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भोपाल गैस त्रासदी: जानिए 2 दिसंबर की रात कैसे गैस लीक हुई और नस्लें तबाह हो गईं

जानिए उस रात को हुए गैस के रिसाव से लेकर हजारों लोगों की मौत तक का पूरा घटनाक्रम

Updated On: Dec 02, 2018 04:10 PM IST

FP Staff

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भोपाल गैस त्रासदी: जानिए 2 दिसंबर की रात कैसे गैस लीक हुई और नस्लें तबाह हो गईं

दुनिया के औद्योगिक इतिहास की सबसे बड़ी दुर्घटना के नाम से बदनाम भोपाल गैस त्रासदी को 34 साल हो गए हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश की राजधानी में स्थित यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री में हुए गैस रिसाव के कुछ ही घंटों के भीतर पांच हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे. वहीं गैर सरकारी आंकड़े तो दावा करते हैं कि मरने वालों की संख्या सरकारी आंकड़ों से तीन गुना ज्यादा थी.

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री से करीब 40 टन गैस का रिसाव हुआ था. जानिए उस रात को हुए गैस के रिसाव से लेकर हजारों लोगों की मौत तक का पूरा घटनाक्रम.

2 दिसंबर रात 8 बजे: यूनियन कार्बाइड कारखाने की रात की शिफ्ट दो दिसंबर 1984 की रात आठ बजे पहुंच गई थी और सुपरवाइजर समेत सभी मजदूर अपने-अपने काम में लग गए थे.

2 दिसंबर रात 9 बजे: रात के करीब 9 बजे सफाई कर्मचारी सफाई करने के लिए निकलते हैं. कुछ लोग भूमिगत टैंक के पास पाइपलाइन की सफाई करने के लिए जाते हैं.

2 दिसंबर रात 10 बजे: सफाई के बाद रात 10 बजे फैक्ट्री के टैंक नंबर 610 में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस में पानी भर गया. जिससे रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू हो गई. इसी दरमियान टैंक का तापमान 200 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और टैंक में गैस बनने लगी.

2 दिसंबर रात साढ़े 10 बजे: रासायनिक प्रतिक्रिया से बने दबाव को टैंक सह नहीं पाया और गैस का रिसाव होने लगा. सफाई के दौरान वाल्व ठीक से बंद नहीं हो सका था. जिसके चलते टॉवर से गैस का रिसाव शुरू हुआ.

3 दिसंबर रात 12 बज कर 15 मिनट: टैंक में मौजूद कर्मचारियों को रात करीब 12 बज कर 15 मिनट पर घबराहट महसूस होने लगी. कर्मचारियों ने वॉल्व बंद करने की कोशिश की तभी खतरे का सायरन बज गया. कई रिपोर्ट्स के मुताबिक सायरन रिसाव के काफी देर बाद बजा. जिसके कारण लोग समय रहते सतर्क नहीं हो सके थे.

3 दिसंबर रात 12 बज कर 50 मिनट: रात 12 बज कर 50 मिनट पर आस-पास की बस्तियों में रहने वाले लोगों को भी घुटन महसूस होने लगी. लोगों को खांसी, आंखों में जलन, पेट फूलने और उल्टी की शिकायत होने लगी थी.

3 दिसंबर रात 1 बजे: 2 और 3 दिसंबर की रात करीब 1 बजे पुलिस सतर्क हो पाती कि इलाके में भगदड़ मच गई. इसी दरमियान कारखाने के संचालक ने किसी भी प्रकार के रिसाव का खंडन किया.

3 दिसंबर रात 2 बजे: तीन दिसंबर तड़के 2 बजे अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. लोग तबीयत बिगड़ने के कारण घरों से बाहर की तरफ भाग रहे थे.

3 दिसंबर रात 2  बजे: रात सवा दो बजे तक पूरे शहर में जहरीली गैस फैल चुकी थी.

3 दिसंबर तड़के 4 बजे: तीन दिसंबर तड़के चार बजे तक गैस रिसाव पर काबू पा लिया गया था. लेकिन तब तक लाखों लोग इस जहरीली गैस के मरीज बन चुके थे तो हजारों दम तोड़ चुके थे.

3 दिसंबर सुबह 6 बजे: पुलिस की गाड़ियां लाउडस्पीकर पर गैस के रिसाव की चेतावनी दे रही थीं. वहीं हजारों गैस पीड़ित लोग सड़कों पर दम तोड़ रहे थे तो कुछ लोग बदहवास होकर इधर-उधर भाग रहे थे.

सुबह होने तक गैस के रिसाव पर तो काबू पा लिया गया. लेकिन रात भर में गैस इतना नुकसान कर चुकी थी कि हजारों लोग मौत के शिकार हो गए थे. गैस के रिसाव पर तो कुछ घंटों में ही काबू पा लिया गया लेकिन इसका असर आज भी उस इलाके में पैदा होने वाली पीढ़ी पर देखा जा सकता है.

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