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लड़कियों के संग गुंडागर्दी को क्यों आश्रय दे रहा है बीएचयू प्रशासन

लंबे समय से बीएचयू में लड़कियों के संग भेदभाव की खबरें आती रही हैं

Updated On: Sep 23, 2017 08:16 PM IST

Avinash Dwivedi
लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं

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लड़कियों के संग गुंडागर्दी को क्यों आश्रय दे रहा है बीएचयू प्रशासन

सर्वविद्या की राजधानी कहे जाने वाले बीएचयू में शनिवार को लड़कियों के धरने का तीसरा दिन है. लड़कियों ने बीएचयू मेन गेट (सिंहद्वार) को घेर रखा है और उनका प्रदर्शन जारी है. दो दिन पहले एक लड़की से बुरी तरह हुई छेड़छाड़ के विरोध में लड़कियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला है.

धरना दे रही लड़कियों का कहना है ऐसी छेड़छाड़ की घटनाएं बीएचयू में बेहद आम हैं. इसलिए बीएचयू प्रशासन भी इन्हें बहुत ही हल्के में लेता है. बहरहाल लड़कियां बीएचयू वीसी के वहां आकर उनसे बात करने की मांग पर अड़ी हुई हैं. जबकि बीएचयू प्रशासन ने भारी मात्रा में पुलिस बुला ली है. इसमें महिला पुलिस भी हैं. ऐसे में स्टूडेंट्स का मानना है कि लाठीचार्ज की संभावना है और प्रशासन हमारी समस्याओं को हल करने की बजाए जोर-जबरदस्ती कर हमें ही शांत कराना चाहता है.

क्या है मामला

मामला यूं है कि गुरुवार शाम भारत कला भवन के पास गुजरती हुई एक छात्रा को तीन लड़कों ने दबोच लिया था. इसके बाद उन्होंने खुली सड़क पर ही छात्रा को बुरी तरह से सेक्सुअली मॉलेस्ट किया. विरोध करने पर वो इस छात्रा को धमकाते हुए भाग निकले. पीड़ित छात्रा ने अपने शिकायती पत्र में भी इस बात का जिक्र किया है कि पास मौजूद सुरक्षा कर्मचारियों ने भी उसकी कोई मदद नहीं की. बल्कि उन्होंने उल्टे लड़की को ही डांटना शुरू कर दिया.

सुरक्षा कर्मियों का कहना था कि लड़की को इतनी रात में अकेले नहीं घूमना चाहिए था वरना ऐसी घटनाएं तो होंगी ही. छात्रा ने बताया कि घटना के वक्त शाम के साढ़े छ: ही बजे थे. छात्रा घटना पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड के कर्मचारियों के कोई एक्शन न लेने के बाद प्रॉक्टर से भी शिकायत करने पहुंची पर वहां भी उसे कोई मदद नहीं मिली. बाद में जब उसकी साथी छात्राओं को इसके बारे में पता चला तो उनका गुस्सा फूट पड़ा. रात में लड़कियां बीएचयू मेन गेट (सिंहद्वार) पहुंची और धरना और प्रदर्शन शुरू कर दिया.

पिछले तीन दिन से लड़कियां लगातार धरने पर बैठी हैं. लड़कियों का कहना है कि पहले भी ऐसी घटनाएं होती रही हैं और ऐसे में वीसी पूरे छात्र समूह से मिलने के बजाए कुछ स्टूडेंट्स से मिलते हैं और ऐसे में उनकी जो मांगें होती हैं उन पर उस वक्त सिग्नेचर कर देते हैं मगर बाद में अपनी बात से मुकर जाते हैं. कार्रवाही शायद ही कभी होती है. ऐसे में धरने पर बैठी छात्राओं की मांग है कि वीसी वहां पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनें और समाधान करें.

छात्राओं ने चीफ प्रॉक्टर ओमकारनाथ सिंह के इस्तीफे की मांग भी की है. एक छात्रा ने विरोध में अपना सिर भी मुंडवा लिया है. इस छात्रा का कहना है शायद ऐसा कर लेने पर उसके साथ छेड़छाड़ नहीं होगी. छात्राओं ने एक मांगों का एक वृहत चार्टर भी जारी किया है, जिसमें विश्वविद्यालय के अंदर लैंगिक समानता स्थापित करने के कार्यक्रमों पर खासा जोर दिया गया है.

demands of bhu girls

लड़कियों का कहना है कि अक्सर ऐसी घटनाएं होने पर जब वे शिकायत करती हैं तो उल्टा उन्हें ही डांट लगाई जाती है कि तुम वहां गई ही क्यों? कई बार तो उनके हॉस्टल की वार्डन अपने साथ हुई ऐसी घटनाओँ का जिक्र करते हुए उन्हें शांत रहने की नसीहत भी देती हैं. लड़कियां बताती हैं कि अंतरराष्ट्रीय छात्राएं भी अक्सर ऐसे शोहदों की छेड़खानी की शिकार होती हैं.

बीएचयू के अंदर ही स्थित नवीन महिला छात्रावास की छात्राओं ने चीफ प्रॉक्टर के नाम लिखे अपने पत्र में कहा था कि बीएचयू के रास्ते छात्राओं के लिए बिल्कुल सुरक्षित नहीं हैं, वहां अक्सर अभद्रता और बदतमीज़ी की घटनाएं होती हैं. छात्राओं ने इस पत्र में कहा है कि लड़के उनके हॉस्टल के सामने आकर अपशब्द बोलते हैं, कभी पत्थर फेंकते हैं और कभी-कभी तो मास्टरबेट करते हैं, जो बेहद शर्मनाक है.

लड़कियों द्वारा भेजा गया पत्र

लड़कियों द्वारा भेजा गया पत्र

क्या कहना है प्रॉक्टर का

एक वेबसाइट से बातचीत के दौरान चीफ प्रॉक्टर ओमकारनाथ सिंह बचते हुए नज़र आए. उनका कहना था लगातार ऐसे मामले नहीं आते. एक मामला आया है और कार्रवाई की जा रही है.’ उन्होंने ये भी कहा कि चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे की ज़रूरत पड़ेगी तो ज़रूर देंगे. अभी ऐसी कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि हमारा मामले में कोई डायरेक्ट इन्वॉल्वमेंट नहीं है.

बताते चलें कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी में लड़कियों से होने वाली छेड़छाड़ से निपटने के लिए सख्त रुख अख्तियार करने की बात की है. योगी ने मुख्यमंत्री बनते ही एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया था. साथ ही जब बीएचयू में जब ये सारा घटनाक्रम चल रहा था उस वक्त प्रधानमंत्री अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में ही मौजूद थे. इस प्रदर्शन और धरने के चलते उनके दौरे के मार्ग में भी परिवर्तन किया गया.

ये भी पढ़ें: बीएचयू: 'दादागिरी' का नया गढ़ तो नहीं बन रहा...

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