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BHU लाठीचार्ज: पुलिस पर गिरी गाज, ACM, SO, CO हटाए गए

बीएचयू में छात्र-छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज को लेकर पुलिस अधिकारियों पर गाज गिरी है, इस मामले में एसओ, एसीएम और सीओ को हटा दिया गया है

FP Staff Updated On: Sep 25, 2017 10:59 AM IST

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BHU लाठीचार्ज: पुलिस पर गिरी गाज, ACM, SO, CO हटाए गए

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में शनिवार रात को छात्र-छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज में कार्रवाई हुई है. बीएचयू के लंका इलाके के एसओ को लाइन हाजिर कर दिया गया है. वहीं भेलूपुर के सीओ निवेश कटियार को भी उनके पद से हटा दिया गया है.

जैतपुरा के एसओ संजीव मिश्रा को लंका इलाके का नया एसओ बनाया गया हैं. चूंकि लंका थाना भेलूपुर सर्किल में आता है. इसके चलते भेलूपुर के सर्किल ऑफिसर निवेश कटियार पर भी कार्रवाई की गई है. इतना ही नहीं वाराणसी के अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम सुशील कुमार गोंड का कार्यभार भी बदल दिया गया है.

गौरतलब है कि बीएचयू परिसर में छात्रों द्वारा छेड़खानी का आरोप लगाते हुए छात्राएं वीसी से मिलने की जिद पर अड़ी थीं. वीसी ऑफिस ने 4-5 छात्राओं को मिलने की बात कही, लेकिन छात्राएं चाहती थीं कि सभी के सामने वीसी से बातचीत हो.

इस बीच शनिवार शाम वीसी धरना स्थल पर जाने के बजाय त्रिवेणी हॉस्टल में दूसरे गुट की छात्राओं से मिलने पहुंच गए, जो इस आंदोलन से अलग हो चुकी थीं. इसकी जानकारी होते ही धरने पर बैठी छात्राएं वीसी के दफ्तर पहुंचकर नारेबाजी करने लगीं. मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने पहले तो उन्हें रोका, बाद में शनिवार रात एक बजे तक पुलिस और छात्राओं के बीच झड़प चलती रही.

खबर फैलते ही छात्राओं के समर्थन में दूसरे हॉस्टल के छात्र भी आंदोलन में कूद गए और कुछ ही देर में आंदोलन हिंसक हो उठा. वहां तैनात 1500 से ज्यादा पुलिस के जवानों ने छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज किया. विरोध में छात्रों ने पथराव किया और पुलिस के वाहनों में आग लगा दी.

विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा

शुरू में तो सुरक्षा की मांग कर रही छात्राओं के आंदोलन पर ही चर्चा हो रही थी लेकिन लाठीचार्ज ने पूरे मामले को दूसरी तरफ मोड़ दिया है. लाठीचार्ज के बाद विपक्ष को जहां एक बड़ा मुद्दा मिल गया है वहीं सरकार इससे किसी तरह निपटने को छटपटा रही है. फौरी तौर पर हॉस्टल खाली कराया जा रहा है और पूरा कैंपस छावनी में तब्दील कर दिया गया है. चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. अभिभावक छात्राओं को अपने साथ लेकर घर जा रहे हैं.

वहीं दूसरी तरफ, राजनीतिक दलों को प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में हुई घटना ने एक प्लेटफॉर्म दे दिया है. कांग्रेस और एसपी के नेता यहां आ रहे हैं और लाठीचार्ज के मुद्दे पर पुलिस-प्रशासन समेत सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं. सभी एक स्वर में कह रहे, लाठीचार्ज गलत हुआ. मुख्यमंत्री ने भी कमिश्नर से लाठीचार्ज की पूरी रिपोर्ट तलब की है. साथ ही पूरे मामले की जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है.

क्या है छात्राओं की गलती?

इस सियासत के बीच छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा अब किसी को याद नहीं. जिसके लिए बीएचयू कैंपस में तीन दिन से छात्राएं आवाज उठा रही थीं, प्रदर्शन कर रही थीं, अपने लिए सुरक्षा मांग रही थीं. अब इस पर किसी का ध्यान तक नहीं. लाठीचार्ज क्यों हुआ, यह जांच का विषय है. लेकिन ऐसे क्या हालात बने की छात्राओं को विरोध प्रदर्शन करने पर उतरना पड़ा, यह सोचने का विषय है. जब तक मूल मुद्दा नहीं सुलझता, किसी और विषय पर जांच और आरोप-प्रत्यारोप बेमानी है.

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