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16 साल की नाबालिग से रेप मामले में ऐसे सलाखों के पीछे पहुंचा आसाराम

16 साल की नाबालिग लड़की से रेप के मामले में जोधपुर की विशेष अदालत आसाराम को दोषी करार दिया है

Updated On: Apr 25, 2018 11:07 AM IST

FP Staff

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16 साल की नाबालिग से रेप मामले में ऐसे सलाखों के पीछे पहुंचा आसाराम

16 साल की नाबालिग लड़की से रेप के मामले में जोधपुर की विशेष अदालत ने आसाराम को दोषी करार दिया है. फैसले के मद्देनजर जेल के बाहर चौक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था है. इसी के साथ पिछले तीन दिन से शहर में धारा 144 लागू कर दी गई है.

आसाराम के भक्तों को ध्यान में रखते हुए 3 राज्यों (राजस्थान, हरियाणा, और यूपी) में हाई अलर्ट जारी करवा दिया गया है. इसी के साथ पीड़िता के घर पर भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. आसाराम जोधपुर की इस जेल में तकरीबन 4 सालों से बंद है. कभी लोगों के चमत्कारी भगवान माने जाने वाले आसाराम बापू सलाखों के पीछे कैसे पहुंचे और कैसे हुआ पूरे मामले का खुलासा जानिए

16 साल की लड़की ने किया था केस

2013 अगस्त में एक 16 साल की लड़की ने आरोप लगाया कि आसाराम ने जोधपुर आश्रम में उसके साथ यौन शोषण किया. दो दिन के बाद ही लड़की के पिता ने दिल्ली जाकर आसाराम के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई. पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल टेस्ट कराने के बाद केस राजस्थान पुलिस को ट्रांसफर कर दिया. राजस्थान पुलिस ने आसाराम को पूछताछ के लिए 31 अगस्त 2013 तक का समय देते हुए समन जारी किया.

सितंबर 2013 को आसाराम गिरफ्तार

पुलिस के समन के बावजूद आसाराम को कोई फर्क नहीं पड़ा और वो हाजिर नहीं हुए. जब वो हाजिर नहीं हुए तो दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 342, 376 और 506 के तहत केस दर्ज किया. आरोप लगे कि आसाराम पुलिस से बचने के सारे हथकंडे अपनाते रहे. यहां तक कि लड़की के परिवार को केस वापस लेने के लिए धमकाया गया.

इंदौर में जब आसाराम प्रवचन देने पहुंचे थे, तब पुलिस पूरी फोर्स के साथ उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची, पंडाल के बाहर आसाराम के समर्थकों ने पुलिस से मारपीट भी की. भारी हंगामे के बीच 1 सितंबर 2013 को आसाराम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उन्हें जोधपुर जेल शिफ्ट कर दिया गया.

4/10 कोर्ट में खुले कई राज

अदालत में मुकदमे की तफ्तीश के दौरान आसाराम पर लगे आरोपों की पर्त एक के बाद एक खुलती गईं. आरोपों की आंच उनके बेटे नारायण साईं तक भी पहुंची, कई महीनों की लुकाछीपी के बाद नारायण साईं को भी गिरफ्तार कर लिया गया. फिलहाल आसाराम जोधपुर की जेल में बंद हैं.

जेल में रहने के बाद भी आसाराम पर गवाहों को धमकाने, उनकी हत्या कराने के आरोप लगते रहे. आसाराम भले ही जेल में रहे, लेकिन आसाराम के खिलाफ गवाही देने वाले कई लोगों पर हमले हुए. और कुछ गवाहों की हत्या भी हुई. इस मामले में पीड़िता पक्ष के 58 और आरोपी पक्ष के पचास गवाह थे. पीड़िता पक्ष की ओर से छह मुख्य गवाह हैं, इनमें पीड़िता के पिता, मां, कृपाल सिंह, राहुल सचान, महेंद्र चावला और मध्य प्रदेश की सुधा पटेल शामिल हैं. सुधा पटेल ने बाद में कोर्ट में आसाराम के पक्ष में बयान दे दिया था.

3 गवाहों की हत्या 

आसाराम के खिलाफ गवाही देने वाले एक मुख्य गवाह वैद्य अमृत प्रजापति की मई 2014 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वहीं मुजफ्फरनगर के रहने वाले गवाह अखिल गुप्ता की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई. इसके अलावा गवाह कृपाल सिंह की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई.

35 साल के कृपाल को रात को अपने घर लौटते वक्त बाइक सवार दो लोगों ने गोली मार दी थी. ये हमला शाहजहांपुर में सदर बाजार में हुआ था. पीठ से होती हुई गोली कृपाल की रीढ़ की हड्डी को छू गई थी. माना जा रहा है कि कृपाल पर हमला करने वाले पेशेवर हत्यारे थे. कृपाल सिंह को फौरन इलाज के लिए बरेली लाया गया. बरेली अस्पताल में उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. हमले के एक दिन बाद यानी शनिवार की रात कृपाल की मौत हो गई थी.

किस-किस गवाह पर हुआ हमला 

लखनऊ के रहनेवाले राहुल सचान पर फरवरी 2015 में जोधपुर कोर्ट में गवाही के दौरान हमला हुआ था. सचान को चाकू से गोदा गया हालांकि राहुल की किस्मत अच्छी थी कि उनकी जान बच गई. इसके अलावा पानीपत के रहने वाले महेंद्र चावला को मई 2015 में गोली मारी गई, जिसमें वो घायल हो गए थे. सूरत में भी एक गवाह विमलेश ठक्कर पर हमला किया गया.

इसी तरह सूरत में एक महिला गवाह के पति राकेश पटेल पर हमला किया गया, जिसमें वो बाल-बाल बचे. वहीं गवाह दिनेश भागचंदानी और राजू चांडक पर हमला किया गया. आरोप है कि आसाराम के गुर्गों ने सबसे पहले पीडि़ता के पिता को ही निशाने पर लिया था. गवाही देने जोधपुर गए पीडि़ता के पिता जिस होटल में ठहरे थे, आसाराम के गुर्गों ने वहां भी हमले का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी से उनकी जान बच गई.

इस मामले में जमानत के लिए आसाराम ने कई प्रयास किए. उनके वकील राम जेठमलानी से लेकर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी तक रहे लेकिन उन्हें जमानत नहीं मिली. आसाराम की जमानत याचिका अब तक खारिज होती रही हैं. अब तक के उनके सभी प्रयास विफल रहे.

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