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क्या बिहार खो देगा डीजल इंजन बनाने वाला मेक इन इंडिया का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट?

बिहार के मुख्यमंत्री इस प्रोजेक्ट पर लटकी तलवार से काफी परेशान हैं. उन्होंने कहा है कि वो प्रस्तावित डीजल इंजन फैक्ट्री के भविष्य को लेकर रेल मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात करेंगे

FP Staff Updated On: Sep 19, 2017 12:20 PM IST

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क्या बिहार खो देगा डीजल इंजन बनाने वाला मेक इन इंडिया का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट?

बिहार के सारण जिले के मढ़ौरा में बन रही डीजल इंजन फैक्ट्री क्या शुरू होने के पहले ही बंद हो जाएगा? इस प्रोजेक्ट को देश का सबसे बड़ा मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट माना जा रहा है. लेकिन मैजूदा हालातों को देख कर लगता नहीं है कि इसकी शुरुआत हो पाएगी. और बिहार को इसका लाभ मिलेगा.

बिहार के मुख्यमंत्री भी इस प्रोजेक्ट पर लटकी तलवार से काफी परेशान हैं. उन्होंने कहा है कि वो प्रस्तावित डीजल इंजन फैक्ट्री के भविष्य को लेकर रेल मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात करेंगे. नीतीश कुमार ने कहा है कि मुझे रिपोर्ट्स के जरिए मढ़ौरा यूनिट को बंद किए जाने के प्रस्ताव के बारे में पता चला है. लेकिन ये बढ़ा चढ़ा कर बताया जा रहा है. जहां तक मुझे समझ आ रहा है, रेलवे लाइंस का इलेक्ट्रिफिकेशन चालू प्रक्रिया है और अभी भी देश में जो दो-तिहाई रेलवे लाइन इलेक्ट्रिफाइड नहीं है. इसलिए कोई भी सरकार अनइलेक्ट्रिफाइड सेगमेंट को नजरअंदाज नहीं कर सकती. मैंने रेल मंत्री से मिलने का फैसला किया है. मैं उनसे मामले पर चर्चा करूंगा.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन में भविष्य को देखते हुए मढ़ौरा डीजल इंजन फैक्ट्री पर ताला लगाना चाहती है. इस प्रोजेक्ट को दो साल पहले बिहार के सारण जिले में जनरल इलेक्ट्रिक के साथ साझेदारी कर शुरू किया गया था.

सूत्रों के मुताबिक, रेलवे बोर्ड के सदस्यों के साथ सात सितंबर को हुई रेल मंत्री पीयूष गोयल की समीक्षा बैठक में फैक्ट्री को बंद करने पर चर्चा की गई है. डीजल इंजन फैक्ट्री को बंद करने की सबसे बड़ी वजह ये बताई जा रही है कि रेलवे आने वाले समय में डीजल का इस्तेमाल बंद करने वाली है. रेलवे डीजल की बजाए इलेक्ट्रिक इंजन का इस्तेमाल करने के बारे में सोच रही है. डीजल के मुकाबले इलेक्ट्रिक इंजन सस्ते पड़ेंगे और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाएंगे.

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने कहा है कि फिलहाल मामले के सभी पक्षों की जांच की जा रही है. अभी कुछ भी बोलना जल्दबाजी होगी. आपको बता दें कि 2015 में रेलवे ने बिहार के मढ़ौरा में जनरल इलेक्ट्रिक को डीजल लोकोमोटिव फैक्ट्री और मधेपुरा में एलस्टॉम कंपनी को इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव फैक्ट्री का कॉन्ट्रेक्ट दिया था. इस कार्यक्रम में कई केंद्रीय मंत्री भी शामिल हुए थे, जिनमें वित्त मंत्री अरुण जेटली भी शामिल थे. इन दोनों प्रोजेक्ट्स में करीब 40 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया गया है. मढ़ौरा और मधेपुरा प्रोजेक्ट रेल सेक्टर के सबसे बड़े एफडीआई में से एक हैं.

प्रोजेक्ट को शुरूआत में अहमियत दी गई. लेकिन अब रेल मंत्रालय का मानना है कि नई हाई-हॉर्सपावर वाले डीजन इंजनों की जरूरत नहीं है. और जो मौजूदा स्टॉक है वो करीब 20 से 30 साल तक काम आएगा. ये दोनों ही प्रोजेक्ट्स पूर्व रेलवे मंत्री लालू प्रसाद यादव का बिहार को गिफ्ट माने जाते हैं. इनकी घोषणा लालू ने करीब 10 साल पहले अपने रेल बजट के भाषण के दौरान की थी.

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