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मेक इन इंडिया इंपैक्ट: डिफेंस में हाथ आजमाने को तैयार इंडिया

टाटा ग्रुप ने लॉकहीड मार्टिन से किया समझौता, अब देश में बनेंगे फाइटर प्लेन

Updated On: Jun 21, 2017 10:45 AM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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मेक इन इंडिया इंपैक्ट: डिफेंस में हाथ आजमाने को तैयार इंडिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेक इन इंडिया को लेकर किस हद तक गंभीर है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अमेरिका दौरा होने के बावजूद उन्होंने यूएस के साथ होने वाली हेलिकॉप्टर डील रद्द कर दी.

24 जून को मोदी अमेरिका के दौरे पर जा रहे हैं. इससे चंद दिनों पहले ही उन्होंने यह डील इसलिए रद्द कर दी ताकि देश में ही ऐसे हेलिकॉप्टर बनाए जा सकें और मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया जा सके. भारतीय नौसेना के लिए 16 हेलिकॉप्टर खरीदने की यह डील तत्कालीन यूपीए सरकार ने साल 2009 में की थी.

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डिफेंस के मामले में भारत पूरी तरह विदेश पर निर्भर है. हमारे हथियार हों या लड़ाकू विमान देसी चीजों की कोई जगह नहीं है. लेकिन अब ऐसा नहीं रहेगा. रूस से बोफोर्स तोप, फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान और अमेरिका से हमारे ज्यादातर हथियार खरीदे जाते हैं.

लेकिन अब भारतीय डिफेंस के इतिहास में एक नया मोड़ आने वाला है. अब भारत में ही फाइटर जेट बनाया जाएगा. अमेरिका की दिग्गज डिफेंस कंपनी लॉकहीड मार्टिन और देश के टाटा ग्रुप ने एक समझौता किया है. इसके तहत भारत में 70 फाइटर प्लेन ‘एफ-16 ब्लॉक 70’ भारत में बनेंगे.

इस पहल से सरकार के मेड इन इंडिया मुहिम को बढ़ावा मिलेगा. हमारे रक्षा बजट का पूरा पैसा विदेश नहीं जाएगा. इसका एक हिस्सा देश में ही इस्तेमाल होगा. इससे देश में रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे.

भारत के लिए आत्मनिर्भर होना क्यों जरूरी?

पाकिस्तान और चीन से घिरा भारत सुरक्षा के मामले में कहीं पिछड़ न जाए, इसलिए भारत हर साल रक्षा बजट बढ़ाता रहा है. फिस्कल ईयर 2016-2017 में भारत का रक्षा बजट 24,9099 करोड़ रुपए था. वहीं, फिस्कल ईयर 2017-18 में इसे बढ़ाकर 262389.8 करोड़ रुपए कर दिया गया. लगातार बजट बढ़ाने के बावजूद ऐसे कई मौके आए जब हमें इस बात का अहसास हुआ है कि डिफेंस में पूरी तरह विदेश पर निर्भरता ठीक नहीं है.

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अगर हम अमेरिका के साथ रद्द किए डील का उदाहरण ही लें तो पता चलेगा कि विदेश से हथियार या फाइटर प्लेन खरीदना देश के लिए घाटे का सौदा है. यूपीए सरकार के दौरान भारतीय रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए अमेरिकी कंपनी सिकोर्स्की से 16 हेलिकॉप्टर खरीदने का सौदा किया था. लेकिन मोदी सरकार आने के बाद लगातार कंपनी पर दाम घटाने का दबाव बना रही थी. लेकिन कंपनी के पीछे ना हटने पर मोदी सरकार ने यह डील रद्द कर दी.

देश की सीमा के पुख्ता इंतजाम करना किसी भी देश की पहली प्राथमिकता है. ऐसे में देश के पास कंपनी को मुंहमांगी कीमत देने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता और कंपनी भी इसका पूरा फायदा उठाती है.

विदेश से डील करने पर बोफोर्स जैसे घोटाले के भी चांस ज्यादा रहते हैं. इस तरह की डील में ऑर्डर हासिल करने के लिए कंपनी सौदे में शामिल लोगों को प्रभावित करने की भी कोशिश करती है. देश में हेलिकॉप्टर और दूसरे हथियार विकसित होने से खर्च कम होता है और गुणवत्ता बरकरार रहती है.

नौकरी के मौके भी बढ़ेंगे

मेड इन इंडिया को बढ़ावा देने का एक सीधा फायदा रोजगार के तौर पर मिलेगा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच1बी1 वीजा कम करके भले ही आईटी सेक्टर में रोजगार को झटका दे दिया है. लेकिन अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन के साथ टाटा ग्रुप के समझौते के बाद टेक्सास से नौकरियां भारत आएंगी. अभी तक यह कंपनी असेंबलिंग का काम टेक्सास में कर रही थी.

हालांकि दोनों कंपनियां वहां भी अपना सेटअप बरकरार रखेंगी. इस डील पर दिल्ली और वॉशिगंटन के बीच सहमति बन गई है.  लेकिन अभी यह पक्का नहीं हो पाया है कि यहां से पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और दूसरे देशों में होने वाली सप्लाई पर क्या असर होगा.

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