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IIT : 169वीं रैंक लाकर किरण ने किया अपने 'ऑटो ड्राइवर' पिता का सपना पूरा

गरीब परिवार में जन्मी किरण ने अपने पापा की कहानियां सुनकर मन में ठाना था की उसे पढ़ लिखकर कुछ करना है

FP Staff Updated On: Jul 21, 2017 04:51 PM IST

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IIT : 169वीं रैंक लाकर किरण ने किया अपने 'ऑटो ड्राइवर' पिता का सपना पूरा

छत्तीसगढ़ में बलरामपुर जिले के सनावल गांव में एक ऑटो चालक की बेटी ने आईआईटी पास कर अपने परिवार का मान बढ़ाया है. किरण पटबंदी ने आईआईटी की परीक्षा में 169वां रैंक हासिल किया है.

दरअसल, आईआईटी पास किरण पटबंदी के पिता पेशे से ऑटो चालक हैं और वह अपने गांव सनावल में नहीं बल्कि संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर में ऑटो चलाते हैं.

आज इसी के बदौलत ऑटो चालक भगवाल पटबंदी की बेटी किरण पटबंदी ने रायपुर प्रयास स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की और कड़ी मेहनत से आईआईटी की परीक्षा में 169वां रैंक हासिल किया है.

वहीं परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने पर कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने आईआईटी में स्टेट टॉप में आने वाली किरण की मेहनत पर कलेक्टर ने खुशी जताई है. वहीं सीएम से भी किरण को इसके लिए सम्मान मिला है.

ऑटो ड्राइवर ने संकल्प लिया था खुद ना पढ़कर बेटी को जरूर पढ़ाऊंगा

किरण पटबंदी के पिता ऑटो चालक भगवान पटबंदी ने बताया कि जब वो 11वीं में थे तब उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए फीस जुटा नहीं पाए थे, इस कारण उनकी पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी थी. तबी उन्होने संकल्प लिया कि वो अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएंगे.

इसके बाद भगवान पटबंदी ने संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर में शरण ले लिया. वहां उन्होंने 7 से 8 साल तक रिक्शा चलाया, फिर ऑटो रिक्शा चलाने लगे. इसी बीच उनकी बेटी और बच्चे पढ़ने लगे.

वहीं किरण के मां सीमा पटबंदी ने अपनी गरीबी के बारे में बताते हुए कहा कि न तो उनके पास जमीन है कि उसे बेचकर वो बेटी को आगे पढ़ा सके. उनके बाकी रिश्तेदार भी गरीब हैं, इसलिए वो उनसे भी कोई मदद नहीं ले सकती.

फिर भी किसी से एक हजार तो किसी दो हजार की सहायता राशि मांगकर किसी तरह 25 हजार रुपए जमा किए और बेटी को आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली रवाना किया.

गरीब परिवार में जन्मी किरण ने अपने पापा की कहानियां सुनकर मन में ठाना था की उसे पढ़ लिखकर कुछ करना है. इसी क्रम में अम्बिकापुर से लेकर रायपुर तक सफर तय करते हुए किरण ने आईआईटी में 169वां रैंक हासिल किया है. अब उसका लक्ष्य आईएस बनने का है.

जिले के कलेक्टर अवनीश कुमार शरण तक ये बात पहुंची तो सबसे पहले उन्होंने अपनी जाहिर की. इसके बाद इसे जिले के लिए गौरव की बात कही. कलेक्टर ने बच्ची की गरीब परिस्थितियों में जिला प्रशासन की ओर से हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है.

बहरहाल, अब देखने वाली बात होगी कि इस गरीब बेटी को आगे पढ़ने के लिए गरीबी इसके बीच में न आ जाए. इसे लेकर शासन प्रशासन किस तरह की मदद करती है यह देखने वाली बात होगी.

(साभार न्यूज़ 18)

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