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ईद से ज्यादा 'औरंगजेब' का इंतजार कर रहा था 15 साल का आसिम

जब इंतजार खत्म होने की बारी आई तो तोहफों की बजाय पूरे घर पर मातम छा गया क्योंकि ताबूत में रखकर शहीद औरंगजेब का शव आया था

Rituraj Tripathi Rituraj Tripathi Updated On: Jun 18, 2018 05:53 PM IST

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ईद से ज्यादा 'औरंगजेब' का इंतजार कर रहा था 15 साल का आसिम

पूरी दुनिया शनिवार को ईद का जश्न मना रही थी लेकिन एक घर ऐसा भी था जहां ईद से भी ज्यादा किसी शख्स का इंतजार किया जा रहा था. जम्मू-कश्मीर में रहने वाला 15 साल का आसिम कई महीनों से ईद का इंतजार कर रहा था क्योंकि उसका भाई औरंगजेब तोहफे लेकर आने वाला था.

आसिम के दोस्त कहते थे कि उसे ईद का कम और औरंगजेब का इंतजार ज्यादा है लेकिन जब इंतजार खत्म होने की बारी आई तो तोहफों की बजाय पूरे घर पर मातम छा गया क्योंकि ताबूत में रखकर शहीद औरंगजेब का शव आया था.

आसिम को अब तोहफे नहीं चाहिए, उसे केवल अपना भाई वापस चाहिए. आसिम ने बताया, 'औरंगजेब ने वादा किया था कि वह नए कपड़े, गिफ्ट और क्रिकेट बैट लेकर आएगा. लेकिन इस बार जब वो घर लौटा तो उसने मुझे गले भी नहीं लगाया. वह ताबूत में था, मुझे अब कोई गिफ्ट नहीं चाहिए, बस मेरा भाई मुझे लौटा दो.'

आसिम ने अपने भाई औरंगजेब से उस वक्त भी बात की थी जब आतंकी उसका अपहरण कर रहे थे. आसिम ने कहा, 'औरंगजेब का अपहरण उस वक्त किया गया जब वह पुंछ आ रहा था, मैंने फोन पर आवाजें सुनी थी, कोई उसे रोक रहा था. मुझे लगा कि औरंगजेब को किसी चेक पोस्ट पर रोका जा रहा है. मैं नहीं जानता था कि आतंकी मेरे भाई का अपहरण कर रहे हैं.'

आतंकियों ने गले और सिर में मारी थीं गोलियांaurangzeb1

आसिम से बात करने के कुछ घंटे बाद औरंगजेब की गोलियों से छलनी लाश गुस्सु गांव में मिली जोकि अपहरण की गई जगह से 10 किलोमीटर दूर है. आतंकियों ने उसके गले और सिर में गोली मारी थी. शुक्रवार को वायरल हुए वीडियो में पता लगा कि औरंगजेब को गोली मारने से पहले हिजबुल के आतंकियों ने उससे घाटी में चल रहे सैन्य ऑपरेशंस के बारे में पूछताछ की थी.

शनिवार को पूरे सम्मान के साथ औरंगजेब को दफना दिया गया. हजारों लोगों की भीड़ उसे अलविदा कहने आई थी लेकिन औरंगजेब का परिवार अब न्याय चाहता है. उन्होंने केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार से अपील की है कि घाटी से जल्द से जल्द आतंकवाद का सफाया किया जाए.

औरंगजेब के पिता मोहम्मद हनीफ ने कहा, 'पीएम मोदी और सेना को उनके बेटे की मौत का बदला लेना होगा, मैं पीएम मोदी को 72 घंटे का समय देता हूं, मुझे मेरे बेटे की मौत का बदला चाहिए, अगर ऐसा नहीं होता तो वह खुद बदला लेने के लिए तैयार हैं. कश्मीर हमारा है और हम कश्मीर को जलने नहीं देंगे.'

बता दें कि मोहम्मद हनीफ जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री में सिपाही थे और अब औरंगजेब का छोटा भाई आसिम भी भारतीय सेना में शामिल होना चाहता है. आसिम ने कहा, 'मैं भी अपने पिता और भाई की तरह सेना में जाऊंगा.'

आखिर कौन था औरंगजेबaurangzeb3

24 साल का औरंगजेब भारतीय सेना का जवान था, पिछले हफ्ते आतंकवादियों ने उसका अपहरण कर लिया था और कुछ सवाल पूछने के बाद गोली मार दी थी. औरंगजेब जम्मू-कश्मीर से था और शोपियां में 44 राष्ट्रीय रायफल्स कैंप शादीमार्ग पर पोस्टेट था.

उसका अपहरण उस वक्त हुआ जब वह प्राइवेट वाहन से अपने घर जा रहा था. जब वह कलामपोरा पहुंचा तो आतंकियों ने उसके वाहन को रास्ते में रोक लिया और उसे अपने साथ ले गए. औरंगजेब मेजर रोहित शुक्ला की टीम का हिस्सा था और उसने हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी समीर टाइगर को मौत के घाट उतारने में अहम रोल निभाया था.

बता दें कि भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने आज औरंगजेब के परिवार से पुंछ में मुलाकात की है. यह मुलाकात केंद्र सरकार के उस फैसले के बाद हुई है जिसमें रमजान के महीने में सीजफायर के उल्लंघन वाले फैसले का विस्तार न करने की बात कही गई है.

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