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भ्रष्टाचार के आरोपियों के मुकदमे लड़ने वाले जेठमलानी कैसे लड़ेंगे भ्रष्टाचार से

भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई में जेठमलानी यदि सचमुच गंभीर हैं, तो क्या अब उन्हें सवालों से रूबरू नहीं होना पड़ेगा?

Virag Gupta Virag Gupta Updated On: Sep 12, 2017 03:01 PM IST

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भ्रष्टाचार के आरोपियों के मुकदमे लड़ने वाले जेठमलानी कैसे लड़ेंगे भ्रष्टाचार से

बार काउंसिल के कार्यक्रम में अपराजेय योद्धा राम जेठमलानी ने जब रिटायरमेंट की घोषणा की, तो मुझ समेत लाखों लोग हतप्रभ रह गए. भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई में जेठमलानी यदि सचमुच गंभीर हैं, तो क्या अब उन्हें सवालों से रूबरू नहीं होना पड़ेगा?

वकालत में कभी नहीं होता रिटायरमेंट

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ठाकुर के सामने सुनवाई के दौरान जेठमलानी ने कहा था कि मौत ही उनको रिटायर कर सकती है. इसके बावजूद कुछ महीनों बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में मेंशनिंग के दौरान कहा कि यह उनका आखिरी मामला है. बार काउंसिल के चेयरमैन रह चुके जेठमलानी यदि रिटायरमेंट के लिए सीरियस हैं, तो क्या वकालत के लाइसेंस को सरेंडर करेंगे?

पुराने कानून मंत्रियों को वकालत की इजाजत क्यों मिले?

संविधान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जज रिटायरमेंट के बाद वकालत नहीं कर सकते. जेठमलानी के अलावा शांति भूषण, सलमान खुर्शीद, अश्विनी कुमार और कपिल सिब्बल पूर्व कानून मंत्री होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते हैं. कानून मंत्री द्वारा जजों की नियुक्ति होती है फिर पदमुक्त होने के बाद पूर्व कानून मंत्रियों को वकालत की अनुमति क्यों मिलनी चाहिए?

लालू की पार्टी से सांसद हैं जेठमलानी, फिर भ्रष्ट व्यवस्था से कैसे लड़ेंगे?

जेठमलानी बिहार से मीसा यादव के साथ पिछले साल राज्यसभा सांसद बने थे. लालू यादव चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित हैं और मीसा यादव ईडी जांच का सामना कर रही हैं. हाजी मस्तान जैसे तस्कर, आर्थिक ठग हर्षद मेहता और केतन पारिख, धार्मिक बाबा आसाराम, 2जी के घोटालेबाजों की वकालत करने वाले जेठमलानी, अब उन भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कैसे लड़ेंगे?

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जेठमलानी का जनता पार्टी, वीपी सिंह और केजरीवाल के साथ प्रयोग

भारत में व्यवस्था परिवर्तन के सबसे बड़े जेपी आंदोलन के बाद इमरजेंसी में जब जेठमलानी के गिरफ्तार होने की बारी आई तो वह विदेश चले गए. जनता पार्टी के गठन के बाद जेठमलानी सांसद तो बन गए, पर मंत्री बनने का सपना पूरा नहीं हुआ. बोफोर्स कांड पर राजीव गांधी के खिलाफ वीपी सिंह से जुड़ने के बाद जेठमलानी अटल सरकार में कानून मंत्री का पद हासिल करने में सफल हो गए. अन्ना आंदोलन की उपज केजरीवाल को छोड़कर जेठमलानी अब किस नए प्लेटफार्म से व्यवस्था परिवर्तन करेंगे?

दल-दल में जेठमलानी अब किस दल में

मुंबई के उल्हासनगर से निर्दलीय चुनाव लड़कर राजनीति शुरू करने वाले जेठमलानी खुद की राजनीतिक पार्टी का भी गठन कर चुके हैं. इंदिरा और राजीव गांधी के हत्यारों का मुकदमा लड़ने के बावजूद, वे कांग्रेस और सोनिया गांधी का साथ देने के लिए तत्पर हो गए.

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बीजेपी से अनेक बार सांसद और मंत्री रहने के बाद जेठमलानी अमित शाह के वकील रहे और फिर मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के पैरोकार बन गए. सभी पार्टियों के दलदल का हिस्सा रहने के बाद जेठमलानी राजनीति के कीचड़ को किस तरकीब से साफ करेंगे?

न्यायिक सुधारों की लड़ाई में पीछे क्यों?

कानून मंत्री के कार्यकाल में जेठमलानी व्यक्तिगत मुद्दों पर तत्कालीन चीफ जस्टिस आनंद और सोलिसिटर जनरल सोली सोराबजी से लड़ गए थे. आम जनता को न्यायिक व्यवस्था और जजों की नियुक्ति प्रणाली में सुधार की सख्त जरूरत महसूस होती है. इस मोर्चे पर जेठमलानी अपने बुल्डोजरी तेवर दिखाने में क्यों विफल रहे?

अमीरों की वकालत के बाद, जनता के हक की लड़ाई कैसे होगी?

एक रूपए फीस से वकालत की शुरुवात करने वाले जेठमलानी देश के सबसे महंगे वकीलों में एक हैं. उनके क्लाइंट्स में ललित मोदी, सुब्रत रॉय समेत अनेक उद्योगपति शामिल हैं. सांसद के नाते अगले 4 वर्षों तक लुटियंस दिल्ली में सरकारी आवास समेत अधिकांश मुफ्त सुविधाओं के हकदार जेठमलानी को क्या अब जनता के हक की लड़ाई नहीं लड़नी चाहिए?

व्यवस्था की बजाय अहं की लड़ाई

अटल बिहारी बाजपेयी ने जेठमलानी को पहली बार मंत्री बनाया, इसके बावजूद वे अटलजी के खिलाफ लखनऊ से चुनाव लड़ गए थे. पार्टी से निकाले जाने के बाद उन्होंने बीजेपी के बड़े नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी कर दिया.

जेटली के खिलाफ केजरीवाल सरकार से 3 करोड़ से ज्यादा के फीस की मांग करने के बाद, जेठमलानी अब रणक्षेत्र से बाहर निकल गए. व्यक्तिगत नापसंदगी के आधार पर बुलडोज करने की बजाय व्यवस्था-परिवर्तन के लिए टीम वर्क के साथ लड़ना, जेठमलानी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है?

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काले धन की लड़ाई को अंजाम तक नहीं पंहुचाया

विदेशों से काला धन वापस लाकर हरेक खाते में 15 लाख रूपए जमा कराने के वायदे से बीजेपी ने केंद्र में सरकार बनायी. जेठमलानी के क्लाइंट बाबा रामदेव काले धन के मुद्दे को छोड़ कर अब विदेशी कंपनियों की लूट की बात करने लगे हैं.

जेठमलानी द्वारा काले धन के खिलाफ लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रधानमंत्री मोदी ने एसआईटी का गठन किया था, पर उसके बाद कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से पनामा लिक्स और काले धन पर ठोस कार्रवाई के लिए सरकार को विवश करने पर जेठमलानी क्यों विफल रहे?

डिपार्चर लाउंज से कैसे लगे हैट्रिक

मेधावी जेठमलानी पढाई में प्रमोशन की हैट्रिक से 17 साल की उम्र में ही वकील बनने के बाद देश की राजनीति में भी अपरिहार्य हो गए. न्यायपालिका, उद्योग जगत और राजनीति के कीचड़ का सच समझने के साथ जेठमलानी कई बड़े फैसलों के राजदार हैं. क्रूसेडर की नई भूमिका में डिपार्चर लाउंज से जेठमलानी, क्या भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ छक्का मारकर देश को चौकाएंगे?

(लेखक सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं)

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