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अयोध्या विवाद पर शुरू हुई SC में सुनवाई: वरिष्ठ वकील बोले- मजाक के लिए नहीं बनाई जाती मस्जिदें

बाबरी मस्जिद-राम मंदिर भूमि विवाद मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में फिर से सुनवाई शुरू हुई

Updated On: Jul 06, 2018 04:09 PM IST

FP Staff

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अयोध्या विवाद पर शुरू हुई SC में सुनवाई: वरिष्ठ वकील बोले- मजाक के लिए नहीं बनाई जाती मस्जिदें
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बाबरी मस्जिद-राम मंदिर भूमि विवाद मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में फिर से सुनवाई शुरू हुई. इस दौरान वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच को बताया कि मस्जिदें मजाक के लिए नहीं बनाई जाती हैं. वहां सैंकड़ों लोग प्रार्थना के लिए एकत्रित होतें हैं. क्या उनका नमाज अदा करना महत्वपूर्ण नहीं है. उन्होंने सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस्लाम में मस्जिद की अहमियत है और यह सामूहिकता वाला मजहब है.

इससे पहले चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस ए नजीर की विशेष पीठ ने 17 मई को हिन्दू संगठनों की तरफ से पेश की गई दलीलें सुनी थीं, जिसमें उन्होंने मुसलमानों के इस अपील का विरोध किया था कि मस्जिद को इस्लाम के अनुयायियों द्वारा अदा की जाने वाली नमाज का आंतरिक भाग नहीं मानने वाले 1994 के फैसले को बड़ी पीठ के पास भेजा जाए.

अयोध्या मामले के मूल याचिकाकर्ताओं में शामिल और निधन के बाद कानूनी उत्तराधिकारियों द्वारा प्रतिनिधित्व पाने वाले एम सिद्दीकी ने एम इस्माइल फारूकी के मामले में 1994 में आए फैसले के कुछ निष्कर्षों पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने पीठ से कहा था कि अयोध्या की जमीन से जुड़े भूमि अधिग्रहण मामले में की गई टिप्पणियों का, मालिकाना हक विवाद के निष्कर्ष पर प्रभाव पड़ा है.

हालांकि हिन्दू संगठनों का कहना है कि इस मामले को सुलझाया जा चुका है और इसे फिर से नहीं खोला जा सकता. शीर्ष अदालत की विशेष पीठ चार दीवानी वादों पर उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर विचार कर रही है. सुप्रीम कोर्ट के विशेष खंडपीठ को चार सिविल सूट में दिए गए उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर कुल 14 अपीलों में से जब्त कर लिया गया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की खंडपीठ ने 2:1 बहुमत वाले निर्णयों में 2010 में आदेश दिया था कि भूमि को तीन पक्षों सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच समान रूप से विभाजित किया जाए.

यह विवादास्पद मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले साल लोकसभा चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे को चुनावी माना जा रहा है. इसे साल 2019 में आम चुनावों के लिए बीजेपी के चुनावी विकल्पों में से एक के रूप में माना जा रहा है.

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