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औरंगाबाद नक्सली हमला: नोटबंदी के समय बीजेपी नेता से हुए 7 करोड़ की डील का परिणाम?

माओवादियों में इलाके पोस्टर लगाकर इस बात की घोषणा की है. पुलिस जांच कर रही है

Updated On: Dec 31, 2018 04:29 PM IST

FP Staff

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औरंगाबाद नक्सली हमला: नोटबंदी के समय बीजेपी नेता से हुए 7 करोड़ की डील का परिणाम?

नक्सलियों ने बिहार के बीजेपी विधायक राजन कुमार सिंह और उनके चाचा को नोटबंदी के समय नोट बदलवाने के लिए 7 करोड़ रुपये दे दिए थे. और राजन कुमार के चाचा की हत्या करने के बाद औरंगाबाद की सड़कों पर चिपके पोस्टरों में दावा किया गया है कि हालांकि, उन्हें ये पैसे कभी वापस नहीं मिले.

कोलकाता के एक दैनिक अखबार ने पोस्टर के हवाले से कहा, 'राजन सिंह को पुराने करेंसी नोटों में 5 करोड़ रुपए वापस करने चाहिए. सीपीआई (माओवादी) ने उन्हें ये नोट नए नोटों से बदलने के लिए दिए थे. साथ ही उसके 2 करोड़ रुपए के बकाए का भी भुगतान किया.'

माओवादियों ने बीजेपी के एमएलसी के चाचा 55 वर्षीय नरेंद्र सिंह की हत्या कर दी और शनिवार रात जिले के सुदी बिगहा गांव में एक घर और 10 वाहनों को आग लगा दी. माओवादी हमले की जानकारी मिलने के बाद, सुरक्षा बल गांव पहुंचे और नक्सलियों के साथ गोलीबारी शुरु कर दी. इससे डरकर नक्सली मौके से भाग गए. एसपी ने कहा कि पुलिस ने इलाके में घेरा बंदी कर दी है और बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया है.

न्यूज18 के मुताबिक इलाके में राजन की कंस्ट्रक्शन कंपनी है जो क्षेत्र में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में लगी हुई थी. और हो सकता है कि उन्होंने नक्सलियों को 2 करोड़ रुपए रंगदारी भी दिया हो. ये तब की बात होगी जब क्षेत्र में माओवादियों का बोलबाला था. अब स्थिति बदलने के बाद राजन ने माओवादियों को पैसे देने बंद कर दिए होंगे.

दावों की पुष्टि के नहीं हैं सबूत:

पुलिस के पास राजन के बारे में माओवादी के दावों को सत्यापित करने के लिए अभी सबूत नहीं हैं. माओवादियों का ये दावा कि उन्होंने 5 करोड़ रुपए के पुराने करेंसी नोटों को बदलने के लिए दिया था और राजन और उनके चाचा ने उसे ले लिया था. अगर ये बात साबित हो जाती है तो फिर कई कानूनों के उल्लंघन का मामला दर्ज होगा.

इस बीच, बीजेपी एमएलसी ने हमले के लिए पुलिस और राज्य सरकार को 'जिम्मेदार' ठहराया. उन्होंने कहा 'गांव में नक्सली हमला प्रशासन और राज्य सरकार दोनों की गलतियों का परिणाम है. मैंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डीजीपी को एक पुलिस स्टेशन या गांव में कम से कम पुलिस चौकी स्थापित करने के लिए एक आवेदन दिया था. लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. इस घटना के लिए प्रशासन और राज्य सरकार जिम्मेदार हैं.'

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