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भोपाल त्रासदी: 33 साल बाद भी उचित इलाज, मुआवजे का है इंतजार

सरकार द्वारा और अधिक मुआवजा देने की मांग को लेकर दाखिल की गई क्यूरेटिव पिटिशन की सुनवाई शुरू करने की अपील करते हुए प्रभावितों द्वारा एक याचिका पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं. इसे सुप्रीम कोर्ट को भेजा जाएगा

Updated On: Dec 03, 2017 05:05 PM IST

Bhasha

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भोपाल त्रासदी: 33 साल बाद भी उचित इलाज, मुआवजे का है इंतजार

भोपाल गैस कांड के 33 साल बीत जाने के बाद भी इससे प्रभावित लोग उचित इलाज और पर्याप्त मुआवजे की लड़ाई लड़ रहे हैं.

सरकार द्वारा दिसंबर 2010 में और अधिक मुआवजा देने की मांग को लेकर दाखिल की गई सुधारात्मक याचिका (क्यूरेटिव पिटिशन) की सुनवाई शुरू करने की अपील करते हुए गैस त्रासदी के प्रभावितों द्वारा अब एक याचिका पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं. इसे सुप्रीम कोर्ट को भेजा जाएगा.

राज्य सरकार के मंत्री ने बताया कि भोपाल स्थित इस कारखाने में 1984 में जहरीली गैस का रिसाव हुआ था. जिस अमेरिका कंपनी ने ये प्लांट लगाया था उसने अब तक प्रभावितों को उचित मुआवजा नहीं दिया है.

भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग के मंत्री विश्वास सारंग ने रविवार को कहा, ‘विश्व की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी के प्रभावितों को अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड कारपोरेशन यूसीसी (अब डॉव केमिकल) ने अब तक उचित मुआवजा नहीं दिया है.’

उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन केंद्र और प्रदेश की दोनों कांग्रेस सरकारों ने उस वक्त के यूसीसी के चेयरमैन वारेन एंडरसन की मदद की थी. एंडरसन त्रासदी के तुरंत बाद भोपाल आया था और बाद में सरकार की मदद से यहां से भागकर अमेरिका चला गया.

उन्होंने बताया कि याचिका में पीड़ितों के कल्याण के लिए यूसीसी से 1 हजार करोड़ रुपए से अधिक की मांग की गई है.

गैस पीड़ितों के हितों के लिए पिछले तीन दशकों से काम करने वाले भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार ने कहा कि यूसीसी ने भोपाल गैस पीड़ितों को मुआवजे के तौर पर 470 मिलियन अमेरिकी डॉलर (715 करोड़ रुपए) दिए थे.

जब्बार ने कहा, ‘हमने इस थोड़े से मुआवजे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और कहा कि पीड़ितों की संख्या ‘बहुत अधिक’ है. यूनियन कार्बाइड द्वारा 1989 में दिया गया मुआवजा ‘बेहद कम’ है’. उन्होंने बताया कि भोपाल में दावा अदालतों ने वर्ष 1990 से 2005 तक कार्य किया. इन अदालतों के द्वारा त्रासदी के 15,274 मृतकों के परिजन और 5.74 लाख प्रभावितों को 715 करोड़ रुपए मुआवजे के तौर पर दिए गए.

2 और 3 दिसंबर 1984 की आधी रात को यूनियन कार्बाइड के भोपाल स्थित कारखाने से रिसी जहरीली गैस (मिथाइल आइसोसाइनाइट) से 3 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. इससे लगभग 1 लाख से ज्यादा लोग भी प्रभावित हुए थे.

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