S M L

भोपाल गैंगरेप मामले में विशेष अदालत का फैसला, चारों दोषियों को उम्रकैद

फैसले में सभी दोषियों को उनकी प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, इसके साथ उन पर अलग-अलग जुर्माना भी लगाया गया है

FP Staff Updated On: Dec 23, 2017 03:50 PM IST

0
भोपाल गैंगरेप मामले में विशेष अदालत का फैसला, चारों दोषियों को उम्रकैद

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में यूपीएससी की तैयारी कर रही छात्रा से हुए गैंगरेप मामले में विशेष अदालत बेहद कम समय में अपना फैसला सुनाया है. अदालत ने चारों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.

विशेष अपर सत्र न्यायाधीश सविता दुबे ने फैसला सुनाते हुए चारों आरोपियों को दोषी माना. फैसले में सभी दोषियों को उनकी प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ उन पर अलग-अलग जुर्माना भी लगाया गया है.

इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से मंगलवार को अंतिम बहस पेश की गई थी. विशेष अपर सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के पश्चात फैसला सुरक्षित रख लिया था.

इस मामले की सुनवाई 36 दिनों तक चली. इस दौरान 28 गवाहों के बयान दर्ज हुए. 15 नवंबर को 200 पेज का चालान कोर्ट में पेश किया गया, जिसमें 60 दस्तावेजों को भी शामिल किया गया था.

लड़की को मृत जान छोड़ गए रेपिस्ट

कोचिंग सेंटर से लौट रही 19 साल की लड़की को चार बदमाशों ने हबीबगंज स्टेशन के पास रोका और फिर झाड़ियों में ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया. आरोपियों ने पीड़िता का मोबाइल फोन और कुछ ज्वैलरी भी लूट ली थी.

आरोपियों को लगा कि लड़की की मौत हो गई, तो वो उसे छोड़कर भाग गए. होश आने पर विक्टिम आरपीएफ थाने पहुंची. वहां से उसने पिता को घटना के बारे में जानकारी दी. उसके पिता आरपीएफ में ही कार्यरत हैं.

क्या है पूरा मामला

-31 अक्टूबर को 4 आरोपियों ने यूपीएससी की तैयारी कर रही छात्रा के साथ हबीबगंज रेलवे ट्रेक के पास पुलिया के नीचे गैंगरेप किया. -हबीबगंज GRP थाना पुलिस ने घटना के 24 घंटे बाद FIR दर्ज की थी. -आरोपी रमेश उर्फ राजू मेहरा, गोलू उर्फ बिहारी, अमर उर्फ गुल्टू और राजेश उर्फ चेतराम के खिलाफ IPC की धारा 376 डी, 394 एवं 34 सहित अन्य धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई. -FIR में देरी के मामले में SP रेल, एमपी नगर CSP, 3 TI, 2 SI पर गाज गिरी. -मामले की जांच का जिम्मा SIT को दिया गया. -हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए मामले में सरकार को फटकार लगाते हुए केस की सुनवाई हर रोज फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने के आदेश दिए. -हाईकोर्ट ने इसे ‘ट्रैजिडी ऑफ एरर्स’ (Tragedy of Errors) बताया था. - SIT ने 15 दिन में फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले की चार्जशीट पेश की. -अभियोजन पक्ष ने मामले में पीडि़ता एवं उसके परिजनों सहित करीब 26 गवाहों के बयान दर्ज कराए. -बचाव पक्ष अपनी ओर से कोई भी गवाह अदालत में पेश नहीं कर सका. -मंगलवार को बचाव पक्ष ने अंतिम बहस की थी. -विशेष अपर सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के पश्चात फैसला सुरक्षित रख लिया था.

क्या है चार्जशीट में

- चार्जशीट में सबूत के तौर पर आरोपियों की डीएनए रिपोर्ट, विक्टिम के बयान, धूल में सने कपड़े, फॉरेंसिक रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य सबूतों को शामिल किया गया. - आरोपियों के कपड़ों में लगी मिट्टी और वारदात वाली जगह की मिट्टी के सैंपल मैच हुए. -डीएनए रिपोर्ट में चारों आरोपियों के गैंगरेप में शामिल होने की पुष्टि हुई. -उनके कब्जे से लड़की का मोबाइल, कान की बालियां और घड़ी जब्त की गई. -गैंगरेप केस में आरोपी रमेश उर्फ राजू मेहरा, गोलू उर्फ बिहारी, अमर उर्फ गुल्टू और राजेश उर्फ चेतराम हैं. -चारों आरोपी ज्यूडीशियल कस्टडी में हैं. - उनके खिलाफ गैंगरेप, अपहरण, जान से मारने की कोशिश और सबूत मिटाने की धाराओं में केस दर्ज हुआ था.

(इनपुटः न्यूज-18)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi