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क्रिश्चियन मिशेल ने कैसे कराई थी अगस्ता वेस्टलैंड डील, पढ़िए पूरी कहानी

सूत्रों ने बताया कि, 'क्रिश्चियन मिशेल भारत में कई लोगों के जरिए अपना धंधा चला रहा था. मजे की बात ये है कि उसके कर्मचारी बार-बार दिल्ली आते थे

Updated On: Dec 06, 2018 01:58 PM IST

Yatish Yadav

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क्रिश्चियन मिशेल ने कैसे कराई थी अगस्ता वेस्टलैंड डील, पढ़िए पूरी कहानी

ये बात 3 मार्च 2002 की है. एक दुबला सा, दाढ़ी रखे हुए, मगर चमकती आंखों वाला ब्रिटिश नागरिक दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के एंट्री गेट पर दिखा. इस ब्रिटिश नागरिक को एक नाटे कद का भारतीय युवक अपने साथ एक ऑगस्टासफेद रंग की कार की तरफ ले गया. इस भारतीय ने कारोबारी सूट पहना हुआ था. जैसे ही कार ने रफ्तार पकड़ी, दोनों मुसाफिरों के बीच गर्मा-गर्म चर्चा शुरू हो गई.

कुछ ही दिन पहले भारत सरकार ने हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए पूरी दुनिया की कंपनियों को रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी RFP जारी किया था. इसमें शर्त ये थी कि हेलीकॉप्टर 6000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकता हो. इस शर्त की वजह से अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर इस फरोख्त की रेस में शामिल नहीं हो सकता था. उस दिन जो ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल भारत आया था, वो अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी का सलाहकार था. वो उस शाम अच्छे मूड में नहीं था. अगले कुछ दिनों तक उसने बड़े और पहुंच वाले लोगों के साथ बैठकें कीं. 5 मार्च 2002 को क्रिश्चियन मिशेल लंदन रवाना हो गया.

ये चौंकाने वाली बात नहीं हैं कि उसके बात बड़ी गुपचुप गतिविधियां हुईं और भारत सरकार का हेलीकॉप्टर खरीद का प्रस्ताव अनजान गहराई में गोते लगाने लगा. फैसला लेने वालों के बीच गर्मागर्म परिचर्चा और सलाह-मशविरे के बाद 2003 के शुरुआती दिनों में हेलीकॉप्टर खरीदने का नया आरएफपी जारी किया गया. एक बार फिर मिशेल और अगस्ता वेस्टलैंड का बड़ा अधिकारी ब्रूनो स्पैगनोलिनी, दोनों साथ भारत आए. हालांकि भारत प्रवास में दोनों ने किस-किस से मुलाकात की, ये अटकलों की बात है.  मगर, ये दोनों विदेशी नागरिक करीब एक हफ्ते दिल्ली में ठहरने के बाद 6 फरवरी 2003 को अपने देश लौट गए.

सौदे की रेस में कैसे शामिल हुई अगस्ता वेस्टलैंड ?

मिशेल एक बार फिर 2 नवंबर 2003 को भारत आया. इस बार वो अकेले भारत आया था. 19 नवंबर 2003 को उस वक्त के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा ने वीवीआईपी के लिए हेलीकॉप्टर खरीदने पर विचार करने के लिए उच्च स्तरीय बैठक ली. इस बैठक में ब्रजेश मिश्रा ने कहा कि हेलीकॉप्टर के 6000 मीटर तक की ऊंचाई तक उड़ान भरने की क्षमता की शर्त रखने की वजह से हेलीकॉप्टर सौदे की रेस में केवल एक कंपनी ही भाग ले सकती है. ब्रजेश मिश्रा ने इस बैठक में ये भी कहा कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बिरले ही ऐसी जगहों पर जाते हैं, जहां उन्हें 4500 मीटर से ऊपर की उड़ान भरनी पड़ती हो. इस बैठक में तय ये हुआ कि हेलीकॉप्टर सौदे के लिए न्यूनतम ऊंचाई तक उड़ान की शर्त 4500 मीटर कर दी जाए.

AgustaWestland-chopper

इससे ऊंची यानी 6000 मीटर तक उड़ान भरने की क्षमता और हेलीकॉप्टर की कैबिनेट 1.8 मीटर रखने को अनिवार्य न बनाकर वैकल्पिक शर्त के तौर पर रखा जाए. कहा ये जाता है कि हेलीकॉप्टर सौदे की शर्तों में इन बदलावों के बाद कई और हेलीकॉप्टर भी इस सौदे की रेस में शामिल हो गए, जो पहले की दो शर्तें नहीं पूरी कर पा रहे थे, जबकि बाक़ी शर्तों के हिसाब से उनके हेलीकॉप्टर ठीक थे. ऊंचाई वाली शर्त की वजह से ही ऐसी कंपनियों की बोलियों को निरस्त कर दिया गया था. लेकिन, अब वो सौदे की रेस में फिर से शामिल कर लिए गए. कुल मिलाकर कहें तो, हेलीकॉप्टर खरीद की शर्त में इस बदलाव के बाद अगस्ता वेस्टलैंड भी इस सौदे की रेस में शामिल हो गई.

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उधर, रक्षा मंत्रालय में ब्रजेश मिश्रा की बैठक के मायनों पर चर्चा हो रही थी, तभी क्रिश्चियन मिशेल 28 नवंबर 2003 को भारत पहुंचा. उसने सरकार और सियासी हलकों में अपने कई संपर्कों से मुलाकात की. वो 15 दिसंबर 2003 को लंदन वापस चला गया. एक हफ्ते बाद, यानी 22 दिसंबर 2003 को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा ने वायुसेना अध्यक्ष को एक चिट्ठी लिखी. इसमें मिश्रा ने इस बात पर अफसोस जताया कि जब हेलीकॉप्टर सौदे की अनिवार्य शर्तें तय की जा रही थीं, तो न ही प्रधानमंत्री कार्यालय और न ही एसपीजी से कोई सलाह-मशविरा किया गया.

ब्रजेश मिश्रा ने सुझाव दिया कि इस सौदे से जुड़े सभी पक्ष एक बार फिर से आपस में बातचीत कर लें, ताकि हेलीकॉप्टर खरीद की ऐसी शर्तें तय की जा सकें, जो व्यवहारिक हों. जो हेलीकॉप्टर को वीवीआईपी उड़ान के लिए मुफीद बनाएं, उन्हें उड़ाने, उनकी सुरक्षा और सुविधा का खयाल रखें. साथ ही इस सौदे को जल्द से जल्द निपटाने का रास्ता भी साफ हो सके.

2004 में हेलीकॉप्टर सौदे की रफ्तार में कोई तेजी नहीं आई. वहीं निजी तौर पर क्रिश्चियन मिशेल को कई झटके लगे. मिशेल के पिता की कंपनी एंटेरा कॉर्पोरेशन ब्रिटेन में दिवालिया हो गई. साथ ही क्रिश्चियन मिशेल के कारोबार करने पर सात साल के लिए रोक लगा दी गई. तभी, क्रिश्चियन मिशेल ने दुबई को अपने कारोबार का अड्डा बनाया. उसने ग्लोबल सर्विसेज़ एफज़ेडई नाम की कंपनी बनाई. वहीं भारत में हेलीकॉप्टर सौदे को आगे बढ़ाने में एक साल से ज्यादा का वक्त लग गया. भारतीय वायुसेना, प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्रालय के बीच मार्च से लेकर सितंबर 2005 तक सलाह-मशविरे चले. तब जाकर हेलीकॉप्टर खरीदने के सौदे की अनिवार्य शर्तें तय हो सकीं.

AgustaWestland

क्रिश्चियन मिशेल मार्च 2005 में भारत आया था. इसके बाद 3 जनवरी 2006 तक वो 11 दफे भारत आया. इसी दिन रक्षा खरीद परिषद ने हेलीकॉप्टर सौदे के प्रस्ताव को मंजूरी दी. कई बैठकों में एक और दलाल गाइडो हशिके भी मौजूद था. सूत्रों ने इस बात की तस्दीक की है कि गाइडो हशिके 2005 में पांच बार भारत आया था. बाद में हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए 6 कंपनियों को 27 सितंबर 2006 को आरएफपी जारी किए गए. हेलीकॉप्टरों की खरीद के फील्ड ट्रायल खत्म होने से कुछ ही दिन पहले, मिशेल ने गाइडो हशिके को दिल्ली भेजा था. ये बात फरवरी 2008 की है. जब फील्ड ट्रायल की रिपोर्ट अप्रैल में सरकार को सौंपी गई, तो गाइडो हशिके, मिशेल के नुमाइंदे के तौर पर दिल्ली में ही था.

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सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही अगस्ता हेलीकॉप्टरों की खरीद को हरी झंडी दी गई, तो दलालों ने जर्मनी के शहर म्यूनिख में एक बैठक की. इस के बाद मिशेल की कंपनी ग्लोबल सर्विसेज़ एफजेडई ने ब्रिटेन में उसी वक्त एक सहयोगी कंपनी खोली. ये ठीक उसी वक्त हुआ जब रक्षा मंत्रालय, हेलीकॉप्टर खरीद की आखिरी सौदेबाजी कर रहा था. इस बार भी क्रिश्चियन मिशेल दूर ही रहा. पिर से गाइडो हशिके को इस सौदे की शर्तों पर मोलभाव के लिए भेजा गया. वो 20 जनवरी 2010 को भारत आया. इससे दो दिन पहले ही सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने 18 जनवरी 2010 को इस सौदे को मंजूरी दी थी.

8 फरवरी 2010 को हेलीकॉप्टर खरीदने के सौदे पर दस्तखत से एक दिन पहले मिशेल ने गाइडो हसिके को दो हफ्ते के लिए दिल्ली भेजा था. सूत्र बताते हैं कि हशिके 21 फरवरी को भारत से रवाना हुआ. इससे पहले के दो हफ्तों में हशिके ने कई अहम अधिकारियों से मुलाकातें कीं.

भारत में कई लोगों के जरिए धंधा चला रहा था मिशेल

सूत्रों ने बताया कि, 'क्रिश्चियन मिशेल भारत में कई लोगों के जरिए अपना धंधा चला रहा था. मजे की बात ये है कि उसके कर्मचारी बार-बार दिल्ली आते थे. इसके बाद वो दुबाई जाते थे. शायद वो मिशेल को सौदे का अपडेट दिया करते थे. ऐसा लगता है कि गाइडो हशिके और क्रिस्टीन स्प्लीड के साथ कुछ भारतीय मूल के लोग, क्रिश्चियन मिशेल के भरोसेमंद लोगों में से थे.' गाइडो हशिके स्विटजरलैंड का कारोबारी है. भारतीय एजेंसियों को उसकी तलाश है. वो लुगानो में रहता है. हशिके के पास इटली और अमेरिका की दोहरी नागरिकता है. हशिके कई देशों में काम करने वाली वित्तीय और सलाहकार कंपनियों के लिए काम करता है. इस काम में कार्लो गेरोसा उसका साथी है. वो इटली मूल का स्विस नागरिक है.

मिशेल का टीवी ग्रैब

मिशेल का टीवी ग्रैब

गेरोसा और हशिके का जिक्र, इस सौदे की जांच से जुड़े दस्तावेजों में बार-बार आया है. ये वो दलाल थे, जिन्होंने अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी से पैसे लेकर, ये रकम ट्यूनिशिया और मॉरिशस के रास्ते आईडीएस इंडिया और एरोमैट्रिक्स सॉल्यूशन्सस जैसी भारतीय कंपनियों तक पहुंचाई. जब हेलीकॉप्टर खरीद में घोटाला सामने आया, तो क्रिश्चियन मिशेल की भरोसमंद सहयोगी क्रिस्टीन स्पलीड 30 दिसंबर 2012 को आखिरी बार भारत आई. वो एयर इंडिया की उड़ान से लंदन के रास्ते भारत पहुंची थी.

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जब इटली में इस सौदे के दलालों के खिलाफ जांच शुरू हुई, तो क्रिश्टीन स्प्लीड और क्रिश्चियन मिशेल की कई कंपनियां बंद हो गईं. इस सौदे की दलाली में भारतीय मूल के दो लोगों का क्या रोल था, ये तो पता नहीं. लेकिन, अब मिशेल हिरासत में है. जांच अधिकारियों को भरोसा है कि क्रिश्चिय मिशेल से उन्हें इस घोटाले में दूसरे लोगों के रोल के बारे में पता चल सकेगा.

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