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असम NRC: SC ने ड्राफ्ट से छूटे व्यक्तियों के दावे स्वीकार करने का दिया आदेश

जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आरएफ नरीमन की पीठ ने कहा कि यह प्रक्रिया 25 सितंबर से शुरू होगी और अगले 60 दिन तक चलेगी

Updated On: Sep 19, 2018 06:10 PM IST

Bhasha

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असम NRC: SC ने ड्राफ्ट से छूटे व्यक्तियों के दावे स्वीकार करने का दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के मसौदे (ड्राफ्ट) से बाहर रह गए करीब 40 लाख व्यक्तियों के दावे और आपत्तियां स्वीकार करने का काम शुरू करने का बुधवार को आदेश दिया. जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आरएफ नरीमन की पीठ ने कहा कि यह प्रक्रिया 25 सितंबर से शुरू होगी और अगले 60 दिन तक चलेगी.

पीठ ने कहा, ‘हमारा मानना है कि इस समय हमें जुलाई में प्रकाशित राष्ट्रीय नागरिक पंजी के मसौदे में शामिल करने के बारे में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया पर जोर देने की आवश्यकता है.’ पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे की अहमियत को देखते हुए ही नागिरकों को दूसरा अवसर प्रदान किया जा रहा है.

पीठ इस मामले में अब 23 अक्टूबर को आगे विचार करेगी. पीठ ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी में नाम शामिल करने के लिए चुनिंदा दस्तावेजों की स्वीकार्यता और अस्वीकार्यता के संबंध में केंद्र के रुख पर असम राष्ट्रीय नागरिक पंजी के समन्वयक प्रतीक हजेला से उनकी राय भी पूछी है.

एनआरसी का अंतिम मसौदा 30 जुलाई को प्रकाशित किया गया था जिसमें 3.29 करोड़ आवेदकों में से 2.89 करोड़ लोगों के नाम शामिल किए गए थे. उस सूची में 40 लाख 70 हजार 707 लोगों के नाम शामिल नहीं थे. इनमें से 37 लाख 59 हजार 630 लोगों के नाम खारिज कर दिए गए हैं जबकि दो लाख 48 हजार 77 लोगों के नाम को रोककर रखा गया है.

शीर्ष अदालत ने 5 सितंबर को आदेश दिया था कि उम्मीदवार दावा फॉर्म की सूची-ए में प्रदान किए गए कुल 15 दस्तावेजों में से किसी भी 10 दस्तावेज का इस्तेमाल अपने वंशानुक्रम को साबित करने के लिए कर सकता है.

असम 20वीं सदी के प्रारंभ से ही बांग्लादेश के लोगों की घुसपैठ से जूझ रहा था. असम एकमात्र राज्य है जिसके पास राष्ट्रीय नागरिक पंजी है जिसे पहली बार 1951 में तैयार किया गया था.

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