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भय्यूजी के सुसाइड नोट पर सस्पेंस बरकरार, सेवादार को संपत्ति सौंपने पर परिजन हैरान

पुलिस हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की मदद से भय्यूजी की राइटिंग और सुसाइड नोट का मिलान कर रही है

Updated On: Jun 14, 2018 01:57 PM IST

FP Staff

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भय्यूजी के सुसाइड नोट पर सस्पेंस बरकरार, सेवादार को संपत्ति सौंपने पर परिजन हैरान

मध्यप्रदेश के इंदौर में आध्यात्मिक गुरू भय्यूजी महाराज की मौत के बाद उठा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है. सुसाइड नोट में भय्यूजी की अंतिम इच्छा से जहां सभी परिजन हैरान हैं वहीं सुसाइड नोट भी संदेह के दायरे में है.

मंगलवार को भय्यूजी द्वारा की गई कथित सुसाइड मामले में अब नया मोड़ आता दिखाई दे रहा है. भय्यूजी के सुसाइड नोट के दूसरे पन्ने में उन्होंने पुराने सेवादार विनायक को संपत्ति के साथ-साथ सारे वित्तीय अधिकार सौंपने के लिए कहा है.

सुसाइड नोट में लिखी इस बात से परिजन समेत ट्रस्ट के पदाधिकारी भी परेशान हैं, हालांकि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि सुसाइड नोट असली है या नकली. पुलिस हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की मदद से भय्यूजी की राइटिंग और सुसाइड नोट का मिलान कर रही है. सूत्रों के मुताबिक इस बात का शक है कि ये सुसाइड नोट भय्यूजी ने ही लिखा है.

कौन संभालेगा ट्रस्ट की जिम्मेदारी

सुसाइड नोट पर जारी घमासान के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रस्ट की जिम्मेदारी कौन संभालेगा. परिवार के करीबियों का कहना है कि सेवादार विनायक के हर काम में दखल से भय्यूजी भी खुश नहीं थे.

पूर्व एनसीपी एमएलसी दीपक सालुंखे ने कहा कि संपत्ति पर परिवार का हक है, विनायक की आपत्ति का सवाल ही नहीं उठता, अगर विनायक अधिकार पाने की कोशिश करता है तो उसे ट्रस्ट से निकाल दिया जाएगा. वहीं जब विनायक से सुसाइड नोट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने किसी भी तरह की चर्चा से इंकार कर दिया.

अंतिम संस्कार में परिवार के बीच दिखी दरार

इंदौर में समर्थकों के बीच बुधवार को भय्यूजी महाराज का अंतिम संस्कार कर दिया गया. मेघदूत शवदाह गृह में दोपहर 2.30 के करीब 17 साल की बेटी कुहू ने चिता को अग्नि दी. अंतिम संस्कार से पहले परिवार में दरारा साफ दिखाई दी.

भय्यूजी महाराज के पार्थिव शरीर के एक छोर पर उनकी बेटी कुहू बैठी थी वहीं दूसरे छोर पर उनकी सौतेली मां डॉ. आयुषि शर्मा बैठी थीं, लेकिन दोनों ने एक-दूसरे की ओर एक बार भी नहीं देखा.

नहीं दिखे मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री

भय्यूजी की अंतिम यात्रा में केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पंकजा मुंडे, गिरीश महाजन और एकनाथ शिंदे ने शिरकत की लेकिन शिवराज सरकार का कोई मंत्री दिखाई नहीं दिया. मध्य प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा पाने वाले कम्प्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत समेत कई साधु-संत भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए.

हालांकि इंदौर के कलेक्टर निशांत वारवड़े ने कहा कि सरकार की ओर से वह खुद मौजूद हैं. बता दें कि भय्यूजी का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ नहीं किया जा सका. कलेक्टर वारवड़े ने बताया कि भय्यूजी ने राज्यमंत्री का दर्जा नहीं लिया था इसलिए उनकी इस इच्छा का मान रखा गया.

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