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महाराष्ट्र: कोल्हापुर के गांव में मिले दुर्लभ बेसाल्ट स्तंभ!

यह खोज विभिन्न कॉलेजों के शोधकर्ताओं के एक दल ने मिलकर की है

Updated On: Sep 06, 2018 06:57 PM IST

FP Staff

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महाराष्ट्र: कोल्हापुर के गांव में मिले दुर्लभ बेसाल्ट स्तंभ!

भारत में स्थित डेक्कन ट्रैप को दुनियाभर में इसकी ज्वालामुखीय विशेषताओं के लिए जाना जाता है. इसी क्षेत्र में अब भारतीय वैज्ञानिकों ने पूर्ण रूप से विकसित दुर्लभ बेसाल्ट चट्टानों से बनी संरचना का पता लगाया है. ये एक प्रकार की ज्वालामुखीय विशेषताओं वाली चट्टान है.

इन्हीं चट्टानों से बने स्तंभों का एक समूह महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के बांदीवाड़े गांव में मिला है. स्तंभाकार संरचना युक्त यह बेसाल्ट प्रवाह 6.56 करोड़ वर्ष पुराने पन्हाला गठन का हिस्सा है, जो डेक्कन ट्रैप की सबसे कम उम्र की संरचनाओं में से एक माना जाता है.

यह खोज सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, डॉ डी.वाई. पाटिल विद्यापीठ, पुणे और कोल्हापुर स्थित डी.वाई. पाटिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी और गोपाल कृष्ण गोखले कॉलेज के शोधकर्ताओं के एक दल ने मिलकर की है. यहां पाए गए बेसाल्ट स्तंभ विघटन के विभिन्न चरणों में मौजूद हैं.

नई खोजी गई यह साइट अद्वितीय और उल्लेखनीय है

पूर्वी-पश्चिमी दिशा में खड़े ये स्तंभ कम ऊंचाई क्षेत्र (समुद्र तल से लगभग 850 मीटर ऊपर) से ऊपर उठे हुए हैं, जो लैटराइट से ढंके दो पठारों को जोड़ते हैं. इन पंचभुजीय स्तंभों का व्यास करीब एक मीटर तक है. इस क्षेत्र में 1-10 मीटर की ऊंचाइयों के अलग-अलग स्थायी स्तंभ भी देखे गए हैं.

इस अध्ययन से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता डॉ के.डी. शिर्के ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि 'नई खोजी गई यह साइट अद्वितीय और उल्लेखनीय है. इन बहुभुजीय स्तंभों का निर्माण मौसम और स्तंभाकार विशाल बेसाल्ट के क्षीन यानी कमजोर होने के कारण हुआ है. इस साइट में भू-विरासत क्षेत्र के रूप में चिह्नित किए जाने के गुण मौजूद हैं और इसे राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक के रूप में घोषित किया जाना चाहिए.'

डेक्कन ट्रैप बेसाल्टीय चट्टानों से बना हुआ सबसे व्यापक क्षेत्र है जो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में लगभग पांच लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है.

डेक्कन ट्रैप के निर्माण का आरंभ करीब 6.62 करोड़ वर्ष पूर्व माना जाता है

भूवैज्ञानिकों के अनुसार, करीब 30 हजार वर्षों से अधिक समय तक इस क्षेत्र में ज्वालामुखीय विस्फोटों की श्रृंखला हुई है. डेक्कन ट्रैप में विशेष रूप से क्षैतिज लावा प्रवाह के निशान, समतल चोटी वाली पहाड़ियां और चरणबद्ध छतों का विकास देखा जा सकता है.

शोधकर्ताओं के मुताबिक, बांदीवाड़े में पाए गए ये स्तंभ पूर्ण विकसित होने के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों, जैसे- उत्तरी आयरलैंड के जायंट्स कॉज़वे और कर्नाटक के सेंट मैरी द्वीप के मुकाबले मजबूत भी हैं. पन्हाला साइट भूवैज्ञानिक अध्ययनों की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है.

इस क्षेत्र में बेसाल्ट प्रवाह से जुड़ी विशेषताओं, भिन्न मौसम और क्षीण होने के लिए जिम्मेदार जमीन के भीतर दबी कारकों को समझने के लिए अधिक अध्ययन किये जाने की आवश्यकता है.

इस अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं में डॉ शिर्के के अलावा जे.डी. पाटिल, के. बंदिवेदकर, एन. पवार और विश्वास एस. काले शामिल थे. यह अध्ययन शोध पत्रिका करंट साइंस में प्रकाशित किया गया है.

(इंडिया साइंस वायर से डॉ रवि मिश्रा का लेख)

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