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असम: NRC ड्राफ्ट में पूर्व राष्ट्रपति के रिश्तेदारों का नाम शामिल नहीं

पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के भतीजे जियाउद्दीन अली अहमद के अनुसार न तो उनका और न ही परिवार के किसी सदस्य का नाम एनआरसी ड्राफ्ट में शामिल है

FP Staff Updated On: Jul 31, 2018 01:25 PM IST

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असम: NRC ड्राफ्ट में पूर्व राष्ट्रपति के रिश्तेदारों का नाम शामिल नहीं

असम में जारी राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) ड्राफ्ट में देश के पांचवें राष्ट्रपति रहे फखरुद्दीन अली अहमद के रिश्तेदारों का नाम शामिल नहीं है. उनके बड़े भाई एकरामुद्दीन अली अहमद के परिवार का नाम इस लिस्ट में नहीं हैं.

पूर्व राष्ट्रपति के भतीजे जियाउद्दीन अली अहमद का उनका कहना है कि जरूरी दस्तावेज जिन्हें लेगेसी के तौर पर जमा करना था उसे वो कर नहीं सके. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस बारे में कुछ करेगी.

एकरामुद्दीन अली अहमद का परिवार असम के कामरुप जिले में रंगिया गांव में रहता है.

इसके अलावा सेना में वर्षों तक देश की सेवा करने वाले जांबाज अजमल हक का भी नाम इसमें शामिल नहीं है. हाल में ही सेना के इस रिटायर्ड अधिकारी को फारेनर्स ट्रिब्युनल में तलब किया गया था. उनसे अपनी नागरिकता के प्रमाण भी मांगे गए थे. यह भी कम दिलचस्प नहीं है कि उनके परिवार के 3 लोगों के नाम इस रजिस्टर में शामिल किए गए हैं.

NRC Draft

बीजेपी विधायक का भी नाम एनआरसी ड्राफ्ट में शामिल नहीं

इसी तरह बीजेपी के एक विधायक अनंत कुमार मालो का नाम भी एनआरसी में नहीं है. मालो दक्षिण अभयपुरी के विधायक हैं.

उल्फा के चीफ रहे परेश बरुआ का नाम इस लिस्ट में है. उसके बारे में बताया जा रहा है कि वो कहीं विदेश में भूमिगत जीवन जी रहा है. जबकि उसकी पत्नी और बच्चों के नाम इसमें नहीं हैं. उल्फा नेता के बच्चे यहीं पैदा हुए हैं. इस कारण उनके और बरुआ की बीवी के नाम होने चाहिए थे.

प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि एनआरसी ड्राफ्ट में जिन लोगों के नाम छूट गए है उन्हें जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने के लिए मौका दिया जाएगा. हालांकि ऐसे बहुत से लोगों को यह चिंता सता रही है कि बाढ़ और अन्य आपदा में उनके जरूरी दस्तावेज गायब हो चुके हैं.

बता दें कि सोमवार को असम में दूसरा और अंतिम एनआरसी ड्राफ्ट जारी किया गया था. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर जारी किए गए एनआरसी ड्राफ्ट में आवेदन करने वाले 3.29 करोड़ लोगों में से लगभग 2 करोड़ 90 लाख लोगों को भारतीय नागरिक कहा गया है. जबकि 40 लाख निवासियों को असम में अवैध रुप से रहने वाला करार दिया गया.

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