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भीमा-कोरेगांव हिंसाः महाराष्ट्र बंद ने लगाया 700 करोड़ का चूना

भीमा-कोरेगांव हिंसा के बाद बुधवार को महाराष्ट्र बंद से कारोबार को गहरा धक्का, परिवहन ठप रहने से घाटा और भी बढ़ा

FP Staff Updated On: Jan 04, 2018 12:48 PM IST

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भीमा-कोरेगांव हिंसाः महाराष्ट्र बंद ने लगाया 700 करोड़ का चूना

भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा के बाद विरोध प्रदर्शन थम गया है. लेकिन थमने से पहले इस घटना ने महाराष्ट्र को सामाजिक-आर्थिक स्तर पर काफी नुकसान पहुंचाया. फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन का एक आंकड़ा बताता है कि बुधवार को बुलाए गए महाराष्ट्र बंद से 700 करोड़ का चूना लगा है. इस प्रदेशव्यापी बंद का आह्वान दलित नेता प्रकाश आंबेडकर ने किया था. महाराष्ट्र के बहुजनों ने बंद में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया.

महाराष्ट्र बंद दरअसल पुणे में भड़की हिंसा के मद्देनजर बुलाया गया. हिंसा भड़काने के पीछे कथित तौर पर हिंदूवादी संगठनों का हाथ माना जा रहा है जो भीमा-कोरेगांव जंग की 200वीं बरसी पर एकजुट हुए थे. हालांकि मामला अब शांत हो गया है. फिर भी चप्पे-चप्पे पर पुलिस की निगहबानी पैनी बनी हुई है.

लड़ाई-झगड़े को देखते हुए ज्यादातर मुंबईकरों ने घरों में ही रुकना मुनासिब समझा. थाणे, कलवा, मुलंद, चेंबूर और घाटकोपर के रामाबाई कॉलोनी में पुलिस की सबसे ज्यादा गश्त देखी गई. शांति व्यवस्था कायम करने के लिए पुलिस ने तकरीबन 150 लोगों को हिरासत में लिया. बात अगर पुणे की करें तो यहां विरोध-प्रदर्शन तेज तो थे, पर उग्र नहीं. 'जय भीम' के नारों के साथ लोग अपना विरोध दर्ज कराते दिखे. औरंगाबाद में बवालियों को काबू करने के लिए पुलिस ने गहन तलाशी अभियान चलाया, फिलहाल मामला यहां भी शांत है.

हिंसा बाद बयानबाजी तेज

हिंसा के बाद नेताओं के अलग-अलग बयान भी मुखर हो रहे हैं. लखनऊ में बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा, भाजपा-आरएसएस नहीं चाहते कि दलित अपनी पहचान बनाएं.

उधर, एनसीपी के सचिव प्रमोद गायकवाड ने कहा, भीमा-कोरेगांव की घटना ने बाबा साहेब के समर्थकों को अंदर तक झकझोर दिया. हिंसा रोकी जा सकती थी, लेकिन इसे बढ़ने दिया गया जिसके लिए मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं.

भीमा-कोरेगांव मामले में जिग्नेश मेवाणी पर उनके विवादित भाषण को लेकर केस दर्ज होने पर केंद्रीय मंत्री और आरपीआई नेता रामदास आठवले ने कहा, अगर मेवाणी ने भड़काऊ भाषण दिया तो पुलिस को जरूर कार्रवाई करनी चाहिए थी, इस घटना से उनका कोई लेना-देना नहीं है.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, महाराष्ट्र में शांति व्यवस्था भंग करने वाली किसी भी ताकत को हम कामयाब नहीं होने देंगे. हम (मुंबईकर) हमेशा से सांप्रदायिक और जातिगत ताकतों के खिलाफ रहे हैं. लेकिन बाहरी लोग माहौल खराब कर रहे हैं, ये लोग अमन-चैन बिगाड़ना चाहते हैं. हमें भरोसा है लोग इनके झांसे में नहीं आएंगे.

बस निगम को 1.50 करोड़ का घाटा

लोगों को सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर रही कि बंद बुलाया तो इसकी जानकारी एक दिन पहले देनी चाहिए थी. बसें डिपो से निकलीं भी तो दोपहर आते-आते उनका ब्रेकडाउन हो गया. विरोधियों ने कई बसों का जक्का जाम किया तो कईयों के टायर पंचर कर दिए. पुणे के एक सार्वजनिक परिवहन अधिकारी (पीएमपीएमएल) ने कहा, बसों को हुई क्षति और बंद के कारण परिवहन निगम को 1.5 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है. बसें दोबारा 6.30 बजे के बाद ही सुचारू हो पाईं.

बुधवार को बुलाए गए बंद पर 'रास्ता रोको' अभियान के तहत दलित कार्यकर्ताओं ने आरे चेक नाका के पास वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर ट्रैफिक रोक दिया. इतना नहीं, विरोधियों ने मलाड. गोरेगांव, अंधेरी, दादर, दहिसर, वासी और विरार में रेल ट्रैक को जाम कर दिया जिससे ट्रेनों के आवागमन पर खासा असर देखा गया. हाल में शुरू हुई एसी लोकल ट्रेन भी ठप हो गई. सेंट्रल लाइन पर 110 ट्रेनों को रद्द किया गया.

पर्यटन को गहरा धक्का

अजंता और एलुरा की गुफाओं में लगभग 4,500 से 5,000 टूरिस्ट रोज पधारते हैं. आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के बाबासाहेब दानवे की मानें तो बंद के कारण टूरिस्ट की संख्या 550 तक सिमट गई जिनमें विदेशी सैलानी मात्र 75 थे. औरंगाबाद में ताजमहल रेप्लिका देखने वालों की संख्या में 20 फीसद तक गिरावट देखी गई. अस्पतालों तक में मरीजों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

(101 रिपोर्टर्स.कॉम के रिपोर्टर्स के इनपुट पर आधारित )

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