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पटना: सरकारी स्कूल में जाति-धर्म के आधार पर छात्रों में भेद, अलग किया क्लासरूम

बिहार के इस सरकारी स्कूल में पिछले चार सालों से छात्रों को जाति के आधार पर अलग-अलग क्लासरूम में बिठाया जा रहा है

Updated On: Dec 19, 2018 04:53 PM IST

FP Staff

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पटना: सरकारी स्कूल में जाति-धर्म के आधार पर छात्रों में भेद, अलग किया क्लासरूम

देश में जाति के आधार पर भेदभाव अब भी कितने गहरे तक घुसा हुआ है, इसका नमूना बिहार के एक सरकारी स्कूल में दिखा हुआ है. जब देश के बच्चों को उच्च शिक्षा और बेहतर जीवन जीने की ओर प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है, ऐसे में बिहार के इस सरकारी स्कूल में पिछले चार सालों से छात्रों को जाति के आधार पर अलग-अलग क्लासरूम में बिठाया जा रहा है.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, ये घटना बिहार के वैशाली जिले के लालगंज जिले की है. यहां के जीए हायर सेकेंडरी स्कूल में सालों से ये नियम चलाया जा रहा है. इस नियम की जानकारी बिहार के एजुकेशन डिपार्टमेंट को भी नहीं थी लेकिन हाल ही में अधिकारियों के निरीक्षण के बाद ये मामला सामने आया, जिसके बाद सरकार ने मंगलवार को इसकी जांच करने के आदेश दिए.

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जहां बच्चे स्कूल से साथ में आते-जाते हैं, लेकिन उन्हें स्कूल में जाति और धर्म के नाम पर अलग-अलग क्लासरूम में बिठाया जाता है. ऐसा पिछले चार सालों से हो रहा है. इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि दलित और मुस्लिम समुदाय के छात्रों को दूसरे क्लासरूम में जाने भी नहीं दिया जाता.

इस स्कूल में हिंदू-मुस्लिम छात्रों के लिए अलग से सेक्शन और कमरे बनाए गए हैं. साथ ही ऊंची जाति, ओबीसी और दलित जाति के बच्चों के लिए भी अलग कमरे रखे गए हैं. इन बच्चों की उपस्थिति भी अलग अटेंडेंस रजिस्टर पर रखा जाता है.

लालगंज के ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर अरविंद कुमार तिवारी ने बताया कि एक निरीक्षण के बाद सामने आया कि इस स्कूल में ऐसा नियम लागू किया गया है. इस संबंध में स्कूल पर उचित कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेने के लिए जिले के एजुकेशन ऑफिसर के पास विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई है.

हालांकि, स्कूल की हेडमिस्ट्रेस मीना कुमारी ने दावा किया है कि इस सिस्टम से बच्चों को कई फायदे हुए हैं. उन्होंने कहा कि 'स्कूल में जाति और धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया गया है. इस सिस्टम से स्कूल में एक निश्चित शिक्षा प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने और सरकारी योजनाओं को कार्यान्वित करने में मदद मिलती है.'

उन्होंने ये भी कहा कि बच्चों पर इस नियम का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है. यहां तक कि इस नियम के खिलाफ कभी कोई शिकायत भी नहीं आई है.

बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्णा नंदन प्रसाद वर्मा ने इस घटना पर हैरानी जताई है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हो रहा है, तो ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. जांच के बाद इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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