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गांधी जयंती पर दिल्ली में गूंजेंगी किसानों की चीत्कारें...खेती की मुश्किलें खत्म करने की मांग

भारतीय किसान यूनियन के मुताबिक किसान क्रांति यात्रा में मंगलवार को लाखों लोग शामिल होंगे. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा के और किसान भी सीधे किसान घाट पहुंचेंगे. भाकियू ने दावा किया है कि इस यात्रा में मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड और पूर्वी यूपी के भी किसान शामिल हैं.

Updated On: Oct 01, 2018 09:09 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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गांधी जयंती पर दिल्ली में गूंजेंगी किसानों की चीत्कारें...खेती की मुश्किलें खत्म करने की मांग

2019 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलित हो गए हैं. भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले हजारों किसान अपनी मांगों के साथ 2 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने वाले हैं. किसानों की मांग है कि साल 2014 में मोदी सरकार बनने से पहले बीजेपी अपने घोषणापत्र में जो वायदे किए थे, उन वादों को पूरा करे.

बीते 23 सितंबर को ही उत्तराखंड के हरिद्वार से भारतीय किसान यूनियन ने ‘किसान क्रांति यात्रा’ शुरू की थी. यह किसान क्रांति यात्रा सोमवार को गाजियाबाद पहुंची है और मंगलवार को दिल्ली कूच करने की तैयारी है. हालांकि, दिल्ली में किसानों पर दिल्ली पुलिस ने रोक लगा रखी है.

किसानों के किसान घाट पहुंचने को लेकर केंद्र सरकार भी सतर्क हो गई है. ऐसी खबर मिल रही है कि किसान नेताओं से सोमवार रात ही देश के गृह मंत्री और राजनाथ सिंह बैठक करने वाले हैं. इस आंदोलन की आगुवाई करने वाले किसान नेता राकेश टिकैत ने फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहा है कि सोमवार रात देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ हमारी मीटिंग होने वाली है. इस मीटिंग के बाद ही हमलोग कुछ कहने की स्थिति में होंगे.’

बता दें कि किसान अपनी 9 सूत्री मांगों को लेकर दिल्ली कूच पर अडिग हैं. किसानों की प्रमुख मांगों में स्वामिनाथन कमेटी के फॉर्मूले के आधार पर किसानों की आय सी-2 लागत में कम से कम 50 प्रतिशत जोड़ कर दिया जाए साथ ही सभी फसलों की शत-प्रतिशत खरीद की गारंटी दी जाए. पिछले 10 सालों में आत्महत्या करने वाले लगभग 3 लाख किसानों के परिवार को मुआवजा के साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए. किसानों को सभी प्रकार के कर्ज से पूरी तरह माफ कर दिया जाए. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव किया जाए. इस योजना में किसानों को लाभ मिलने के बजाए बीमा कंपनियों को लाभ मिल रहा है. किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त में उपलब्ध कराई जाए. दिल्ली-एनसीआर में दस साल से ज्यादा पुराने ट्रैक्टरों पर रोक हटा दी जाए. किसान क्रेडिट कार्ड योजना में बिना ब्याज लोन दिया जाए. महिला किसानों के लिए क्रेडिट कार्ड योजना अलग से बनाई जाए. चीनी का न्यूनतम मूल्य 40 रुपए प्रति किलो किया जाए और 7 से 10 दिन के अंदर गन्ना किसानों का भुगतान सुनश्चित किया जाए. आवारा पशुओं से किसानों के फसल को बचाने का इंतजाम किया जाए.

farmers story

किसानों का साफ कहना है कि सरकार उनकी बातों को नहीं सुन रही है. किसान क्रांति यात्रा की अगुवाई करने वाले राकेश टिकैत फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, केंद्र सरकार और राज्य सरकारें भी किसानों को कमजोर और लाचार न समझें. बीजेपी ने किसानों के लिए जो घोषणापत्र जारी किया था उसको आज तक लागू नहीं किया है. केंद्र सरकार की नीतियों के कारण ही देश के लाखों किसान आत्महत्या कर रहे हैं. अगर हमारी 9 जो प्रमुख मांगे हैं वह नहीं मानी गई तो देश में बड़ा किसान आंदोलन होगा जो आजतक नहीं हुआ है.’

भारतीय किसान यूनियन के मुताबिक किसान क्रांति यात्रा में मंगलवार को लाखों लोग शामिल होंगे. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा के और किसान भी सीधे किसान घाट पहुंचेंगे. भाकियू ने दावा किया है कि इस यात्रा में मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड और पूर्वी यूपी के भी किसान शामिल हैं.

बता दें कि इस किसान यात्रा में सभी तबके और उम्र के लोग नजर आ रहे हैं. युवा किसान पैदल चल रहे हैं तो बुजुर्गों और महिलाओं के लिए ट्रैक्टर और ट्रालियों का इंतजाम किया गया है. इस आंदोलन को यूपी के और किसान यूनियनों का भी समर्थन प्राप्त है. किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष चौधरी पुष्पेन्द्र सिंह फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘किसानों की मुख्य मांग यह है कि अपने वायदे अनुसार कृषि लागत मूल्य आयोग द्वारा निर्धारित सम्पूर्ण C-2 लागत का डेढ़ गुना फसलों का दाम दिया जाए. सम्पूर्ण फसल की खरीद सुनिश्चित हो. गन्ने का बकाया भुगतान ब्याज समेत तुरंत किया जाए और बिना शर्त ही तुरंत सारे देश के किसानों का सारा कर्ज माफ किया जाए. इन्हीं मांगों को लेकर किसान सड़कों पर उतर आए हैं और यदि मांगें नहीं मानी जाती हैं तो इसका असर 2019 के आम चुनाव पर भी पड़ेगा.’

बीते कुछ सालों से देशभर में कई किसान आंदोलन हुए हैं. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्य इसके केंद्र में रहे हैं. जानकारों का मानना है कि साल 2019 में जब लोकसभा चुनाव होगा तो पीएम मोदी के सामने किसानों के मुद्दे जरूर रहेंगे. साल 2017 और 2018 दो ऐसे साल रहे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा किसान आंदोलन हुए हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

बीते कुछ सालों में देश के कई किसान संगठन अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे हैं. अभी हाल ही में दिल्ली के लालकिला मैदान में भी अन्ना हजारे के नेतृत्व में किसान आंदोलन हो चुका है. 2 अक्टूबर को ही मध्यप्रदेश के हजारों किसान ग्वालियर से दिल्ली के लिए पैदल मार्च पर निकलने वाले हैं.

भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले एक बार फिर से हजारों किसान सरकार की किसान नीतियों के विरोध में सड़क पर उतर आए हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारतीय किसान यूनियन का आंदोलन का सिलसिला पुराना है. कई बार ऐसा हुआ है जब इस संगठन ने राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकारों को भी झुकने को मजबूर किया है, लेकिन तब भारतीय किसान यूनियन में महेंद्र सिंह टिकैत जैसा किसान नेता था. भारतीय किसान यूनियन की स्थापना महेंद्र सिंह टिकैत ने लगभग 25 साल पहले की थी. महेंद्र सिंह टिकैत के देहांत के बाद उनके बेटे राकेश टिकैत ने इस संगठन कमान संभाल रखी है. भारतीय किसान यूनियन का पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में अच्छा-खासा जनाधार है.

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