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असम में क्यों छाया है नागरिकता विवाद, NRC ड्राफ्ट को लेकर जानें सबकुछ

दूसरे एनआरसी ड्राफ्ट के जारी होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य में रह रहे कुल लोगों में से 2 करोड़ 89 लाख से ज्यादा लोग भारतीय नागरिक हैं

FP Staff Updated On: Jul 30, 2018 12:12 PM IST

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असम में क्यों छाया है नागरिकता विवाद, NRC ड्राफ्ट को लेकर जानें सबकुछ

असम में सोमवार सुबह राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के दूसरे और अंतिम मसौदे को जारी कर दिया गया है. इस ड्राफ्ट के जारी होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य में रह रहे कुल लोगों में से 2 करोड़ 89 लाख से ज्यादा लोग भारतीय नागरिक हैं.

राज्य में एनआरसी का पहला ड्राफ्ट दिसंबर 2017 में जारी हुआ था. पहले ड्राफ्ट में 3.29 करोड़ आवेदकों में से 1.9 करोड़ लोगों के नाम शामिल किए गए थे.

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के बारे में खास बातें

- असम देश में एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसका राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर है. एनआरसी वो प्रक्रिया है जिससे अप्रत्यक्ष रूप से देश में गैर-कानूनी तौर पर रह विदेशी लोगों को खोजने की कोशिश की जाती है. अगर कोई असम का नागरिक है और देश के किसी दूसरे हिस्से में रह रहा है या काम कर रहा है, तो उसे एनआरसी में अपना नाम दर्ज कराने की जरूरत है.

- दरअसल यह पूरा मामला असम आंदोलन से जुड़ा हुआ है. 1985 का समझौता बांग्लादेश से अवैध आव्रजन (इमिग्रेशन) के खिलाफ 6 साल तक हिंसक विरोध प्रदर्शनों का नतीजा था. इसे असम आंदोलन के रूप में जाना जाता है. बांग्लादेश के साथ असम का 4,096 किलोमीटर की सीमा का हिस्सा लगता है.

- असम में मुसलमानों की आबादी वर्ष 1961 में 23.3 प्रतिशत थी. जो 2011 में बढ़कर 34 फीसदी हो गई है. यह आंकड़े 2011 के जनगणना के आधार पर है. हालांकि, इसमें अभी भी स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने असमी, बंगाली या बांग्लादेशी हैं.

- असम में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों का मामला बड़ा मुद्दा रहा है. इसकी वजह से यहां अक्सर हिंसा की घटनाएं होती रहती हैं. असम के मूल निवासियों का मानना है कि अवैध रूप से यहां आकर बसे लोग उनसे उनका हक़ छीन रहे हैं. 80 के दशक में इस मुद्दे को लेकर बड़ा आंदोलन हुआ था. जिसके बाद असम गण परिषद (एजीपी) और तत्कालीन राजीव गांधी सरकार के बीच समझौता हुआ. इसमें तय हुआ कि 1971 तक जो भी बांग्लादेशी असम में घुसे हैं, उन्हें नागरिकता दी जाएगी और बाकी को निर्वासित (निकाला) किया जाएगा. हालांकि, यह समझौता आगे नहीं बढ़ सका. लंबे समय बाद इसपर फिर से काम शुरू हुआ है.

- असम में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों का पता लगाने के लिए एनआरसी जारी करने का फैसला लिया गया था. इसके तहत मार्च 24, 1971 की आधी रात के बाद से अवैध रूप से राज्य में घुस आए बांग्लादेशी नागरिकों का पता लगाने की कोशिश की गई. यह तारीख मूल रूप से 1985 में असम समझौते में मुकर्रर की गई थी. जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी सरकार और असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) के बीच साइन हुए थे.

- हालांकि, उसके बाद असम की राज्य सरकार असम समझौते में निर्धारित विदेशियों की पहचान और निष्कासित करने में लगातार असफल रही. साल 2005 में तब के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और केंद्र सरकार के बीच एक अन्य समझौते पर साइन हुए. इसमें एनआरसी को जारी करने का निर्णय लिया गया था. भारत में पहली बार एनआरसी विभाजन के बाद 1951 की जनगणना के बाद प्रकाशित किया गया था. उस वक्त राज्य के नागरिकों की संख्या 80 लाख थी.

- 2005 के बाद एक बार फिर से एनआरसी को अपडेट करने का निर्णय लिया गया और इसकी प्रक्रिया शुरू हुई. गोगोई सरकार ने कुछ जिलों में पायलट परियोजना के रूप में एनआरसी अपडेट शुरू कर दिया था, लेकिन राज्य के कुछ हिस्सों में हिंसा के बाद यह रोक दिया गया.

- जुलाई 2009 में एक गैर सरकारी संगठन असम लोक निर्माण (एपीडब्ल्यू) ने पहल की. एपीडब्ल्यू ने राज्य में बांग्लादेशी विदेशियों की पहचान करने और मतदाताओं की सूची से उनके नामों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसके बाद कोर्ट ने इस काम को जल्द पूरा करने का आदेश दिया.

- 31 दिसंबर, 2016 को असम के एनआरसी के पहले ड्राफ्ट को रिलीज करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने ही दिया था. दरअसल, जुलाई 2009 में असम लोक निर्माण की तरफ से दायर याचिका में बांग्लादेशियों को खोजने और हटाने में कोर्ट के हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था, उसके बाद से सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है.

- पहला ड्राफ्ट जारी होने के 8 महीने बाद दूसरा और फाइनल ड्राफ्ट जारी हो रहा है. इससे पहले एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट 30 जून को जारी होना था, लेकिन तब राज्य में बाढ़ आया था. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, एनआरसी की रिलीज को 30 जुलाई तक रोक दिया गया था.

Assam NRC

एनआरसी के दोनों ड्रॉफ्ट के अनुसार असम में रह रहे लोगों में से लगभग 2 करोड़ 90 लाख लोग भारतीय नागरिक हैं (फोटो: रॉयटर्स)

एनआरसी ड्राफ्ट में इस तरह करें अपने नाम की जांच

इन 4 तरीकों पर अमल कर के कोई भी आसानी से यह जानकारी जुटा सकता है कि एनआरसी में उसका नाम शामिल है या नहीं

पहला तरीका

सबसे पहले एनआरसी सेवा केंद्र जाएं. यह सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक खुला रहेगा. किसी भी कार्य दिवस यानी वर्किंग डे में जाकर अपना नाम चेक कर सकते हैं.

दूसरा तरीका

आप www.nrcassa.nic.in पर, www.assam.mygov.in और www.assam.gov.in पर विजिट कर इस बारे में पूरी जानकारी ले सकते हैं

तीसरा तरीका

घर बैठे अपने मोबाइल फोन पर भी इसकी जानकारी ली जा सकती है. इसके लिए ARN टाइप करना होगा और इसे 9765556555 नंबर पर भेजना है.

चौथा तरीका

फोन कर भी अपना नाम लिस्ट में चेक किया जा सकता है. असम में रहने वाले इसके लिए 15107 नंबर पर डायल करें. और असम से बाहर रहने वाले 18003453762 नंबर पर डायल कर कुछ ही देर में इसकी जानकारी ले सकते हैं.

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