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भारत बंद: कर्फ्यू लगाकर बंद को सफल बनाना चाहती है सरकार?

दस अप्रैल के बंद में संभावित हिंसा की आशंका के चलते प्रशासन धारा 144 लागू करने के साथ-साथ कर्फ्यू भी लगा रहा है

Dinesh Gupta Updated On: Apr 09, 2018 08:29 PM IST

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भारत बंद: कर्फ्यू लगाकर बंद को सफल बनाना चाहती है सरकार?

दस अप्रैल के कथित भारत बंद के चलते मध्यप्रदेश के भिंड जिले में सोमवार नौ अप्रैल की शाम छह बजे से ही कर्फ्यू लागू कर दिया गया है. दस अप्रैल को स्कूल, कॉलेज बंद रहेंगे. भिंड सहित पूरे ग्वालियर चंबल संभाग में रविवार की रात बारह बजे से ही इंटरनेट की सेवाएं बंद कर दी गईं हैं. प्रशासन अब तक उन संगठनों अथवा व्यक्तियों की तलाश नहीं कर पाया है, जिन्होंने 10 अप्रैल को भारत बंद रखने का ऐलान किया है.

दस अप्रैल के भारत बंद को दो अप्रैल के अनुसूचित जाति, जनजाति संगठन के भारत बंद का जवाब माना जा रहा है. दो अप्रैल के भारत बंद में सबसे ज्यादा हिंसा मध्यप्रदेश के ग्वालियर एवं चंबल के इलाके में हुई थी. दस अप्रैल के बंद में संभावित हिंसा की आशंका के चलते प्रशासन धारा 144 लागू करने के साथ-साथ कर्फ्यू भी लगा रहा है.

सोशल मीडिया के जरिए हो रहा है भारत बंद

मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक ऋषि कुमार शुक्ला ने बताया कि दस अप्रैल को भारत बंद रखने का आह्वान करने वाला कोई संगठन अब तक सामने नहीं आया है. उन्होंने बताया कि बंद रखने की अपील सोशल मीडिया पर चल रही है. अपील जारी करने वाले की तलाश सोशल मीडिया के जरिए ही की जा रही है. शुक्ला के अनुसार दो अप्रैल का भारत बंद भी सोशल मीडिया पर चली अपील से हुआ था. कोई संगठन सामने नहीं था. अपील पढ़ कर ही युवा सड़कों पर उतर आए थे.

मध्यप्रदेश के डीजीपी ने कहा कि भिंड में हुई हिंसा के बाद रात का कर्फ्यू जारी है. इधर, भिंड के कलेक्टर टी. इलैया राजा ने कहा कि दस अप्रैल के संभावित बंद को देखते हुए नौ अप्रैल की शाम छह बजे से ही पूरे जिले में कफर्यू लागू कर दिया जाएगा. यह स्थिति 14 अप्रैल अंबेडकर जयंती तक रहेगी. उल्लेखनीय है कि दो अप्रैल के भारत बंद के दौरान भिंड में हुई हिंसा में तीन लोगों की मौत गोली लगने से हुई थी. भिंड की हिंसा में पुलिस ने 295 लोगों के खिलाफ कुल 44 मामले दर्ज किए हैं.

लाइसेंसी बंदूक जमा कराने थानों में लगी है भीड़

मध्यप्रदेश के ग्वालियर और चंबल संभाग में कुल सात जिले हैं. सभी हाई अलर्ट पर रखे गए हैं. बढ़ी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल भिंड, मुरैना एवं ग्वालियर में तैनात किया गया है. सभी पुलिस अधिकारियों की छुट्टियां निरस्त कर दी गईं हैं. मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा लाइसेंसी हथियार इन तीनों जिलों में हैं. हिंसा की आशंका के चलते जिला कलेक्टरों ने सभी हथियारों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं. सभी हथियार थानों में जमा कराए जा रहे हैं. थानों में हथियारों को जमा कराने वालों की लाइनें लगी हुई हैं.

भिंड के कलेक्टर टी. इलैया राजा ने बताया कि फैक्ट्री और वित्तीय संस्थाओं के सुरक्षा गार्डों को लाइसेंसी बंदूक रखने की छूट दी गई है. भिंड जिले में मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र है. यहां फैक्ट्री मालिक अपहरण और अड़ीबाजी से निपटने के लिए निजी सुरक्षा गार्ड रखे हुए हैं.

मुरैना में व्यापारी बाजार खोलने को तैयार हैं. लेकिन, कलेक्टर भास्कर लक्षकार ने स्कूल और कॉलेज बंद करने का आदेश दे दिया है. सोमवार को दोपहर से ही इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं हैं. पूरे जिले में आरपीएफ जवान तैनात कर दिए गए हैं. मुरैना में दो अप्रैल की हिंसा में ढाई सौ से ज्यादा लोगों के खिलाफ 27 नामजद मामले दर्ज किए गए हैं. प्रशासन व्यापारी संगठन और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से बात कर दुकानें खुली रखने और शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है. बैठकों का दौर लगातार जारी है. ग्वालियर के व्यापारी बाजार खुला रखने को तैयार नहीं हो रहे हैं. ग्वालियर कलेक्टर राहुल जैन ने बताया कि दस अप्रैल को सभी स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे.

Meerut: Vehicles set on fire by a group of protesters during 'Bharat Bandh' call given by Dalit organisations against the 'alleged' dilution of Scheduled Castes / Scheduled Tribes Act, in Meerut on Monday. PTI Photo (PTI4_2_2018_000077B)

मुरैना के बीजेपी सांसद ने प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा

मुरैना से बीजेपी के सांसद अनूप मिश्रा जो कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे हैं. उन्होंने हाल ही में लोकसभा में दिए अपने भाषण में संसदीय क्षेत्र के प्रशासन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं को पलीता लगाने का आरोप लगाया था. दो अप्रैल की हिंसा के बाद उन्होंने एक बार फिर मुरैना के जिला प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन को दो अप्रैल की संभावित हिंसा को लेकर कई माध्यमों से सर्तक किया गया था. लेकिन, प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया. उन्होंने कहा कि दो अप्रैल की हिंसा चंद लोगों का षडयंत्र था. बीजेपी सांसद ने षडयंत्र में शामिल नामों का खुलासा नहीं किया है.

भिंड-मुरैना है सबसे ज्यादा जातिवाद

मध्यप्रदेश के जिन जिलों में सबसे ज्यादा जातिवाद देखने को मिलता है, उनमें भिंड एवं मुरैना जिले भी हैं. विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र में भी काफी जातिवाद देखा जाता है. दो अप्रैल के बंद में विंध्य और बुंदेलखंड इलाके में कोई हिंसक वारदात नहीं हुई थी. मुरैना, भिंड और ग्वालियर में ही हिंसा हुई. इस कारण प्रशासन भिंड और मुरैना में ज्यादा सर्तकता बरत रहा है. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राज्य के मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह और पुलिस महानिदेशक ऋषि कुमार शुक्ला ने हिंसा प्रभावित जिलों का संयुक्त दौरा किया था. दौरे के बाद मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने कहा कि जातिवादी हिंसा की वजह हमारा सामाजिक ढांचा है.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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