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अगस्ता वेस्टलैंड केस: कार्लोस गेरोसा की गिरफ्तारी से कुछ लोगों की नींद क्यों गायब है?

बिचौलिये कार्लोस गेरोसा की गिरफ्तारी के बाद इस घोटाले का भूत एक बार फिर से भारतीय राजनीति के आकाश में मंडराने वाला है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Oct 05, 2017 05:18 PM IST

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अगस्ता वेस्टलैंड केस: कार्लोस गेरोसा की गिरफ्तारी से कुछ लोगों की नींद क्यों गायब है?

ब्रिटेन की कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से 3 हजार 767 करोड़ रुपए की लागत से खरीदे गए 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टर रिश्वतकांड में भारतीय जांच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. इस सौदे में तीन यूरोपीय बिचौलियों में से एक कार्लोस गेरोसा को इंटरपोल ने इटली में गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी भारतीय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अपील पर हुई है.

आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि गेरोसा के प्रत्यर्पण को लेकर भारत के कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं. इस साल की शुरुआत में ही सीबीआई ने 3 हजार 767 करोड़ रुपए के वीवीआईपी हेलिकॉप्टर डील मामले में वायुसेना के पूर्व प्रमुख एस.पी. त्यागी सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया था. फिलहाल तीनों ही कोर्ट से जमानत पर हाल ही में रिहा हुए हैं.

पूर्व वायुसेना प्रमुख एस.पी. त्यागी की गिरफ्तारी से इस बात के संकेत मिले थे कि मोदी सरकार आनेवाले दिनों तेजी से कार्रवाई करना चाहती है. देश के इतिहास में पहली बार कोई पूर्व या वर्तमान वायुसेना प्रमुख को गिरफ्तार किया गया था.

फोटो. विकीमीडिया

अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाले के मामले में इटली के मिलान शहर की अदालत ने कंपनी के दो अधिकारियों को घूस देने का दोषी पाया था. इटली की अदालत के फैसले के बाद ही भारत में सीबीआई ने यूपीए सरकार के समय केस दर्ज कर इस केस की जांच शुरू की थी.

इटली की अदालत में सबूतों के आधार पर यह साबित हुआ था कि भारत को बेचे गए 12 अगस्ता हेलिकॉप्टर सौदे में 7 करोड़ यूरो की राशि (लगभग 3 हजार 767 करोड़) घूस दी गई है.

दिलचस्प बात यह है कि इटली में रिश्वत देनेवाले को तो सजा मिल गई. लेकिन भारत में लेने वालों की पहचान करने में सीबीआई को खाक छाननी पड़ रही है. सीबीआई पिछले कई सालों से इस केस की जांच कर रही है.

इस हेलिकॉप्टर घोटाले के तार वाजपेयी सरकार से लेकर मनमोहन सरकार तक जुड़े हैं. सौदे को अंतिम रूप मनमोहन सरकार के दौरान दिया गया था. जबकि इसकी शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय ही हो गई थी.

इटली की अदालत से सीबीआई को डेढ़ लाख पेज के दस्तावेज मिले हैं. इन कागजातों से साफ होता है कि इस घोटाले के तहत भारत में नेताओं, सेना और रक्षा मंत्रालय के अफसरों और पूर्व वायुसेना प्रमुख एस.पी. त्यागी के परिवारवालों को घूस दी गई थी.

सीबीआई को एक डायरी भी हाथ लगी है, जिसमें अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी की ओर से दी गई रिश्वत का पूरा ब्योरा है. डायरी में कथित तौर से कांग्रेस के कुछ नेताओं के नाम लिखे गए हैं.

सीबीआई को जो दस्तावेज मिले हैं उसमें पैसों का लेन-देन कोर्ड वर्ड के जरिए होने की बात सामने आई है. सौदे में शामिल विदेशी दलालों से मिले कागजात में एम, एफएएम, पीओएल और बीयूआर कोड वर्ड लिखे हैं.

cbi headquarter

मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए ये बात आती रही है कि सीबीआई इन कोड वर्ड्स को अहमद पटेल, त्यागी परिवार, दूसरे राजनेताओं और नौकरशाहों की तरफ इशारा मान रही है.

इस मुद्दे पर अहमद पटेल ने कुछ महीने पहले बयान भी दिया था कि यदि उनके खिलाफ कोई आरोप साबित हो जाए, तो वह राज्यसभा और सार्वजनिक जीवन को छोड़ देंगे.

भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि भारत में इस घोटाले की जांच को रोकने के लिए कोई अदृश्य ताकत हाई लेवल पर सक्रिय थी. उन्होंने यह बात इटली की अदालत का फैसला आने के बाद कहा था. जाहिर है उनका इशारा कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की तरफ था.

दूसरी तरफ डायरी में कोर्ड वर्ड में लिखे नामों पर कानून के जानकारों की राय अलग है. कानून के जानकारों का कहना है कि यह एक विशुद्ध राजनीतिक ड्रामेबाजी है. इससे सीबीआई या ईडी को कुछ हासिल नहीं होने वाला है.

सीबीआई की कार्यप्रणाली को करीब से जानने वाले कहते हैं कि इस डायरी का हाल भी जैन हवाला डायरी जैसा ही होने वाला है. सीबीआई में पब्लिक प्रोसिक्यूटर रह चुके वरिष्ठ वकील एमपी सिंह कहते हैं, 'जैन हवाला डायरी मामला देश के लिए और सीबीआई के लिए एक नजीर है'.

वो आगे कहते हैं कि 'हवाला मुकदमे में भी एक डायरी सामने आई थी. जिसमें लालकृष्ण आडवाणी, मदन लाल खुराना, शरद यादव और चौधरी देवीलाल के नाम शामिल थे. नतीजा यह हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सभी नेताओं को हवाला मामले से बरी कर दिया.'

Supreme Court Of india

एमपी सिंह के मुताबिक उनके पास एक डायरी है. जिसमें वो सीधे-सीधे किसी का नाम और उसका पूरा पता लिखे होने की बात का जिक्र करते हैं. लेकिन अदालत में ये कैसे साबित किया जाएगा कि किसी आदमी को 25 लाख या 50 लाख रुपए दिए गए हैं. जब हमारे पास लेनदेन की डिटेल नहीं हैं.

उनका कहना है कि अगस्ता वेस्टलैंड केस की डायरी में तो कोर्ड वर्ड में नाम लिखे हैं. जबकि जैन हवाला डायरी में तो पूरा नाम और रकम लिखी हुई थी. डायरी में नाम या रकम लिखते समय उस आदमी की मानसिक स्थिति क्या थी? कोर्ट इस पहलू पर भी ध्यान देती है.’

इस सब के बावजूद सीबीआई अब यह पता लगाना चाह रही है कि भारतीय रक्षा दलालों ने किन-किन राजनेताओं और नौकरशाहों को घूस का दिया है.

इस केस की जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, पिछले साल ही ईडी ने कार्लोस गेरोसा की गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल से मदद मांगी थी. इंटरपोल ने भारतीय जांच एजेंसियों को जानकारी दी है कि 70 साल के कार्लोस गेरोसा को इटली में गिरफ्तार किया गया है. भारत ने इटली सरकार से गेरोसा के प्रत्यर्पण के लिए आधिकारिक पत्र भेज दिया है. उम्मीद है बहुत जल्द गेरोसा भारत आ जाएगा.

भारत की दो एजेंसियां ईडी और सीबीआई मिल कर अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे की जांच कर रहा है. गेरोसा की गिरफ्तारी से उन राज से पर्दा उठेगा जो पिछले कई सालों से राजनेताओं और अफसरशाही के गठजोड़ में दफन है. अगस्ता वेस्टलैंड मामले में तीन भगौड़े बिचौलियों में से कार्लोस गेरोसा एक है.

बिचौलिये कार्लोस गेरोसा की गिरफ्तारी के बाद इस घोटाले का भूत एक बार फिर से भारतीय राजनीति के आकाश में मंडराने वाला है.

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