S M L

BHU मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के बारे में बोली महिला- उसने किस किया, रूम में सोने को कहा

जिसकी सुप्रीटेंडेंट की नियुक्ति स्थायी करने के लिए बीएचयू के वीसी हैं इतने बेकरार, उसे पाया गया था यौन शोषण मामले में दोषी

Updated On: Sep 28, 2017 01:02 PM IST

FP Staff

0
BHU मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के बारे में बोली महिला- उसने किस किया, रूम में सोने को कहा

बीएचयू में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ का मामला जल्द शांत होता नहीं दिख रहा है. माना जा रहा है कि यूनिवर्सिटी की सुरक्षा में भारी चूक के कारण ही छात्रा के साथ छेड़छाड हुई है. वहीं वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी के रवैये को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सामने आया है कि मंगलवार को एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में वीसी त्रिपाठी जिस मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉक्टर की नियुक्ति को स्थायी कराने के लिए जी तोड़ प्रयास कर रहे थे. उन्हें एक अफ्रीकी युवती के यौन शोषण मामले में फिजी की अदालत दोषी करार दे चुकी है.

वीसी एग्जीक्यूटिव काउंसिल (EC) के सदस्यों की भी सुनने को तैयार नहीं नजर आ रहे हैं. बैठक में ईसी के एक सदस्य ने उपाध्याय की नियुक्ति को स्थायी करने का विरोध किया था. और कहा था कि उपाध्याय यौन शोषण मामले में दोषी ठहराए जा चुके हैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उपाध्याय पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला ने 2013 में जज के सामने अपने बयान में कहा था, 'उसने (उपाध्याय) मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने घर चलने पर जोर दिया. जब हम उसके रूम में पहुंचे, तो उसने मुझे अपने रूम में सोने को कहा. उसने ये सब हिंदी में कहा. उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और मेरे गालों पर दोबारा किस किया.'

ये घटना 25 अगस्त, 2012 की है, जब उपाध्याय फिजी नेशनल यूनिवर्सिटी (FNU) के वाइस-चांसलर के सलाहकार थे. नासिनू मजिस्ट्रेट्स कोर्ट ने उपाध्याय को यौन शोषण मामले में दोषी ठहराया था. उपाध्याय के वकील ने 2014 में फिजी के हाईकोर्ट में अपील की थी. लेकिन कोर्ट ने सजा के आदेश को बरकरार रखा था.

मजिस्ट्रेट्स कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, इस मामले में अभियुक्त ने पहले गालों पर किस किया. पीड़िता को लगा कि ये वेलकम किस है. अभियुक्त ने उसके कंधे पर हाथ रखा. फिर अभियुक्त ने उसे अपना घर दिखाने की बात कही, जब वो वॉक कर रहे थे तब अभियुक्त ने पीड़िता को बताया कि वो उसके साथ उसके घर में सो सकती है. इसके बाद अभियुक्त ने गलत तरीके से छुआ और उसके निजी अंगों को हाथ लगाया. पहली बार किसी महिला से मिलने पर उसके निजी अंगों को हाथ लगाना साफ तौर पर अभियुक्त के गलत इरादों को दर्शाता है.

इस मामले पर इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उपाध्याय ने कहा कि यूनिवर्सिटी (BHU) ने मेरे मामले में कानूनी सलाह ली थी और ये फैसला किया था कि विदेशी कोर्ट के फैसले की हमारे देश में कोई अहमियत नहीं है. इसलिए मेरा इंटरव्यू हुआ और चयन समिति ने मुझे चुना. फिजी में मैं स्टडी लीव पर था. ये जबरन वसूली का मामला था और क्योंकि मैंने इसका विरोध किया. इसलिए मुझे झूठे तरीके से फंसाया गया.

उपाध्याय के भारत लौटने के बाद उन्हें बीएचयू के सर सुंदरलाल हॉस्पिटल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट का चार्ज दे दिया गया.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi