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जानिए उस शख्स के बारे में, जिसकी FIR पर 5 सोशल एक्टिविस्ट के पीछे पड़ी है महाराष्ट्र पुलिस

दामगुडे वही आदमी है जिसकी एफआईआर पर पुणे पुलिस ने बड़ी कर्मठता से कार्यवाही की है और मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाले वकीलों और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है

Updated On: Aug 30, 2018 10:52 AM IST

Parth MN

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जानिए उस शख्स के बारे में, जिसकी FIR पर 5 सोशल एक्टिविस्ट के पीछे पड़ी है महाराष्ट्र पुलिस
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जिस शख्स की एफआईआर पर पुणे पुलिस कार्रवाई कर रही है, वह भिड़े और एकबोटे की शख्सियत से मंत्रमुग्ध है. दस जुलाई को फेसबुक पर तुषार दामगुडे ने उन संभाजी भिडे गुरु जी के साथ अपनी फोटो लगाई, जिन्हें भीमा-कोरेगांव दंगों का आरोपी माना जा रहा है, और लिखा, 'आज हमारी भिड़े गुरू जी से कई विषयों पर चर्चा हुई, जैसे संविधान, मनुस्मृति और हिंदुत्व. मैंने गुरु जी से कहा, ‘हम सब शिवाजी और संभाजी महाराज को मानने वाले लोग हैं, लेकिन अगर हम आपसे कुछ बिंदुओं पर असहमत हैं, तो हम आपको बता देंगे.’ गुरुजी भी ये समझते हैं और उनको भी इस बात से कोई समस्या नहीं है.'

पुणे पुलिस, जिसने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है और मंगलवार को देश भर में छापे मारे हैं, दरअसल दामगुडे की ही 8 जनवरी को लिखाई गई एफआईआर पर कार्रवाई कर रही है. गिरफ्तार हुए लोग हैं, सुधा भारद्वाज,वरवरा राव, वर्नन गॉन्ज़ल्स और अरुण फरेरा.

पुणे के संयुक्त पुलिस कमिश्नर शिवाजी बोडाखे ने इन गिरफ्तारियों की पुष्टि करते हुए कहा, 'हम दामगुडे की उस शिकायत पर कार्रवाई कर रहे हैं, जो उसने विश्रामबाग पुलिस स्टेशन में लिखाई है. दरअसल माओवादी, शहरों में किसी संस्था के नाम से काम करते हैं और ग्रामीण इलाकों में अपने उग्रवादी संगठनों के ज़रिए काम करते हैं. जिन लोगों को हमने गिरफ्तार किया है, वे शहरों में स्थित संस्थाओं को आर्थिक तौर पर और काम-काज के तरीकों में मदद करते थे.'

फेसबुक पर वामपंथियों को लताड़ना है दामगुडे का प्रिय काम

दामगुडे, भिड़े की शख्सियत से तो मोहित है ही, फेसबुक पर वामपंथियों को लताड़ना भी उनका प्रिय शगल है, जहां मराठी में उसके लिखे को उसके 1,35,00 समर्थक रोज पढ़ते हैं. मंगलवार की गिरफ्तारियों के बाद उसने लिखा, 'वरवरा इतनी बड़ी शख्सियत हैं, कि उन्हें आप माओवादियों का प्रधानमंत्री कह सकते हैं.' बाद में रात में कुछ मराठी चैनलों पर दामगुडे ने बहस में हिस्सा भी लिया. इनमें से एक डिबेट का लिंक भेजते हुए उसने लिखा, 'बहस में गुस्से में आए बी जी ‘कोलसे’ पाटिल के आतंकी चेहरे की कलई खुल गई है.'

दामगुडे ने हाईकोर्ट के पूर्व जज को ‘कोलसा’ कहा. आपको बता दें कि मराठी में कोलसा का मतलब कोयला होता है. दामगुडे फेसबुक पर लगातार बने हुए हैं. 9 मई को उन्होने लिखा, 'बाला, अगर मैं तुम्हें नक्सली कह कर बुलाऊं तो तुम्हारे चमचे आगबबूला हो जाएंगे. बाला से मेरा मतलब है बाला ठाकुर.' आपको बता दें कि प्रकाश अंबेडकर को उनके समर्थक ‘बालासाहेब’ कह कर बुलाते हैं. यानी दामगुडे का हमला प्रकाश अंबेडकर पर था.

इससे पहले जून के महीने मे भी पुणे पुलिस ने 5 लोगों को पकड़ा था, जिनमें रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, सुधीर धावले, महेश राउत और शोमा सेन के नाम थे. आरएसएस के करीबी माने जाने वाले दामगुडे ने उन गिरफ्तारियों के बाद 6 जून को फेसबुक पर व्यंग्यात्मक लहज़े में एक पोस्ट डाली, 'महाराष्ट्र में आज दुख की लहर व्याप्त है, क्योंकि सुधीर मामा गिरफ्तार हो गया है, मैं तुम्हें बहुत मिस करुंगा मामा.'

इससे एक महीने पहले 4 मई को धावले के लिए दामगुडे ने फेसबुक पर लिखा, 'आप सिर्फ आरोप लगाते रहते हैं, श्रीधर श्रीनिवासन जैसे नक्सली को महिमामंडित करते रहते हैं, आप जिस भाषा का इस्तेमाल करते हैं, वो हिंसक होती है, आप इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं, राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को बदनाम करने के लिए बुकलेट बांटते हैं और फिर जब आपके ऊपर छापा पड़ता है, तो कहते हैं कि हमारे साथ अन्याय हो रहा है. बंद करिए अपना पाखंड.'

प्रधानमंत्री की हत्या के षडयंत्र के बारे में दामगुडे कहते हैं, 'प्रधानमंत्री की हत्या के लिए 8 करोड़ रुपए दिए गए जिससे एम-4 गन खरीदी जा सके, साथ ही 4 लाख राउंड गोलियां भी. क्योंकि ये लोग राजीव गांधी हत्याकांड जैसा काम करना चाहते थे. अब 7 दिन की पुलिस कस्टडी में, जबकि कड़ाके की सर्द हवा चल रही है, बूढ़ी हड्डियां बहुत दर्द करेंगी.'

दो महीने बाद 4 जुलाई को दामगुडे ने फेसबुक पर एक चेतावनी डाली. चेतावनी के साथ रिपब्लिक चैनल का एक सुपर एक्सक्लूसिव डिबेट का वीडियो भी था, जिसकी हेडिंग थी, ‘शहरी नक्सल बेनकाब.’ चेतावनी में लिखा था, 'मैं फिर से दोहराता हूं. कुछ लोग सोचते हैं कि वे कुछ भी कहें या करें, सब ठीक हैं. लेकिन सार्वजनिक मंच से आपके द्वारा जाने अनजाने में कहे गए शब्दों का खामियाज़ा देश और समाज भुगतेगा.

भारत में दंगे भड़काने के लिए साज़िशें रची जा रही हैं. कोशिश की जा रही है कि भाईचारे के साथ रह रहे हिंदुस्तानी एकदूसरे का सिर काटने लगें. तुम्हारी जातियां, तुम्हारे गौरव, इतिहास और भ्रांतियां, इन सबका दुरुपयोग किया जाएगा. व्यक्तिगत तौर पर तुम्हारे बीच मतांतर हो सकते हैं, उन्हें बेशक वैसे ही बने रहने दो, लेकिन थोड़ा शांति से सोचो कि तुम्हारी सोच में भिन्नता को कहीं कोई देश तोड़ने के लिए इस्तेमाल तो नहीं कर रहा, कहीं कोई सरकारी ढांचे के खिलाफ विद्रोह तो नहीं भड़का रहा या लोकतंत्र और संविधान के चीथड़े करने पर तो कोई उतारू नहीं है.'

बोको हरम, आईएस से सीपीआईएम की तुलना

27 अप्रैल को दामगुडे ने ऐलान किया कि बोको हरम, आईएस, अलकायदा और हेज़बुल्ला के बाद सीपीआई (माओवादी) सबसे ख़तरनाक आतंकी संगठन है. 'लोगों को पता नहीं है कि वे अनजाने ही सीपीआई के लिए काम कर रहे हैं. ये सिर्फ सरकारी एजेंसियों की ही ज़िम्मेदारी नहीं है कि ऐसे आतंकियों से वो लड़े. अपने संविधान और देश को बचाने के लिए हमें आगे आना होगा और इस दिशा में काम करना होगा. इसका मतलब सोशल मीडिया पर आभासी लड़ाई लड़ना भी हो सकता है या फिर बाहर निकल कर इस दिशा में काम करना भी. जो लोग इस काम में हिस्सा लेना चाहते हों, वे अपना संपर्क नंबर कमेंट में डालें या मुझे व्यक्तिगत तौर पर भेजें.'

इस पोस्ट पर 200 कमेंट्स आए थे, जिनमें ज़्यादातर दामगुडे के समर्थक ही थे. दामगुडे मज़ाकिया लहज़े में भी अपनी बात कहने की कोशिश करते हैं. फिल्म ‘इनफिनिटी वॉर्स’ का पोस्टर शेयर करते हुए दामगुडे लिखते हैं, 'हर कॉमरेड को सड़क पर आ कर मनुवादियों से लड़ाई करनी चाहिए. साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थक जाएगा, मिल कर आग लगाना.' पोस्ट खत्म होने के बाद उसने नीचे अपना नाम लिखा ‘कामरेड तुषार दामगुडे. फासिस्ट थानोस मुर्दाबाद, माओ लेनिन ज़िंदाबाद.’

17 अगस्त को दामगुडे ने बताया कि सन 2032 में उनका लेख क्या होगा. 'कठिन परिश्रम के चलते नरेंद्र मोदी और उनके साथी लौहपुरुष अमित शाह बीजेपी को जड़ों तक ले आए हैं. यही वजह है कि हम चाहते हैं कि कभी कम्युनिस्टों का गढ़ रहे बंगाल में बीजेपी पूरे बहुमत से सरकार बनाए.' राहुल गांधी पर चुटकी लेते हुए दामगुडे ने उन्हें 2032 में शांति के लिए एक युवा और बेबाक नेता बताया.

27 मार्च को दामगुडे ने लिखा, 'कुछ हिंदुत्ववादी मुस्लिम विरोधी हो सकते हैं, लेकिन जो लोग कहते हैं कि हिंदुत्ववादी दलित विरोधी हैं, वे ……. हैं. हिंदुत्व के खिलाफ घृणा में पागल हुए लोगों, एक भी ऐसी हिंदुत्ववादी संस्था बताओ, जो सदस्यता के वक्त जाति पूछता हो, बताओ और मुझसे इनाम में एक लाख रुपए लो.'

मुसलमानों के बारे में बोलते हुए दामगुडे ने एक ऊर्दू पोस्टर फेसबुक पर डाला, जिसमें शिवाजी, शाहू महाराज, बाबासाहेब अंबेडकर और सर सय्यद की तस्वीरें थीं. दामगुडे ने लिखा, कि यहां सर सैय्यद अहमद का फोटो लगाना बहुत बड़ा पाप है और क्षमा योग्य नहीं है. उन्होंने आगे लिखा, 'आखिर हम जा किधर रहे हैं.'

अपनी एक पोस्ट मे वे कोबाड गांधी को बदनाम माओवादी लिखते हैं और दूसरी पोस्ट में मिलिंद एकबोटे की ज़मानत पर जश्न मनाते दिखते हैं. आपको बता दें कि पुणे की पुलिस के मुताबिक एकबोटे पर ही आरोप था कि उन्होंने कोरेगांव का दंगा भड़काया है. 19 अप्रैल को दामगुडे लिखते हैं, 'मिलिंद एकबोटे पिछले 20 साल से कोरेगांव जाते रहे हैं. संभा जी महाराज का स्मारक उन्हीं के चलते गर्व से वहां आज भी खड़ा हुआ है. इस साल एक चिट्ठी में अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने लोगों में वह चिट्ठी बांट दी और वहां से चले गए. आप खुद वह चिट्ठी पढ़िए और फैसला कीजिए कि क्या उससे दंगा भड़क सकता है. पुणे की ग्रामीण पुलिस का रुख दूसरा था.

महिलाओं से भी द्वेष

दामगुडे जब फेसबुक पर सामाजिक-राजनैतिक पोस्ट से ब्रेक लेते हैं, तो उन्हें महिलाओं के प्रति द्वेष रखने वाले के रूप में देखा जा सकता है. एक ऐसे ही प्रहसन में उन्होंने सनी लियोनी और मिया खलीफा के बीच बातचीत दिखाई है. ये कुछ इस तरह शुरू होती है:

मिया खलीफा: क्या केले खाने पर तुम्हें कोई दिक्कत होती है ? सनी लियोनी: केले का सामाजिक विज्ञान में बहुत महत्व है. लेकिन आपको जानना होगा कि कब आपको युवाओं के हाथों को तकलीफ देने से रोकना है.

ये बातचीत करीब 1000 शब्दों की है. फिर से आपको बता दें कि दामगुडे वही आदमी है जिसकी एफआईआर पर पुणे पुलिस ने बड़ी कर्मठता से कार्यवाही की है और मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाले वकीलों और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है.

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