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बीएचयू घोटाला-3: ये कोर्स बनाते हैं BHU को अराजक तत्वों का स्वर्ग

छात्र आरोप लगाते हैं कि अराजक तत्वों को प्रशासन का पूरा साथ भी रहता है क्योंकि हाल ही में कुछ छात्र, जिनको रेस्टिकेट कर दिया गया था, बाद में न सिर्फ उनका निष्कासन वापस हुआ बल्कि स्पेशल एग्जाम करवाए गए

Avinash Dwivedi Updated On: Sep 30, 2017 10:21 AM IST

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बीएचयू घोटाला-3: ये कोर्स बनाते हैं BHU को अराजक तत्वों का स्वर्ग

(इस लेख के पहले और दूसरे भाग में आपने पढ़ा कि किस तरह बीएचयू की नौकरियों में  घोटाला हो रहा है. इस रिपोर्ट के तीसरे हिस्से में  पढ़िए कि आखिर बीएचयू इतना अराजक क्यों होता जा रहा है. लेख का पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. दूसरा भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. )

कई छात्रों से बात करने के दौरान सामने आया कि भाषाओं में डिप्लोमा के कई कोर्स सहित हिंदी विभाग का कोर्स प्रायोजन मूलक पत्रकारिता, मास्टर इन सोशल वर्क, मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र के कोर्स, मालवीय पीस रिसर्च एंड कंफ्लिक्ट मैनेजमेंट के कोर्स, रूरल डेवलपमेंट के कोर्स के साथ ही कई और पीजी डिप्लोमा में भी इन अराजक तत्वों को एडमिशन मिल जाता है. इसके अलावा ये सेल्फ फाइनेंस कोर्स में भी एडमिशन ले लेते हैं.

कुछ छात्र ये आरोप भी लगाते हैं कि MSW का कोर्स यूजीसी की गाइललाइंस के हिसाब से नहीं है. छात्रों ने बताया, बीएचयू के बरकच्छा कैंपस में ऐसे कई प्रोफेशनल कोर्स चल रहे हैं, जिनमें यूजीसी की गाइडलाइंस की अवहेलना होती है. छात्रों का ये भी आरोप है कि कई बार ऐसे छात्रों को भी एडमिशन दे दिया जाता है, जिन्हें लिखना तक सही से नहीं आता. यही नहीं इन छात्रों को अक्सर हॉस्टल भी दे दिया जाता है. मसलन कुछ दिन पहले ही बीएचयू के बिड़ला हॉस्टल में चेकिंग के दौरान 21 कमरों में अवैध रूप से रह रहे लड़के पकड़े गए थे.

छात्र आरोप लगाते हैं कि इन अराजक तत्वों को प्रशासन का पूरा साथ भी रहता है क्योंकि हाल ही में कुछ छात्र, जिनको बर्खास्त कर दिया गया था. बाद में न सिर्फ उनका निष्कासन वापस हुआ बल्कि स्पेशल एग्जाम करवाए गए. जबकि इन पर हॉस्पिटल में तोड़फोड़ और हिंसा के आरोप थे. छात्र इस बात पर भी ध्यान देने को कहते हैं कि निष्कासित 19 छात्रों में से 12 ब्राह्मण थे.

कई रिसर्च स्कॉलर कहते हैं कि बीएचयू में हमने हर कोर्सेस में गड़बड़ियां होती देखी हैं पर स्पेसिफिक होकर इतिहास के रिसर्च स्कॉलर शशिकांत यादव बताते हैं कि जिन कोर्स में ग्रुप डिस्कशन और पर्सनल इंटरव्यू के जरिए एडमिशन होता है. उसमें ऐसे अराजक तत्वों के आने की संभावना सबसे ज्यादा हो जाती है. शशिकांत साथ ही साथ बीएचयू में हॉस्टल देने के मामले में ओबीसी आरक्षण लागू न होने की बात भी उठाते हैं. जिसके लिए कई बार प्रयास करने पर, उन्हें बस प्रशासन की डांट हासिल हुई है.

BHU Lathicharge

महिला वॉर्डन और लड़कियों की मौसियां

छात्राएं बताती हैं कि बीएचयू के महिला हॉस्टल में कई शिक्षिकाएं बरसों से वॉर्डन का पद संभाल रही हैं. छात्रों का आरोप है कि वॉर्डन का पद न छोड़ने के पीछे वहां के मेस का ठेका लेने वालों से कमीशन मिलते रहने का लालच है. साथ ही हॉस्टल के कर्मचारी कई बार उनके घर के पर्सनल काम भी करते हैं, इसलिए वॉर्डन का पद अपने आप में मलाई काटने वाली जगह है, खासकर लड़कियों के हॉस्टल में.

इससे होने वाले लड़कियों के शोषण के मामले में, कुछ लड़कियां त्रिवेणी संकुल के गोमती हॉस्टल में 2016 में हुई एक घटना का जिक्र भी करती हैं. जब हॉस्टल का खाना खाकर दो-तिहाई लड़कियां बीमार पड़ गई थीं. जिसके बाद लड़कियों ने मेस संचालक को बदलने की मांग की थी. लड़कियों के काफी विरोध के बाद हॉस्टल वॉर्डन कल्पना गुप्ता वहां आई थीं, जिन्होंने लड़कियों को धमकाते हुए, शांत कराया और उसी मेस संचालक से आगे भी खाना बनवाने का फरमान सुना गईं.

छात्राओं ने बताया कि बीएचयू के महिला हॉस्टल में सहायिका का एक पद होता है, जो साफ-सफाई का काम भी करती हैं. इन्हें मौसी कहा जाता है. बीएचयू के महिला छात्रावासों में प्रशासन छात्राओं को कितना दबाकर रखना चाहता है, इस बात का अंदाजा, छात्राओं की इस बात से लगाया जा सकता है कि ये मौसियां कई बार छात्राओं पर हाथ भी उठा देती हैं.

सिक्योरिटी गार्ड्स के साथ है बहुत समस्या

बीएचयू के सिक्योरिटी गार्ड्स सेना के रिटायर कर्मचारी होते हैं. लड़कियों के साथ हुए लाठीचार्ज और पिटाई की घटना के बाद बीएचयू के वीसी ने प्राइवेट सिविलियन सिक्योरिटी गार्ड्स को भी भर्ती करने की बात कही है. ये सिक्योरिटी गार्ड्स पुलिसिया वर्दी जैसी ड्रेस पहनते हैं, जिस पर वाराणसी पुलिस बीएचयू को नोटिस भेज चुकी है.

इन गार्ड्स के ऐसी ड्रेस पहनने के पीछे ऑटो के पैसे बचा लेना जैसे छोटे-छोटे कारण होते हैं. पर इनमें भी बहुत असंतोष है, जिनकी वजहें ये हैं-

बीएचयू की सुरक्षा में अभी लगभग 705 गार्ड्स तैनात हैं. कागजों पर इन गार्ड्स की तनख्वाह 10 से 14 हजार बताई जाती है पर गार्ड्स बताते हैं कि उन्हें 8 हजार रुपये ही मिलते हैं. ये जिस सिक्योरिटी एजेंसी से हायर किए हैं, उसने इनकी तनख्वाह में काफी घोटाला कर रखा है. वर्दी वगैरह देने के नाम पर इनकी तनख्वाह काट ली जाती है.

गार्ड्स की नियुक्ति में भी घपला जारी है. इन गार्ड्स से 12 घंटे की ड्यूटी ली जाती है. जबकि एक गार्ड की नौकरी 8 घंटे की होती है. ऐसे में एक दिन में तीन गार्ड की ड्यूटी दो गार्ड्स से करवा ली जाती है. जिससे 1 गार्ड का पैसा बच जाता है. प्रो. एम.पी. अहिरवार कहते हैं कि गार्ड्स का ठेका लेने वाली एजेंसी ऐसे पैसे बचाती है. उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में 7 लाख कमीशन प्रशासन को दिया गया है.

छात्रों का कहना है कि प्रॉक्टोरियल बोर्ड में महिलाएं हैं पर महिलाएं बेहद सामंतवादी मिजाज की हैं. लड़कियां भी उनपर पितृसत्ता की पोषक होने का आरोप लगाती हैं. हालांकि ऐसे में जब नवनियुक्त प्रॉक्टर चीफ डॉ. रोयना सिंह ने जब कपड़ों और शराब पर कोई रोक न होने को लेकर सकारात्मक बयान दिया तो एक आशा की किरण जगी है.

demands of bhu girls (2)

अभी भी बीएचयू पूरी तरह से तबाह नहीं है

इतनी सारी गड़बड़ियों के बाद भी रिसर्च स्कॉलर बीएचयू को पूरी तरह से पढ़ाई के लिए अनुपयुक्त नहीं बताते. उनके हिसाब से सारी गड़बड़ियों के बावजूद भी पढ़ाने वाले अच्छे शिक्षकों और पढ़ना चाहने वाले जागरुक छात्रों की कमी बीएचयू में नहीं है. सबसे अच्छी बात ये है कि ये रिसर्च स्कॉलर बस समस्या बताने तक ही सीमित नहीं रहते. ये समस्या को हल करने के लिए सुझाव भी देते हैं. राहें भी बताते हैं ताकि ये बेहतरीन संस्थान पूरी तरह से इन समस्याओं की भेंट न चढ़ जाए. उनके दिए कुछ सुझाव इस तरह से हैं-

नियुक्तियों में होना चाहिए सुधार

राजनीति विज्ञान विभाग के एक रिसर्च स्कॉलर सुझाते हैं कि सारी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज की B,C और D ग्रेड के कर्मचारियों की नियुक्तियां किसी केंद्रीय बोर्ड या थर्ड पार्टी के जरिए होनी चाहिए. ऐसे में अपने लोगों को सिस्टम में घुसाने की प्रयासों में कमी आएगी और भाई-भतीजावाद कमजोर पड़ेगा.

गार्ड्स की नियुक्तियों में भी ये सुझाव लागू हों

गार्ड्स की नियुक्तियों में सुधार 1/3 महिला गार्ड्स की नियुक्तियां होनी चाहिए. और जब बीएचयू में शांत, अहिंसक विरोध के बीच हिंसा भड़कने की वजह एक वीसी के गार्ड का लड़की के मुंह पर मारा गया डंडा रहा हो तो ऐसे में उनकी संवेदनशीलता बढ़ाने के प्रयास भी होने चाहिए. छात्र कहते हैं, पूरा फेल्योर सिस्टम का है. तभी पुलिस और पीएसी आती है, जब बीएचयू प्रशासन उसे बुलाता है. ऐसे में अगर प्रॉक्टोरियल बोर्ड समर्थ होगा तो कई बार शांतिपूर्वक मामलों को निपटाया जा सकेगा. ऐसे में गार्ड्स को पूरी तनख्वाह और आठ घंटे की नौकरी पर ही नियुक्त किया जाए ताकि वो फ्रस्टेटेड न रहें.

लैंगिक समानता के लिए कोर्स और वर्कशॉप शुरू की जाएं

छात्र-छात्राओं की मांग है कि यूनिवर्सिटी में एक्टिविटीज कराई जाएं, जिसमें लड़के-लड़कियों और सभी जातीय वर्गों के छात्रों का बराबर का पार्टिसिपेशन हो. लड़कियों पर शाम 7 बजे की जेलखाने वाली बंदिश पर रोक लगे. कई बार इन महिला छात्रावासों की वॉर्डन का व्यवहार जेलर जैसा होता है. उसमें उनके लिए नियम बनाकर और लगातार वॉर्डन में बदलाव कर सुधार लाए जाएं. साथ ही विश्वविद्यालय को दिल से चाहने वाले लोग महामना का नाम लेकर अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने वालों से सावधान रहें.

अंतत: छात्रों की कही एक बात दिमाग में रह जाती है, "इतनी निराशा के बाद भी जब तक दिल से पढ़ाने वाले चार प्रोफेसर भी बचे हैं, वो छात्रों को लगातार तार्किक रहना, मूल्यों पर अडिग रहना और सच्चाई से आगे बढ़ना सिखाते रहेंगे. फिर हम छात्र जिन्होंने ऐसे शिक्षकों से ये बातें सीख ली हैं, इस विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा कम नहीं होने देंगे. यही वजह है कि हमने ये सारी कमियां आपको बताईं ताकि इनमें सुधार की कोई दिशा बने."

(इस लेख से जुड़े तमाम कागजातों और आरटीआई के जवाबों तक पहुंचने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://bhufiles.blogspot.in/)

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

इस लेख के पिछले दो भागः

बीएचयू घोटाला (पार्ट-1): पीढ़ियों से चल रहा है नियुक्तियों में हेरफेर

बीएचयू घोटाला (पार्ट-2): नियुक्तियों में ठाकुरों-ब्राह्मणों के पीछे बर्बाद यूनिवर्सिटी

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