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टैक्स घटने पर ही बढ़ेगी ऑटो इंडस्ट्री की स्पीड

ऑटोमोबाइल उद्योग को यह उम्मीद है कि इस बजट में आसान टैक्स व्यवस्था को लागू करने की दिशा में कुछ कदम उठाए जाएंगे.

Updated On: Jan 13, 2017 09:03 PM IST

Sindhu Bhattacharya

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टैक्स घटने पर ही बढ़ेगी ऑटो इंडस्ट्री की स्पीड

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री जीएसटी के लागू होने पर बेहतर और आसान टैक्स व्यवस्था की उम्मीद कर रही है. अभी तक इस सेक्टर को कई तरह के उत्पाद शुल्क और अन्य तरह के टैक्स देने पड़ रहे हैं.

इससे इस उद्योग को कई तरह की मुश्किलों सामना करना पड़ता है. भारत के वाहन बाजार को 2017-18 के बजट से यह पहली उम्मीद है कि उसे इस पेचीदे टैक्स व्यवस्था से राहत मिलेगी.

इस उद्योग के जानकारों के मुताबिक गाड़ियों के आकार के अनुसार अभी पांच तरह का केंद्रीय उत्पाद शुल्क इस उद्योग को देना पड़ता है. इसके अलावा और भी कई तरह के टैक्स इस उद्योग पर लगता है. करीब 12 से 15 तरह के टैक्सों की वजह से गाड़ियों को खरीदने की प्रक्रिया बेवजह मुश्किल हो जाती है.

जीएसटी के लागू होने से ये अलग-अलग तरह के टैक्स खत्म हो जाएंगे और टैक्स व्यवस्था सिर्फ दो तरह की ही रहेगी. इससे ऑटोमोबाइल उद्योग को बहुत बड़ी राहत मिलेगी.

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ऑटोमोबाइल उद्योग को यह उम्मीद है कि इस बजट में आसान टैक्स व्यवस्था को लागू करने की दिशा में कुछ कदम उठाए जाएंगे.

दूसरा मुद्दा इस बजट के लिहाज से और अधिक खास है. कुछ कार निर्माताओं की छोटी कारों की परिभाषा को लेकर पुरानी शिकायत रही है. भारत में 4 मीटर की लंबी और 1200 सीसी की पेट्रोल इंजन या 1500 सीसी के डीजल इंजन वाली कारों को छोटी कारों की श्रेणी में रखा जाता है.

खत्म हो सकती है छोटे कारों की परिभाषा

इस उद्योग जगत के दिगज्जों का कहना है कि एक जापानी कार कंपनी ने सरकार से इस परिभाषा को खत्म करने की सिफारिश की है. इस परिभाषा की वजह से नई तकनीकों और सुरक्षा के मानकों को लागू करने में दिक्कत होती है.

पूरी दुनिया में उत्पाद शुल्क में छूट देने के लिए इस तरह की परिभाषा कहीं भी लागू नहीं है.

नोटबंदी के कारण पहले ही ऑटोमोबाइल उद्योग को काफी नुकसान हो चूका है. खासकर दुपहिया और यात्री वाहनों की बिक्री में काफी गिरावट आई है.

सियाम के मुताबिक नोटबंदी के बाद सभी तरह के वाहनों की बिक्री में 19 फीसदी की गिरावट आई है.

जीएसटी के लागू होने के बाद उम्मीद है कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र में तेजी आएगी.

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