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भगत सिंह शहीद थे, हैं और हमेशा रहेंगे, किसी प्रमाण की जरूरत नहीं: रविशंकर प्रसाद

एक आरटीआई में पता चला था कि सरकार भगत सिंह को दस्तावेजों में शहीद नहीं मानती. यह मामला केसी त्यागी ने राज्यसभा में उठाया था. तब से भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के परिजन उन्हें शहीद का दर्जा देने की मांग को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं.

FP Staff Updated On: Jun 07, 2018 04:55 PM IST

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भगत सिंह शहीद थे, हैं और हमेशा रहेंगे, किसी प्रमाण की जरूरत नहीं: रविशंकर प्रसाद

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि 'जिस दिन आरटीआई की बात आई थी कि भगत सिंह शहीद नहीं हैं, उस दिन संसद में विपक्ष के एक नेता ने सवाल उठाया था. वेंकैया जी ने मेरी तरफ देखा, मैं खड़ा हुआ और कहा कि सरकार से प्रतिकार करता हूं कि आरटीआई में यह सूचना गलत दी गई है. शहीद भगत सिंह को किसी आरटीआई के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं. वो शहीद थे, हैं और रहेंगे.'

रविशंकर प्रसाद बुधवार शाम दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब में भगत सिंह की जेल डायरी के विमोचन के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. दरअसल, एक आरटीआई में पता चला था कि सरकार भगत सिंह को दस्तावेजों में शहीद नहीं मानती. यह मामला केसी त्यागी ने राज्यसभा में उठाया था. तब से भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के परिजन उन्हें शहीद का दर्जा देने की मांग को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं.

रविशंकर प्रसाद डायरी में भगत सिंह की लिखावट देखकर भावुक हो गए. उन्होंने कुछ लाइनें भी पढ़कर सुनाईं. भगत सिंह ने यह जेल डायरी लाहौर सेंट्रल जेल में आखिरी बार कैदी के रूप में रहने के दौरान (1929-1931 के बीच) बीच लिखी थी. इसकी मूल प्रति फरीदाबाद में रहने वाले उनके वंशज यादवेंद्र सिंह संधू के पास सुरक्षित है. उन्होंने इसे किताब की शक्ल देकर भगत सिंह के विचार जनता के बीच ले जाने का फैसला किया. संधू की मांग पर कानून मंत्री प्रसाद ने कहा 'हमारी सरकार शहीदों की वैधानिक सूची बनाने की कोशिश करेगी.'

'भगत सिंह को सजा देने के ट्रायल में खामियों पर आनी चाहिए किताब'

कानून मंत्री ने कहा, 'भगत सिंह को सजा देने का जो ट्रायल हुआ, उसमें क्या-क्या खामियां हैं उस पर एक किताब निकालनी चाहिए. यह काम सरकार को नहीं करना चाहिए, क्योंकि उसमें क्रेडिबिलिटी नहीं आएगी. चाहे वह भगत सिंह, अशफाक उल्ला खां का ट्रायल हो, रामप्रसाद बिस्मिल या सुखदेव, राजगुरु का ट्रायल हो उसमें क्या-क्या खामियां की थीं अंग्रेजों ने उसे दुनिया को बताना चाहिए.'

प्रसाद ने कहा 'एक दिन मेरे पास विद्या भारती के लोग आए और बताने लगे कि एनसीईआरटी की किताबों में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है कि भगत सिंह और रास बिहारी बोस आतंकवादी क्रांतिकारी थे. जिसने मां भारती को बेड़ियों से मुक्त करवाने के लिए हंसते-हंसते फांसी को चूम लिया उन्हें आतंकवादी कहा जाए, यह ठीक नहीं.

(न्यूज़ 18 के लिए ओम प्रकाश की रिपोर्ट)

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