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ममता को 'हसीना' की सलाह: आतंकियों के लिए नया शरणगाह बना पश्चिम बंगाल

बांग्लादेश सरकार की रिपोर्ट को ममता बनर्जी सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए

Sreemoy Talukdar Updated On: Mar 23, 2017 03:56 PM IST

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ममता को 'हसीना' की सलाह: आतंकियों के लिए नया शरणगाह बना पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल आज आतंक के बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है. इसके संकेत तो काफी पहले से मिल रहे थे. लेकिन, पश्चिम बंगाल की तमाम सरकारें इसकी अनदेखी करती रहीं. नतीजा ये हुआ कि मर्ज बढ़ता गया.

आतंकवाद पर एक ताजा रिपोर्ट में भारत को लेकर बहुत बुरी तस्वीर पेश की गई है. ये रिपोर्ट बांग्लादेश की सरकार ने तैयार की है.

बांग्लादेश की सरकार ने ये रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी है. इस रिपोर्ट में इस बात की तस्दीक की गई है कि पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा में आतंक का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है.

बांग्लादेश में सक्रिय कई आतंकवादी संगठनों को इन राज्यों में पनाह मिल रही है. बांग्लादेश और भारत की सीमा के आर-पार जाना आसान है. ये आतंकवादी इसका फायदा उठाकर पश्चिम बंगाल में घुसपैठ कर रहे हैं.

पश्चिम बंगाल की करीब 2200 किलोमीटर की सीमा बांग्लादेश से मिलती है. हरकत-उल-जिहादी अल-इस्लामी और जमात-उल मुजाहिदीन बांग्लादेश, इस सीमा पर कमजोर सुरक्षा का जमकर फायदा उठा रहे हैं.

बंगाल की आबादी और सीमा से लगे हुए शहर इन संगठनों के आतंकवादियों के लिए सुरक्षित ठिकाने बन गए हैं. बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार इन आतंकी संगठनों पर जैसे-जैसे सख्ती बढ़ा रही है, वैसे-वैसे ये आतंकी हथियारों के साथ कोलकाता के जरिए भारत में घुसपैठ करके वहां अपने अड्डे बना रहे हैं.

इनमें से कई आतंकियों के अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से भी ताल्लुक बताए जाते हैं. भारत के लिए हालात और गंभीर होते जा रहे हैं.

आतंकवाद से लोहा

बांग्लादेश की सरकार आतंकवाद से बेहद सख्ती से निपट रही है. हाल के दिनों में कई आतंकी हमलों और धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगर्स की हत्या के बाद शेख हसीना की सरकार पूरी ताकत लगाकर कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले हर संगठन का खात्मा करने की ठान चुकी है.

आतंकी हमले

आतंकी हमले की प्रतीकात्मक तस्वीर (पीटीआई)

राजनैतिक फायदे के लिए बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया ने कई कट्टरपंथी संगठनों को बढ़ावा दिया था. अब शेख हसीना की सरकार उनका जड़ से खात्मा करने की कोशिश कर रही है. इस्लामिक आतंकवादियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जा रहे हैं.

पिछले साल से ही बांग्लादेश सरकार इस्लामिक कट्टरपंथ के खिलाफ अभियान छेड़े हुए है जो इस साल भी जारी है. ये बांग्लादेश की सरकार के मजबूत इरादों की मिसाल है.

पिछले साल अकेले जून महीने में ही बांग्लादेश में करीब तीन हजार अपराधी और 37 कट्टर आतंकवादी पकड़े गए थे. तब शेख हसीना की सरकार ने इस्लामिक कट्टरपंथ के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ा था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक शेख हसीना ने अपनी पार्टी अवामी लीग की बैठक में कहा था कि उनके देश में इस्लामिक कट्टरपंथियों को छुपने का एक भी ठिकाना नहीं मिलेगा.

हसीना ने कहा था कि, बांग्लादेश एक छोटा देश है. ऐसे लोगों जहां भी छुपेंगे सरकार उन्हें ढूंढ निकालेगी और उन्हें कानून का सामना करना पड़ेगा.

शेख हसीना के इन इरादों के बावजूद कई आतंकवादी बांग्लादेश से भाग निकलने में कामयाब हुए. बांग्लादेश से भागकर उनके लिए पश्चिम बंगाल आना आसान था. क्योंकि दोनों देश की सीमा की सख्त निगरानी नहीं होती.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में साल 2016 में जमात उल मुजाहिदीन और हरकत उल जिहादी अल इस्लामी यानी हूजी के तीन गुना आतंकियों ने घुसपैठ की है.

खुफिया रिपोर्ट बताती हैं कि इन दोनों संगठनों के दो हजार से ज्यादा आतंकियों ने भारत में घुसपैठ की. इनमें से 720 पश्चिम बंगाल के रास्ते से भारत आए हैं ऐसा कहा जा रहा है.

हालांकि पश्चिम बंगाल के अधिकारी इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हैं. इन आंकड़ों पर यकीन न भी करें तो भी जिस तरह से बांग्लादेश से घुसपैठ बढ़ रही है, वो बेहद खतरनाक है.

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पश्चिम बंगाल के बर्दवान में अक्टूबर 2014 में हुए धमाके का सीधा ताल्लुक जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश से पाया गया है. इस धमाके की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी कर रही है.

धमाके में संगठन के दो सदस्य मारे गए थे जबकि तीसरा घायल हो गया था. मौके से पुलिस को आईईडी, आरडीएक्स, घड़ियां और सिम कार्ड मिले थे.

ये रिपोर्ट भारत सरकार या केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की नहीं है जिसे पश्चिम बंगाल की ममता सरकार साजिश बताकर खारिज कर दे. ये तो एक दोस्ताना मुल्क की सलाह है.

वो देश जो खुद इस्लामिक कट्टरपंथ से जूझ रहा है. इसीलिए हमारा पड़ोसी बांग्लादेश हमें सलाह दे रहा है कि हम कम से कम इन आतंकियों को अपने यहां पनाह तो न लेने दें.

आतंकी हमले

आतंकी हमले की प्रतीकात्मक तस्वीर (पीटीआई)

अफसोस की बात ये है कि पश्चिम बंगाल अभी भी ऐसे हालात से इंकार कर रहा है. जबकि, ममता सरकार को चाहिए की वो राज्य की सुरक्षा-व्यवस्था बेहतर करे. अभी टीएमसी की सरकार तो बांग्लादेश की रिपोर्ट की सच्चाई ही परख रही है.

ढाका में धमाका

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक असम की सरकार ने रिपोर्ट को काफी गंभीरता से लिया है. राज्य में जेएमबी के 54 सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं.

असम सरकार ने घुसपैठ रोकने और घुसपैठियों पर कार्रवाई की निगरानी के लिए पुलिस अफसरों और विधायकों की एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई है.

ममता बनर्जी को आज याद दिलाने की जरूरत है कि ढाका के गुलशन कैफे में हुए धमाके का एक मास्टरमाइंड बंगाल के एक होटल में ठहरा था. इस आतंकी हमले के तार सीधे इस्लामिक स्टेट से जुड़े थे.

ये आतंकी हमला बांग्लादेशी मूल के कनाडाई नागरिक तमीम चौधरी ने कराया था. बाद में वो ढाका में बांग्लादेश पुलिस की गोलियों का शिकार हुआ था.

माना जाता है कि तमीम और जेएमबी का आतंकवादी मोहम्मद सुलेमान, ढाका हमले से पहले भारत आए थे. यहां वो मालदा जिले में भारत के अबू मूसा से मिले थे. डेक्कन क्रॉनिकल की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुलेमान और उसके साथ आया तमीमी, बंगाल के एक होटल में ठहरे थे.

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पश्चिम बंगाल मे इस आतंकी नेटवर्क का एक और सबूत उस वक्त मिला जब कोलकाता पुलिस ने ढाका के गुलशन कैफे में हुए हमले के एक आरोपी इदरिस अली को गिरफ्तार किया.

इदरिल अली को कोलकाता के बड़ा बाजार इलाके से पकड़ा गया था. कोलकाता पुलिस को इदरीस के बड़ा बाजार में होने की जानकारी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से मिली थी.

बंगाल में अवैध घुसपैठियों की दिक्कत राजनैतिक भी है और सुरक्षा का मामला भी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पहले ही इसे बड़ा मुद्दा बनाकर राज्य में अपना दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. इस मुद्दे पर संघ ने अपनी कोयंबटूर की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में एक प्रस्ताव भी पास किया था.

दुर्भाग्य की बात ये है कि ममता बनर्जी सरकार इस मुद्दे को राजनैतिक चश्मे से ही देखना चाहती है. ऐसा करके बंगाल सरकार इससे जुड़ी सुरक्षा की चुनौतियों को दरकिनार कर देती है.

बांग्लादेश सरकार की रिपोर्ट को ममता बनर्जी सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए. उन्हें राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में सोचना और काम करना चाहिए.

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