तो ऐसी बातों को हल्के-फुल्के अंदाज में मीडिया के सामने रखना नीतीश कुमार की आदत रही है. लेकिन, अंदर ही अंदर इसका तोड़ निकालने में भी नीतीश की कोई सानी नहीं है.

गौरतलब है कि जब-जब नीतीश कुमार की विकास यात्रा बिहार में शुरू हुई है वह विवादों के साथ चर्चा में भी रही है. बिहार के मुख्यमंत्री ने पहली बार अपनी विकास यात्रा के क्रम में पटना से बाहर कैबिनेट की मीटिंग कर देश में काफी सुर्खियां बटोरी थी. गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यह यात्रा पिछले सप्ताह ही शुरू होने वाली थी, लेकिन उनकी अस्वस्थता के चलते यह यात्रा बीते मंगलवार को शुरू हुई.

nitish kumar 1

नीतीश कुमार की इस यात्रा पर विरोधी तो विरोधी सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं की भी नजरें टेढ़ी हो गई हैं. एक तरफ जहां नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने इस यात्रा के बारे में कहा है कि नीतीश कुमार को प्रायश्चित यात्रा निकालनी चाहिए. वहीं तेजस्वी यादव के इस बयान के बाद जेडीयू ने कहा है कि तेजस्वी यादव को क्षमा यात्रा पर निकलना चाहिए, तभी उनका प्रायश्चित पूरी होगी.

वहीं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार में एनडीए के पार्टनर जीतन राम मांझी भी बिहार सरकार पर एक के बाद एक आरोप लगा रहे हैं. बिहार में शराबबंदी को विफल बताते हुए मांझी ने आरोप लगाया है कि केवल गरीब लोगों को ब्रेथ एनलायजर द्वारा पकड़ा जा रहा है. उनका कहना है अगर सरकारी अधिकारियों की ठीक से जांच हो तो शाम को अधिकांश अधिकारी शराब पीते हुए पकड़े जाएंगे.

इतने पर भी मांझी नहीं रुके नीतीश की यात्रा पर कटाक्ष करते हुए कह डाला कि अगर राज्य में उनकी सरकार होती तो समान काम के बदले समान वेतन का सिद्धांत लागू कर देती. नीतीश कुमार को अपने सात निश्चय में एक निश्चय यह शामिल करना चाहिए कि राज्य के दलितों को पांच डिसिमल जमीन भी दी जाए.

राजनीति के जानकारों का मानना है कि सत्ता के गलियारे में पिछले 13 सालों से नीतीश कुमार ने महारत हासिल कर ली है. नीतीश कुमार को न तो जीतन राम मांझी से खतरा है न ही तेजस्वी यादव से.

ये भी पढ़ें: बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा, 'राहुल गांधी के इशारे पर चलता था जयंती नटराजन का पर्यावरण मंत्रालय'

नीतीश कुमार हाल के कुछ फैसलों के बाद अपनी इस यात्रा के जरिए जनता की नब्ज टटोलना चाह रहे हैं. विपक्ष भले ही नीतीश कुमार पर घोटालों का आरोप लगा रहा हो, लेकिन नीतीश कुमार जनता के सामने जाकर उनके मन को टटोलने का काम कर रहे हैं.

राज्य में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भले ही आरोप पर आरोप लगा रहे हों लेकिन नीतीश कुमार को पता है कि उनके आरोप लगाने से उनका कद घटने के बजाए और बढ़ ही रहा है.

तेजस्वी यादव

तेजस्वी यादव

गौरतलब है कि तेजस्वी यादव ने इस यात्रा को लेकर नीतीश कुमार पर जबरदस्त हमला बोला है. तेजस्वी के मुताबिक, ‘नीतीश कुमार ने अपने 13 साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल में दीमक और जोकों को जगह-जगह इसलिए स्थापित कर दिया है ताकि सिस्टम को खोखला और जनता का खून चूस सके. नीतीश कुमार इसी का मुआयना करने यात्रा पर निकले हैं.’

तेजस्वी यादव नीतीश कुमार से पूछते हैं कि बिहार में सृजन घोटाला, धान घोटाला, शौचालय घोटाला, सात निश्चय घोटाला, एलईडी घोटाला, जननी घोटाला और न जाने कितने घोटाले हो रहे हैं. आपकी सरकार क्या कर रही है?

जानकारों का मानना है कि जब से तेजस्वी यादव की कुर्सी गई है, आरजेडी के पूरे कुनबे में एक अजीब सी बौखलाहट देखने को मिल रही है. लालू प्रसाद यादव जहां सुबह-शाम पीएम मोदी को निशाना बना कर एक के बाद एक ट्वीट करते हुए नजर आ रहे हैं, वहीं उनके छोटे बेटे नीतीश कुमार पर एक से एक घाटाले का आरोप लगा रहे हैं. यहां तक की नीतीश कुमार की तुलना धृतराष्ट्र से कर दी जा रही है.

गौरतलब है कि बिहार में धीमी गति से काम होने पर नीतीश कुमार को समीक्षा यात्रा में विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है. इसका बड़ा कारण निकल कर जो सामने आ रहा है वह मुखिया की जगह वार्ड सदस्यों के माध्यम से काम कराने की नीति.

ये भी पढ़ें: सट्टा बाजार का दावा, गुजरात में होगी बीजेपी की बड़ी जीत

नीतीश कुमार ने जिस सात निश्चय के वायदे के साथ सत्ता में वापसी की थी उन सात निश्चय के वायदे को लेकर नीतीश कुमार को कहीं-कहीं विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है.

लेकिन, नीतीश कुमार ने इस यात्रा के जरिए बिहार के रूठे मुखिया प्रतिनिधियों को भी मनाने का काम किया है. सीएम ने राज्य के सभी मुखिया को भरोसा दिलाया है कि उनके अधिकार क्षेत्रों में सरकार किसी तरह की कटौती नहीं करने जा रही है. कुल मिलाकर नीतीश कुमार इस यात्रा के जरिए जहां अपनी भूल को सुधारने का काम करे रहे हैं. वहीं उनके विरोधी उन पर ताबड़तोड़ हमला कर रहे हैं.

ram vilas

जीतन राम मांझी को जहां यह शिकवा-शिकायत है कि नीतीश सरकार में उनको भाव नहीं मिल रहा है. नीतीश कुमार शायद इस बात को अभी तक नहीं भूले हैं कि किस तरह से जीतन राम मांझी ने दगाबाजी कर उनकी फजीहत कराई थी. जीतन राम मांझी को लगता है कि नीतीश कुमार उनसे ज्यादा रामविलास पासवान को तवज्जो दे रहे हैं. इसका प्रमाण भी है कि रामविलास पासवान के छोटे भाई पशुपति पारस राज्य में किसी भी सदन का सदस्य नहीं होते हुए भी मंत्री हैं और जीतन राम मांझी बाहर.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
AUTO EXPO 2018: MARUTI SUZUKI की नई SWIFT का इंतजार हुआ खत्म

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi