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अगस्ता वेस्टलैंड: बस एसपी त्यागी पर ही हाथ क्यों, नेता और अधिकारी आजाद क्यों?

सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने पूर्व एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी को अगस्ता वेस्टलैंड केस में जमानत देते हुए सीबीआई को कड़ा तमाचा मारा है.

Updated On: Sep 19, 2018 09:33 AM IST

Prakash Katoch

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अगस्ता वेस्टलैंड: बस एसपी त्यागी पर ही हाथ क्यों, नेता और अधिकारी आजाद क्यों?

ये बेहद दिलचस्प है कि सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने पूर्व एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी को अगस्ता वेस्टलैंड केस में जमानत देते हुए सीबीआई को एक तरह से कड़ा तमाचा मारा है.

सीबीआई ने एसपी त्यागी को अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे में गैरकानूनी तौर पर पैसे लेने का आरोप लगाया था, पर स्पेशल कोर्ट के अनुसार सीबीआई चार साल की जांच के बाद भी ये साबित करने में असफल रही कि एसपी त्यागी को ये पैसे कब और कैसे दिए गए.

स्पेशल जज अरविंद कुमार ने इस बात पर भी इशारा किया कि त्यागी की जिन संपत्तियों का संबंध, कथित तौर पर जिस गैरकानूनी लेनेदेन से जोड़ा गया था उसकी पिछले साढ़े तीन सालों में कोई तहकीकात नहीं की गई थी. जबकि सीबीआई ने उनकी संपत्तियों से जुड़े कागजात 2013 में ही जब्त कर लिए थे, लगभग तीन साल 9 महीने पहले.

इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि सीबीआई को त्यागी की कस्टडी चार दिनों के लिए दी गई थी, लेकिन ब्यूरो ने उसे बाद में बढ़ा लिया था. इस पर सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने ये टिप्पणी दी:

1.एसपी त्यागी साल 2007 में रिटायर हुए और सीबीआई की इस सोच में दम नहीं लगता कि उन्होंने इस मामले के गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की.

2. मौजूदा मामला दस्तावेजों पर आधारित है.

3. इस मामले के आरोपियों को जब भी बुलाया गया वे जांच में शामिल हुए और उन्हें कस्टडी में लेकर पूछताछ भी की गई है.

ये आरोप कि उन्होंने रिश्वत ली थी या फिर इस घोटाले की साजिश में शामिल थे इसका पता मुकदमे की जांच के दौरान ही पता चल सकेगा. स्पेशल कोर्ट के अनुसार, एसपी त्यागी को 18 दिनों के लिए कस्टडी में रखा जा चुका है और इससे किसी को कोई फायदा नहीं होने वाला है.

सीबीआई के वकील और एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने त्यागी की जमानत याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए दलील दी कि उनके हाथ त्यागी के खिलाफ नए सबूत लगे हैं.

लेकिन सवाल ये है कि आखिर इस नए सबूत को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के साथ साझा क्यों नहीं किया गया. या फिर, अभी सिर्फ इस बात की उम्मीद ही की जा रही है कि इटली की कोर्ट में जब ये केस दोबारा खोला जाएगा तब इस मामले में नए सबूत सामने आएंगे.

फोटो. विकीमीडिया

एसपी त्यागी पर अगस्ता वेस्टलैंड सौदे में रिश्वत लेने का आरोप है

बिना सबूत जेल में क्यों डाला

तो फिर सवाल ये है कि अगर सीबीआई के पास त्यागी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे तो फिर उन्हें गिरफ्तार कर के 18 दिन जेल में क्यों रखा गया था?

क्या ये पूरी कवायद एक नकली भूकंप की चेतावनी थी, जो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के संसद में भूचाल लाने की धमकी के जवाब में दी गई थी?

कितने शर्म की बात है कि इटली की कोर्ट के मजबूत साथ के बाद भी, जिन्होंने एक तरह ये केस प्लेट में सजाकर भारत सरकार को सौंपी है, इस मामले में अब तक सिर्फ एसपी त्यागी और दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ की गई है. जबकि, इसमें आरोपी माने जा रहे अन्य लोग जिनमें कुछ प्रशासनिक अधिकारी, नेता और तत्कालीन एसपीजी निदेशक से अब तक पूछताछ नहीं की गई है.

जैसा कि किसी ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘जरा सोच कर देखिए उन सारे अन्य घोटालों से जुड़े मामलों का क्या होगा जो सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट के हाथ में है और उन मामलों में कोई बाहरी कोर्ट की मदद न हासिल हो- जाहिर है असल मुजरिम बड़ी आसानी से आजाद घूमेंगे.’

अगस्ता वेस्टलैंड जांच के दौरान सामने आये कुछ तथ्यों को नजरअंदाज करना बहुत मुश्किल है:

- जिन हेलिकॉप्टरों से जुड़ा ये मामला है उसकी जरूरत एसपीजी को वीवीआईपी गेस्ट को लाने ले जाने के लिए थी.

- पीएमओ ने उन हेलिकॉप्टरों की संख्या 8 से बढ़ाकर 12 कर दी थी.

- इंडियन एयरफोर्स ने 1988 से ही ये कह दिया था कि इन हेलिकॉप्टरों की सर्विस सीलिंग कम से कम 6000 मीटर तक होनी जरूरी है, तभी उनका बॉर्डर क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा सकेगा. इस बात की तस्दीक सुरक्षा सचिव ने भी साल 2004 में कर दी थी.

- मार्च 2005 में एनएसए एक निर्देश जारी कर कहा था कि, पीएमओ और एसपीजी की संयुक्त सलाह के बाद इसकी फ्रेश सप्लायर क्वालिटी जरुरत के बारे में बताया गया था.

- फिर मई 2005 में रक्षा सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक के बाद ये सर्विस सीलिंग को 6000 मीटर से घटाकर 4500 मीटर करने का फैसला किया गया. जिसे बाद में रक्षा मंत्री ने पास कर दिया और अगस्ता वेस्टलैंड-101 हेलिकॉप्टर की खरीद का रास्ता साफ हो गया. ये ए-डब्लू 101 हेलिकॉप्टर सिर्फ 4,572 मीटर की ऊंचाई तक ही उड़ सकते हैं.

- ये मुमकिन नहीं था कि त्यागी खुद से इन हेलिकॉप्टरों की फ्लाईंग सीलिंग की सीमा रक्षा मंत्रालय, एनएसए, एसपीजी और पीएमओ की मदद के बिना घटा लेते.

- एसपीजी के तत्कालीन निदेशक जो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ विदेश दौरे पर उनके साथ जाया करते थे, वे इन प्रतिनिधि हेलिकॉप्टरों की विदेशों में ट्रायल के दौरान वहां मौजूद थे. जिसके आधार पर ही अगस्ता वेस्टलैंड को आयात करने से जुड़े सौदे को हरी झंडी दी गई.

- इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले गाइडो हैश्चके की डायरी से पता चला कि इस डील से किन-किन लोगों को फायदा हुआ. उस हिसाब से ये तर्कसंगत ये होता कि अब तक उस समय के रक्षा-मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, रक्षा सचिव, एसपीजी निदेशक और पीएमओ व रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से त्यागी के साथ पूछताछ हो जानी चाहिए थी. लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा सका है.

- महत्वपूर्ण बात ये है कि 14 दिसंबर को हवाला कांड से जुड़े एक अन्य मामले में जो कि अप्रमाणित सबूतों और हवाला डीलरों के रिकॉर्ड या कॉरपोरेट डायरी पर आधारित है, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि इस आधार पर सजा छोड़ दीजिए जांच को आगे बढ़ाना भी मुश्किल है. तो क्या एसपी त्यागी को ऐसे ही हलके आरोपों के आधार पर गिरफ्तार नहीं कर लिया गया---जो किसी दलाल ने दी थी?

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एस पी त्यागी ने हमेशा कहा है कि उन्होंंने इस सौदे में कुछ भी गलत नहीं किया

प्रभावशालियों पर कार्रवाई

लाख टके का सवाल ये है कि क्या केंद्र सरकार के पास इतनी ताकत है कि वो इस मामले में उन लोगों पर हाथ डालने की हिम्मत जुटा पाएगी जो प्रभावशाली हैं.

साल 1993 में आयी एन एन वोहरा कमिटी रिपोर्ट ने सरकारी अफसरों, नेताओं और कई तरह के माफिया गुटों और अपराधियों के कई समूह के बीच एक तरह का अनैतिक रिश्ता होने और उनके कारण मसला पावर और मनी पावर को बढ़ावा देने की बात स्थापित करते हुए टिप्पणी की थी.

उन्होंने कहा था, ‘केंद्र और राज्य में ऐसे अपराध समूह, सरकारी अफसर और नेताओं के बीच के संबंधों को लेकर जो जानकारी बाहर आती है, उससे सरकारों के कामकाज में बुरा असर पड़ता है.’ इस रिपोर्ट की फिर दोबारा कभी जांच नहीं की गई.

आजादी के बाद से जितने भी रक्षा घोटाले हुए हैं उनमें आजतक कितने नेताओं और अफसरों की जांच हुई है, कितनों की गिरफ्तारी और कितनों को सजा?

हालांकि, इसकी शुरुआत का श्रेय 1948 के जीप घोटाले के साथ वी के कृष्ण मेनन को जाता है. ब्रिटेन के हाई कमिश्नर रहने के दौरान कृष्ण मेनन ने इंग्लैंड की एक कंपनी के साथ 200 जीप सप्लाई करने का समझौता किया था. ये समझौता सभी सरकारी नियमों को धता बताते हुए किए गए थे. इसमें सेना पर 80 लाख का खर्च आया था, लेकिन सिर्फ 155 जीपों की ही सप्लाई की गई थी.

ये केस 1955 में बंद कर दी गई थी और जवाहरलाल नेहरू ने कृष्ण मेनन को भारत का रक्षा मंत्री नियुक्त किया था. 1962 के इस कलंक के बावजूद, राजधानी दिल्ली के दिल में बसे लुटियंस जोन इलाके में एक सड़क का नाम वी के कृष्ण मेनन के नाम पर रखा गया है.

(ये लेख पूर्व में प्रकाशित हो चुका है. अगस्ता वेस्टलैंड के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल के प्रत्यर्पण की खबर आने के बाद हम इसे दोबारा प्रकाशित कर रहे हैं)

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