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क्यों डरी हुई है कभी चंबल की खूंखार और खूबसूरत ‘दस्यु सुंदरी’!

एक अदद खूबसूरती और हालातों ने रेनू यादव को चंबल की महिला दस्यु सुंदरी तो बना दिया, लेकिन इस सुंदरता पर उसकी चंबल की जिंदगी के काले साये कहीं ज्यादा भारी साबित हुए हैं

Updated On: Jan 28, 2018 09:49 AM IST

Sanjeev Kumar Singh Chauhan Sanjeev Kumar Singh Chauhan

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क्यों डरी हुई है कभी चंबल की खूंखार और खूबसूरत ‘दस्यु सुंदरी’!

जिस चंबल घाटी बारे में पीढ़ियों से यही कहा-सुना जाता रहा है कि...

'घेरदार हैं घाटियां और घुमावदार मोड़ पानी पीछे पीना पहले तू गोली छोड़' या फिर 'मौत से टकराना इसकी शर्त पुरानी है सोच समझकर पीना, चंबल का पानी है'

भला ऐसी चंबल घाटी और वहां रहने वाले बागियों (डकैतों) का भय से दूर-दूर तक क्या वास्ता हो सकता है? है...वास्ता है... चंबल और वहां के बीहड़ के नाम से खाकी वर्दी से लेकर आम इंसान को पसीना आ जाता था. पसीना आने की वजह थी चंबल के जंगल में मौजूद खूंखार दस्यु बागी/डकैतों के कुख्यात गैंग और उनके अड्डे. समय बदला तो सब कुछ बदल गया. आज हम यहां बात कर रहे हैं कभी चंबल के जंगल की सबसे खूबसूरत मगर खूंखार महिला डकैत रही रेनू यादव की.

स्कूल की जगह चंबल, कलम की बजाए मिली बंदूक

सन् 2003 की वो नवंबर महीने की 29 तारीख थी. बाकी दिनों की तरह ही रेनू यादव घर से (गांव जमालीपुर, जिला औरेया, उत्तर प्रदेश) स्कूल के लिए निकली. गांव के बाहर पहुंची ही थी कि, चंबल घाटी में उस वक्त आतंक का पर्याय बने डाकू चंदन सिंह यादव ने रेनू का अपहरण कर लिया. रेनू की रिहाई के बदले दस्यु सरगना चंदन ने 10 लाख रुपए मांगे. गरीब किसान पिता विद्याराम यादव बेटी को डाकूओं के चंगुल से नहीं छुड़ा पाए.

लिहाजा चंदन ने रेनू को गैंग में शामिल करके उसे अपनी बिन ब्याही बीबी की हैसियत से रख लिया. और स्कूल के बजाए उसे दे दिए चंबल के जंगल के कांटो भरे टेढ़े-मेढ़े रास्ते. और हाथो में कलम-किताब के बजाए पुलिस से लूटे हुए जानलेवा हथियार थमा दिए. गैंग के ज्यादातर डकैतों की नीयत तो बला की खूबसूरत रेनू यादव पर पहली बार देखने पर ही खराब हो गई थी, मगर गैंग सरगना चंदन के खौफ के सामने सब चुप लगा गए.

चंबल के जंगल में ही रेनू बन गई जब बेटी की मां

यूं तो चंबल के जंगल में लंबे समय तक खाक छानने वाली कई महिला डकैत बीहड़ में मां बनी. इनमें बिगबॉस फेम सीमा परिहार के अलावा सलीम गुर्जर गैंग की सुलेखा उर्फ सुरेखा ने भी चंबल के जंगल में मां बनने का दर्जा हासिल किया. दस्यु सरगना जगन गुर्जर की पत्नी कोमेश गुर्जर भी चंबल में एक बच्चे की मां बनी.

इन तमाम मामलों में जितनी ज्यादा चर्चा चंबल में रेनू यादव के मां बनने पर हुई, उतनी किसी महिला डकैत के मां बनने पर नहीं हुई थी. सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा के लिहाज से और शिक्षा और बेहतर लालन-पालन के लिए रेनू ने अपनी बेटी को मायके में (नानी के घर) छोड़ा हुआ है. ताकि रेनू के चंबल के डरावने अतीत की छाया बेटी के उज्जवल भविष्य पर न पड़े.

रेनू को पाने की ललक में जब चंबल में बहा खून

यूं तो 2000 के दशक में चंबल के जंगलों में मौजूद तमाम डकैतों के सरगना रेनू यादव को पाने की जुगत में रहते थे. उन दिनों मगर खूंखार से खूंखार डाकू को जब रेनू के मुंह-बोले पति चंदन यादव का खतरनाक चेहरा जेहन में आता तो, वह रेनू को पाने की तमन्ना छोड़ने में ही भलाई समझ कर चुप्पी साध लेता था.

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चंबल में उस समय मौजूद बाकी गैंग और उनके सरगना भले ही रेनू को न पा सके. एक रात मगर चंदन यादव के गैंग के ही दूसरे डकैत रामवीर गुर्जर ने चंदन यादव को गोलियों से भून डाला. इस उम्मीद में कि, चंदन के बाद रेनू यादव को हासिल करने में कोई अड़ंगा नहीं होगा. रेनू को हासिल करने के लिए चंबल में दो डकैतों के बीच खून-खराबे की यह दिल-दहला देने वाली घटना घटी थी 4-5 जनवरी 2005 की रात.

आबरु बचाने को जब दुश्मन गोलियों से भून डाला

यह अलग बात है कि, रामवीर का दिल जब रेनू यादव पर आया, तो इससे तिलमिलाई रेनू ने डकैत रामवीर गुर्जर के सीने में रेनू यादव ने सेल्फ लोडिड राइफल (एसएलआर) की सब गोलियां उतार कर चंद सेकेंड में पूरी मैगजीन खाली कर दी थी. यह सनसनीखेज घटना है 14-15 जनवरी 2005 की आधी रात की. दुश्मन (डाकू रामवीर गुर्जर) को मरा समझकर रेनू यादव चंबल की घाटी से भाग खड़ी हुई.

रेनू को पाने की चाहत ने एक रात में 3 डकैत मरवा डाले

रेनू के हमले में बुरी तरह जख्मी डाकू रामवीर गुर्जर को पता लगा कि, यह काम गैंग के कुछ विश्वासघाती डाकूओं की मिलीभगत का परिणाम था. तो उसी रात रामवीर गुर्जर ने शक के दायरे में आए तीनों डकैतों को लाइन में लगाया और गोलियों से भून डाला. यानी एक अदद खूबसूरत रेनू को पाने के लिए चंबल में गैंगवार छिड़ गई.

renu yadav main

आतंक का दूसरा नाम रही रेनू खुद है खौफजदा

कभी चंबल घाटी की सबसे खूबसूरत और खौफ का दूसरा नाम रही महिला दस्यु रेनू यादव को आज अपनी जान के लाले पड़े हैं. गैरों से या पुलिस से नहीं. बल्कि उसी खूंखार डकैत रामवीर गुर्जर से, चंबल घाटी में जो कभी रेनू का दीवाना और रेनू यादव के पति गैंग सरगना चंदन सिंह यादव का हम-प्याला हुआ करता था.

दरअसल पति चंदन सिंह यादव की हत्या का बदला लेने और खुद की आबरु बचाने के लिए रेनू यादव के दिमाग में खून उतर आया था. रेनू यादव ने पति के हत्यारे डकैत रामवीर गुर्जर के बदन को आधी रात के वक्त गोलियों से छलनी कर दिया था. यह अलग बात है कि इस खतरनाक हमले में भी रामवीर गुर्जर जीवित बच गया. जेल में बंद रामवीर इस समय उम्रकैद की सजा काट रहा है.

जबसे रेनू यादव जेल काटकर बाहर निकली है, तभी से उसे रामवीर गुर्जर और उसके गुर्गों से धमकियां मिल रही हैं. अक्सर बातचीत के दौरान रेनू ने इसका खुलासा भी किया था कि, रामवीर और उसके गुंडे, उसे दुबारा चंबल में उतरने के लिए धमका रहे हैं. दुबारा चंबल में न जाने पर जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. इन्हीं धमकियों के चलते उत्तर प्रदेश पुलिस ने रेनू यादव को सुरक्षा भी मुहैया करा दी थी.

पुलिस के सामने काम नहीं आई खूबसूरती

चंबल घाटी में जिस बला की खूबसूरत रेनू यादव को हासिल करने में एक डकैत (रामवीर गुर्जर) का बदन गोलियों से छलनी किया गया. तीन-तीन डकैत एक ही रात में लाइन में लगाकर मार डाले गए. रेनू के पति दस्यु सरगना चंदन सिंह यादव को रामवीर गुर्जर ने गोलियों से भूनकर मौत को घाट उतार दिया हो. वो खूबसूरती भी रेनू यादव को पुलिस से बचाने में नाकाम रही.

15 जनवरी 2005 की रात डकैत रामवीर गुर्जर के बदन को गोलियों से छलनी करने के बाद उसे मरा हुआ समझकर रेनू यादव डाकूओं के अड्डे से रात के अंधेरे में भाग गई. 6-7 दिन तक चंबल के खतरनाक रास्तों से होते हुए इटावा पहुंच गई.

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बातचीत में रेनू ने बताया था कि, उसने सरेंडर कर दिया. जबकि उस समय इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) दलजीत सिंह चौधरी ने दावा किया था कि, रेनू यादव को सेल्फ लोडिड राइफल के साथ सिविल लाइंस थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक रेनू यादव देखने में जितनी ज्यादा खूबसूरत है, दिल और दिमाग से उतनी ही खतरनाक है.

डकैत के रूप में सुंदरी को कभी किसी ने नहीं देखा था

चंबल घाटी में जिस रेनू यादव को पाने के लिए डकैतों में मार-काट मच गई थी. चार-पांच डकैतों को गोलियों से भून डाला गया हो, उसकी एक झलक पाने को मीडिया हो या पुलिस...सब लालायित रहते थे. जब तक रेनू यादव चंबल के जंगल में रही...तब तक उसकी एक झलक भी किसी को देखने को नहीं मिली. यही वो वजह थी, जिसके चलते हर कोई रेनू की एक झलक पाने को अक्सर बेताब रहता था.

देखने में जितनी सुंदर, जुबान की उतनी ही...

हमेशा सफेद शर्ट या टी-शर्ट, नीली जींस और स्पोर्ट्स शू में मर्दों वाले रूप में रहने वाली रेनू यादव की एक और भी खासियत रही है. वो देखने में जितनी सुंदर है, बोलने में उतनी ही एकदम विपरीत. रेनू यादव से पूछताछ में यह बात भी पुलिस को ही सबसे पहले पता चली.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रेनू की जुबान पर जो गालियां हमेशा मौजूद रहतीं, उन्हें सुनकर कोई महिला या लड़की क्या, मर्द भी सुनकर चकित रह जाए. कुल जमा रेनू की ड्रेस और उसकी जुबान (बोलचाल) यह साबित करने के लिए काफी है कि खूबसूरत दिखाई देने वाली इस दस्यु सरगना का चंबल के जंगल से बाहर की दुनिया तक आतंक किस कदर हावी रहा होगा. साथ ही वो देखने में जितनी खूबसूरत है...बोलचाल और व्यवहार में उतनी ही विपरीत.

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एक अदद खूबसूरती पर हावी हुए तमाम बुरे साये

पहली नजर में किसी को भी अपनी आकर्षित कर लेने वाली रेनू यादव 14 फरवरी 2005 को जेल भेज दी गई. आर्म्स एक्ट, लूटपाट, गिरोहबंदी जैसी संगीन धाराओं में उस पर आपराधिक मामले दर्ज हुए. अदालत द्वारा सभी मामलों में इस कुख्यात महिला दस्यु सुंदरी को बाइज्जत बरी कर दिया गया. अदालत द्वारा बरी किए जाने के बाद 29 मई 2012 को रेनू यादव लखनऊ नारी निकेतन से बाहर आ गई.

बाहर आने की रेनू को खुशी तो है. शिकवे-शिकायत और गम भी लेकिन कम नहीं हैं. रेनू को इस बात का मलाल हमेशा रहता है कि, चंबल से बाहर पांव रखने के बाद जो पुलिस वाले उसे फोन पर ही पुलिस सुरक्षा, हथियार का लाइसेंस, सरकार की ओर से पुनर्वास के लिए घर दिलवाने की लंबी-लंबी बातें किया करते थे, पुलिस के सामने पेश होते ही वो सब बातें-वायदे गायब कर दिए गए.

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जेल से बाहर आने पर उसने कई राजनीतिक पार्टियों का दामन थाम कर बाकी बचे जीवन की नाव को इज्जत के साथ पार लगाने की सोची. सब जगह से आश्वासन के सिवाय हाथ कुछ नहीं आया. कई फिल्म प्रोड्यूसर्स ने बागी जीवन पर फिल्म बनाने में रुचि दिखाई. किसी फिल्म निर्माता से बात नहीं बनी और किस्मत यहां भी दगा दे गई. कुछ समय तक गायों की रक्षा करने वाले एक संगठन से जुड़ी. वहां भी रेनू को मन-माफिक हिसाब-किताब नहीं दिखा और पांव वापस खींच लिए. लोकसभा चुनाव लड़ने के सपने संजोये मगर तमाम कागजात पूरे न होने से किस्मत यहां भी दगा दे गई.

कुल जमा अगर यह कहा जाए कि, एक अदद खूबसूरती और हालातों ने रेनू यादव को चंबल की महिला दस्यु सुंदरी तो बना दिया, लेकिन इस सुंदरता पर उसकी चंबल की जिंदगी के काले साये कहीं ज्यादा भारी साबित हुए हैं तो गलत नहीं होगा.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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