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भीमा कोरेगांव गिरफ्तारी: SC ने कहा- पांचों लोग 12 सितंबर तक नजरबंद रहेंगे

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पांच एक्टिविस्ट्स की गिरफ्तारी के मामले पर सुनवाई अगले बुधवार तक टल गई है

Updated On: Sep 06, 2018 01:27 PM IST

FP Staff

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भीमा कोरेगांव गिरफ्तारी: SC ने कहा- पांचों लोग 12 सितंबर तक नजरबंद रहेंगे

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पांच एक्टिविस्ट्स की गिरफ्तारी के मामले पर सुनवाई अगले बुधवार तक टल गई है. पांचों एक्टिविस्ट्स 12 सितंबर तक नजरबंद रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पांचों लोग अगली सुनवाई तक नजरबंद रहेंगे. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी नाराजगी जताई है. प्रेस से बात करने को लेकर असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से माफी मांगी है.

इस साल जनवरी में हुई भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पुणे पुलिस ने देशभर के कई शहरों में छापेमारी कर 5 सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पांचों की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए पुलिस को उन्हें 6 सितंबर तक नजरबंद रखने का आदेश दिया था. इन पांचों सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में इतिहासकार रोमिला थापर और अन्य चार कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका में कार्यकर्ताओं की रिहाई के साथ-साथ मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई थी.

महाराष्ट्र पुलिस ने कई शहरों में एक साथ छापेमारी कर सामाजिक कार्यकर्ता वरवरा राव को हैदराबाद से, फरीदाबाद से सुधा भारद्वाज और दिल्ली से गौतम नवलखा को गिरफ्तार किया था. वहीं ठाणे से अरुण फरेरा और गोवा से बर्नन गोनसालविस को गिरफ्तार किया गया. इस दौरान उनके घर से लैपटॉप, पेन ड्राइव और कई कागजात भी जब्त किए गए. ये सभी फिलहाल नजरबंद हैं.

पहले कोर्ट ने क्या कहा था?

इससे पहले 29 अगस्त को पांचों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, 'विरोध को रोकेंगे तो लोकतंत्र टूट जाएगा.' रोमिला थापर और चार अन्य कार्यकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, 'असहमति हमारे लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल्व है, अगर आप प्रेशर कुकर में सेफ्टी वॉल्व नहीं लगाएंगे, तो वो फट सकता है.

लिहाजा अदालत आरोपियों को अंतरिम राहत देते हुए अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक लगाती है, तब तक सभी आरोपी हाउस अरेस्ट में रहेंगे.' वहीं महाराष्ट्र पुलिस का दावा है कि उसके पास पांचों कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं कि गिरफ्तार आरोपियों के संबंध नक्सली संगठनों से हैं.

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