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त्रिपुरा में सरकार का विरोध कर रहे 2000 किसानों की गिरफ्तारी

मजदूरों और किसानों के खिलाफ केंद्र सरकार के कथित हमलों के विरोध में लेफ्ट समर्थित गुटों ने अगरतला में विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था.

FP Staff Updated On: Aug 09, 2018 05:29 PM IST

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त्रिपुरा में सरकार का विरोध कर रहे 2000 किसानों की गिरफ्तारी

गुरूवार को त्रिपुरा में लगभग दो हजार किसानों को गिरफ्तारी कर लिया गया. ये किसान, किसानों और श्रमिकों पर केंद्र सरकार के कथित हमले के खिलाफ ग्यारह स्थानों पर 'सविनय अवज्ञा' आंदोलन कर रहे थे. इस विरोध प्रदर्शन को सात व्यापार संघों ने आयोजित किया था. आंदोलन आज देश के 450 जिलों में किशन मजदूर संयुक्त फोरम द्वारा आयोजित किया गया था. प्रदर्शन सुबह 10 बजे शुरू हुआ था और शाम के चार बजे तक चला.

सहायक इंस्पेक्टर जनरल स्मृति रंजन दास ने कहा कि विभिन्न जिलों से 1,950 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. साथ ही उन्होंने कहा कि अगरतला में एक विरोध सभा को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पानी के फव्वारों का भी इस्तेमाल किया गया. हालांकि, अखिल भारतीय कृषि सभा (एआईकेएस) के राज्य सचिव नारायण कर ने पीड़ितों पर भाजपा समर्थकों द्वारा भारी हिंसा का आरोप लगाया. कर का यह भी दावा है कि पुलिस ने अगरतला के पाराडाइज चौमुहानी में आंदोलन का हिस्सा बनने आए पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार सहित अन्य लोगों पर आंसू गैस के गोले और पानी की बौछार की.

सत्तापक्ष और विपक्ष का आरोप- प्रत्यारोप:

त्रिपुरा विधानसभा के पूर्व उप सभापति पबित्रा कर ने कहा कि रैली को रोकने के लिए पूरे अगरतला शहर को युद्ध जैसी स्थिति में बदल दिया गया था और भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा लेफ्ट समर्थकों के आंदोलन में शामिल होने से रोकने की कोशिश भी की गई. हालांकि बीजेपी प्रवक्ता मृणाल कांती देब ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि लेफ्ट पार्टियां राजनीतिक लाभ लेने के मकसद से स्थिति को सनसनीखेज बनाने की कोशिश कर रही हैं.

प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प में दो पुलिस वाले भी घायल हो गए हैं. अखिल भारतीय कृषक सभा, अखिल भारतीय खेत मजदूर संघ, त्रिपुरा उपजाति गण मुक्ति परिषद, किसान सभा (अजय भवन), संयुक्त किसान सभा, अग्रगामी किसान सभा और अखिल भारतीय किसान महासभा ने त्रिपुरा में विरोध प्रदर्शन किया. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, क्रांतिकारी सोशलिस्ट पार्टी, अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) सहित सभी लेफ्ट पार्टियां इस आंदोलन में शामिल हुईं.

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