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हाईवे पर शराबबंदी, यूपी में अवैध बूचड़खाने बंद होने का कितना होगा असर?

इन दो व्यक्तियों में से एक हैं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जबकि, दूसरे पंजाब के हर्मन सिद्धू हैं

Neeraj Bajpai Updated On: Apr 07, 2017 04:57 PM IST

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हाईवे पर शराबबंदी, यूपी में अवैध बूचड़खाने बंद होने का कितना होगा असर?

यह दो बड़ी शख्सियत की एक ऐसी कहानी है जो एक-दूसरे से ठीक सात सौ पंद्रह किलोमीटर दूर बैठे हैं.

जहां एक नवाबों के पूर्ववर्ती शहर में भगवा कपड़े पहने हुए एक योगी है वहीं दूसरा फ्रांसीसी वास्तुशिल्पकार ली कार्बुज़ियर द्वारा नियोजित अपनी वास्तुकला से सम्मोहित करते शहर चंडीगढ़ में व्हील चेयर पर बैठा हुआ नागरिक अधिकारों का पहरुआ है.

दोनों आजकल अलग-अलग मिजाज के लोगों की आलोचनाओं के निशाने पर हैं. एक ने कथित तौर पर नेशनल और स्टेट हाइवे के किनारे शराब की विलासिता से सराबोर लोगों को परेशान कर दिया है तो दूसरे ने अवैध बूचड़खाने से प्रचुर मांस आपूर्ति पर प्रतिबंध लगा दिया है.

दोनों में से किसी को भी अपने उठाये गये कदम पर कोई पछतावा नहीं है. दोनों अपने-अपने उन कामों के औचित्य को सही ठहराते हैं जिनकी शुरूआत उन्होंने एक निश्चित इरादे के साथ की है.

आइए यह जानने की कोशिश करते हैं कि इसके परिणाम क्या-क्या हो सकते हैं. यह नई स्थितियां दोनों घटनाक्रमों की नवीनतम कहानी है जिन्होंने पूरे देश के बर्रे के छत्ते में हाथ डाल दिया है. यह उस राष्ट्र की कहानी है जिसकी विविध जीवन शैली और संस्कृति के लिए विश्व स्तर पर प्रशंसा हासिल है.

इन दो प्रसिद्ध व्यक्तियों में एक हैं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिन्होंने अवैध बूचड़खानों पर कड़ी कार्रवाई की है. खास बात ये है कि कई राज्य सरकारें भी इसी तरह की कार्रवाई करने की तैयारी में हैं.

दूसरे व्यक्ति हर्मन सिद्धू हैं जिनकी सुप्रीम कोर्ट में नेशनल हाइवे की सुरक्षा के लिए दायर याचिका ने नेशनल हाइवे और स्टेट हाइवे के दोनों किनारों के 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानों को बंद करने का नेतृत्व किया.

20 साल पहले हुआ हादसा

रिपोर्ट के मुताबिक सिद्धू को 1996 में एक कार दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में उस समय चोट लगी थी, जब वो दोस्तों के साथ हिमाचल प्रदेश के रेणुका से चंडीगढ़ लौट रहे थे. बीच रास्ते में ही उनकी गाड़ी फिसलकर पहाड़ी के नीचे लुढ़क गई थी.

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यूपी सरकार ने राज्य में अवैध मांस की दुकानों पर रोक लगाई है

उस गाड़ी में सवार बाकी लोग तो बचने में कामयाब रहे, लेकिन वो कार में फंस गए और उनकी रीढ़ की एक हड्डी चोटिल हो गयी. इस घटना ने उन्हें सिर्फ 26 साल की उम्र में ह्वील चेयर के हवाले कर दिया. तब से उन्होंने संकल्प ले लिया कि उनका जीवन सड़क सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध रहेगा.

हालांकि, उनकी कार दुर्घटना नशे में ड्राइविंग का परिणाम बिल्कुल नहीं थी, क्योंकि उस दुर्भाग्यपूर्ण समय पर जो भी कार में बैठे थे सबके सब लोग बेहद शालीन लोग थे. इसके बाद हर्मन सिद्धू ने शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ जंग छेड़ दी.

इस समय वो टीवी चैनलों, मीडिया और सोशल मीडिया के चहेते हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि हाइवे का सबसे बड़ा हत्यारा नशे में मस्त ड्राइवर होता है.

वो इस पर हो रही तकरार का जबरदस्त विरोध करते हैं कि जो लोग कुछ घूंट गटकना चाहते हैं वो शराब की दुकानों तक पहुंचने के लिए 500 मीटर की लंबी दूरी भी पूरी कर के अपना शौक पूरा कर सकते हैं.

वो कहते हैं कि इस तरह के प्रतिबंध सही अर्थों में खतरों की रोकथाम में सहायक होते हैं. ऐसे में कई लोग शराब खरीदने के लिए लंबी दूरी तय करने में परेशानी महसूस करते हुए वहां जाने से बचना चाहेंगे.

हाल ही में शराब पीकर गाड़ी चलाने के कारण हुई मौत पर बहस चल रही है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जुटाये गये नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक कुल सड़क हादसों के सिर्फ 1.5 फीसदी दुर्घटनाएं ही शराब पीकर गाड़ी चलाने के कारण होती हैं.

ब्यूरो का कहना है कि नशे में ड्राइविंग के कारण होने वाली सभी दुर्घटनाओं में मृत्यु दर सबसे ज्यादा है. हालांकि, कुछ सरकारी एजेंसी इन आंकड़ों से सहमत नहीं हैं.

इन एजेंसियों का मानना है कि शराब पीकर गाड़ी चलाने के दौरान हुई दुर्घटना में मृत्यु दर के जो आंकड़े पेश किये जाते हैं सही मायने में मृत्यु दर उससे कहीं ज्यादा है.

तेज रफ्तार के कारण दुर्घटना

एनसीआरबी का मानना है कि दुर्घटनाओं के 43 फीसदी कारण गाड़ी की तेज स्पीड है. जबकि दुर्घटना होने का 41 फीसदी और दूसरा सबसे बड़ा कारण लापरवाही से गाड़ी चलाना है.

सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 31 मार्च को अपने 15 दिसंबर 2016 के आदेश को दोहराते हुए कहा कि, 1 अप्रैल तक नेशनल और स्टेट हाइवे के 500 मीटर के दायरे में बेची जा रही या परोसी जा रही शराब पर रोक लगाई जाए.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कई राज्यों में हाईवे किनारे शराब बेचने और खरीदने की मनाही हो गई है

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन शहरों, कस्बों और नगरपालिका क्षेत्र के लिए इस सीमा में राहत देते हुए कहा कि, वहां 500 मीटर के दायरे की जगह 220 मीटर के दायरे का पालन किया जाए, जहां की जनसंख्या 20 हजार या इससे कम हो.

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सिद्धू काफी चर्चित हो रहे हैं क्योंकि प्रतिबंध ने आतिथ्य उद्योग पर बड़ा असर डाला है. कई प्रभावित पक्षों का कहना है कि इस कदम से एक नहीं बल्कि अनेक तरीकों से जटिलताओं का सामना करना पड़ेगा. कुछ लोगों का कहना है कि लाखों लोग अपने रोजगार से हाथ धो बैठेंगे और पर्यटन उद्योग को इससे बड़ा झटका लगेगा.

पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, चंडीगढ़, गोवा, पश्चिम बंगाल और कुछ अन्य राज्य इस प्रतिबंध को रोकने के लिए कानूनी विकल्पों की तलाश कर रहे हैं. कुछ राज्य सरकारें तो शहरी और स्थानीय सड़कों को बनाने के लिए स्टेट हाइवे को ही अधिसूचित कर रही हैं.

कुछ अन्य राज्यों में हिंसा और बर्बरता पैदा करने वाले अन्य प्रभावों को भी देखा गया है जिसके अंतर्गत महिला समूहों के नेतृत्व में स्थानीय लोगों द्वारा शराब की दुकानों को शहरों और सीमाओं के भीतर के इलाकों में बदलने का विरोध किया जा रहा है.

स्थानांतरण अभियान का जोरदार विरोध किया जा रहा है. उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में तो शराब विरोधी आंदोलन तेज हो गये हैं. उत्तरप्रदेश के 24 जिलों से हिंसा की रिपोर्ट है और राजधानी लखनऊ के दिल कहे जाने वाले हज़रतगंज जैसी जगहों से ताजा हमले की खबरें सामने आईं हैं.

शाहजहांपुर और मुरादाबाद में शराब की तस्करी करने के दौरान भीड़ ने दुकानों में आगजनी का सहारा लिया है. उत्तराखंड के कुमाऊं पहाड़ियों में पिथौरागढ़, चंपावत और बागेश्वर से भी विरोध की खबरें आयीं.

विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार जब राज्य सरकारें हाइवे को अधिसूचित करती हैं तो ऐसे में भारी वाहनों के जरिए इस्तेमाल किए जाने वाले उन सड़कों के रख-रखाव के लिए अधिक धन की जरूरत होगी. ऐसे में किसी भी प्रकार के गोलमाल और भ्रष्टाचार लोगों के जीवन के साथ अधिक खिलवाड़ करेंगे.

इन घटनाक्रमों के बीच योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि गैरकानूनी बूचड़खाने पर कार्रवाई के पीछे उनकी सरकार की कोई द्वेषपूर्ण भावना नहीं है लेकिन मांस के अवैध व्यापार को रोकना होगा.

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बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने भी राज्य में शराबबंदी को लेकर मुहिम चलाई है

उन्होंने कहा है कि, 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बूचड़खानो पर कई प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं और वो अवैध को वैध नहीं करार दे सकते हैं. योगी के इस बयान को आरएसएस की साप्ताहिक पत्रिका ऑर्गनाइजर में उद्धृत किया गया है.

अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश का कार्यभार संभालते ही मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने अवैध बूचड़खाने पर कार्रवाई का आदेश दे दिया था.

नवीनतम घटनाक्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच ने पाया है कि भोजन और भोजन की आदतें तथा भोजन की खरीद ब्रिक्री सीधे-सीधे लोगों के जीवन से जुड़े हुए हैं, इसे राज्य द्वारा नियंत्रित नहीं किया जाना चाहिए.

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अदालत ने यह बात मांस दुकानदारों की एक याचिका की सुनवाई के दौरान कही. कई और राज्य भी ऐसी ही कार्रवाई का सहारा लेने जा रहे हैं.

बताया जाता है कि गोवध का विरोध करने वाले गोवध को रोकने के लिए कानून अपने हाथों में ले रहे हैं. पिछले दिनों राजस्थान के अलवर जिले में गोरक्षकों द्वारा पंद्रह लोगों की पिटाई कर दी गई जिसमें एक शख्स ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया.

गायों को जयपुर से हरियाणा ले जाते समय उन पर धावा बोला गया था. मवेशियों के परिवहन के लिए कानूनी परमिट को लेकर पीड़ितों और हमलवारों द्वारा एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गये थे.

लोकसभा में फुटवियर डिजाइन और विकास संस्थान (एफडीडीआई) विधेयक के विचार-विमर्श के दौरान इस तरह के प्रतिबंधों और 'गौ-रक्षा' (गाय संरक्षण) की गूंज गुरुवार को संसद में भी सुनाई पड़ी.

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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि योगी आदित्यनाथ वही कर रहे हैं जो भारत की स्वतंत्रता संग्राम की मूल भावना रही है.

(इस आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया के पूर्व संपादक हैं)

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