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राम के नाम पर धंधा करने वाले इन बाबाओं को काश राम से ही डर लगता!

आसाराम को सजा राम का नाम रखकर अपने काले काम को अंजाम देने वाले बाबाओं के लिए एक सख्त संदेश भी है

Amitesh Amitesh Updated On: Apr 25, 2018 01:52 PM IST

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राम के नाम पर धंधा करने वाले इन बाबाओं को काश राम से ही डर लगता!

एक नाबालिग लड़की से रेप के मामले में आसाराम को जोधपुर की अदालत ने दोषी ठहरा दिया है. इस केस में अदालत ने अपने फैसले में सह-आरोपी शिवा, शिल्पी, शरत और प्रकाश को भी दोषी ठहराया है. नाबालिग लड़की से रेप के मामले को लेकर आसाराम अगस्त 2013 से ही जेल में बंद है. लेकिन, अब जाकर उसे अपनी करतूतों की सजा मिली है. आसाराम को मिली सजा उसके उन पापों को परिणाम है जो अबतक वो धर्म की आड़ में लोगों की मासूमियत का नाजायज फायदा उठाकर करता रहा है.

साधु के वेष में अपनी राक्षसी प्रवृत्ति को छिपाकर चलने वाले इस मायावी की काली करतूतों की सजा आखिरकार उसे मिल ही गई है. अदालत ने उसे नाबालिग लड़की के साथ रेप करने के मामले में दोषी करार देकर साफ कर दिया है कि अभी उसे और लंबे वक्त तक सलाखों के पीछे रहना पड़ेगा.

77 साल के आसाराम के देश-विदेश में 400 से अधिक आश्रम हैं. धर्मगुरु के तौर पर देश-विदश में अपनी पहचान बना चुके आसाराम की संपत्ति 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा होने का अनुमान है. उसके समर्थक और उसे भगवान का अवतार मानने वालों की भी कमी नहीं है. दावा किया जाता है कि देश-विदेश में उसके 4 करोड़ से अधिक समर्थक हैं.

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धर्म का उपदेश देने वाले आसाराम को आसाराम बापू के नाम से जाना जाता है और उसके समर्थक तो उसे भगवान का अवतार मान बैठे हैं. लेकिन, सफेद वस्त्रधारी करने वाले आसाराम की काली करतूतों को लेकर शक पहले से ही होता रहा था. कई बार उसके आश्रम में हुई घटना उसके रहस्यमय जिंदगी और मायावी दुनिया को लेकर शक पैदा करती रही. लेकिन, अपनी राजनीतिक पहुंच और अपने लोगों द्वारा बनाए गए महान संत के आडंबर ने इस श्वेत वस्त्र धारी काली करतूतों वाले आसाराम को बच निकलने का रास्ता दे दिया.

आखिरकार सच्चाई से पर्दा उठा और एक दिन जब आसाराम के पाप का घड़ा भर गया तो फिर वो कहानी सामने आ गई जिसकी चर्चा पर्दे के पीछे दबी जुबां से हुआ करती थी. यह पूरा मामला मई 2013 में सामने आया था.

Police escort spiritual leader Bapu outside an airport after his arrest in Jodhpur

मई 2013 में यूपी के शाहजहांपुर की रहने वाली एक नाबालिग लड़की ने आसाराम पर जोधपुर के बाहरी इलाके में स्थित उसके आश्रम में उसका यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था. घटना के वक्त लड़की की उम्र महज 16 साल की थी. इसके बाद पीड़ित लड़की की शिकायत पर दिल्ली के कमला मार्केट थाने में आसाराम के खिलाफ रेप और यौन शोषण का जीरो एफआईआर दर्ज हुआ था.

बाद में इस केस को जोधपुर ट्रांसफर कर दिया गया. आसाराम पर पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट के तहत कानून की धाराएं लगाई गई हैं. पुलिस ने 31 अगस्त, 2013 को आसाराम को इंदौर से गिरफ्तार किया था. तब से वो जोधपुर के सेंट्रल जेल में ही बंद है. अब अदालत ने उसे दोषी ठहरा दिया है. यानी उसके जेल से बाहर निकलने के सारे दरवाजे बंद हो गए हैं. ये अलग बात है कि निचली अदालत के फैसले को वो ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकता है.

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राम रहीम भी जेल में है बंद

आसाराम अकेला ऐसा नहीं है जिसे इस तरह के मामलों में सजा हुई है. इसके पहले डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को भी रेप के ही दो अलग-अलग मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है. पिछले साल अगस्त में ही राम रहीम को सीबीआई की विशेष अदालत ने रेप के दो अलग-अलग मामले में 10-10 साल की सजा सुनाई थी. यानी कुल 20 साल तक राम रहीम को सलाखों के पीछे रहना पड़ेगा. अदालत ने उसके खिलाफ 30 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया था.

हालांकि उस वक्त भी अदालत से राम रहीम ने रहम की भीख मांगी थी. उसने लंबे वक्त से अपने समाज सेवा के कामों का हवाला दिया था. लेकिन, उसकी सुनी नहीं गई. राम रहीम गिड़गिड़ता रहा और जज ने उसके खिलाफ सजा सुना दी.

लेकिन, राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के दिन उसके समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाया था. पंचकुला की सीबीआई की विशेष अदलात द्वारा उसे रेप के दो मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद डेरा समर्थकों ने पूरे हरियाणा में जमकर हंगामा किया था. इस हंगामे में सुरक्षाबलों के साथ टकराव में 38 लोगों की मौत हो गई थी.

ram rahim

आसाराम की ही तरह डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर भी रेप का आरोप लगा था. उस पर अपनी ही शिष्या के साथ रेप का आरोप लगा था. यह पूरा मामला 2002 में सामने आया था, जब दो महिला शिष्याओं की चिट्ठी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को मिली थी. इस चिट्ठी में शिष्याओं ने डेरा प्रमुख राम रहीम पर यौन शोषण का आरोप लगाया था. बाद में हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी. 2007 में जांच पूरी होने के बाद जांच रिपोर्ट सीबीआई की विशेष अदालत को सौंपी गई थी. फिर 2008 में उसके खिलाफ आरोप तय किए गए और फिर अदालत ने अपने फैसले में उसे रेप के इस मामले में दोषी ठहरा दिया गया.

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राम रहीम का आचार-विचार और व्यवहार तो पहले से ही संदिग्ध रहा है. अपनी भक्ति और सत्संग से ज्यादा उसकी चर्चा उसके लाइफ स्टाइल से ही होती रही है. लेकिन, अब जेल की सलाखों के पीछे जाने के बाद उसकी काली करतूतें और भी खुलकर सामने आने लगी हैं. राम और रहीम दोनों के नाम पर अपना नाम रखने वाला यह बाबा दोनों के नाम पर भोली जनता को ठगने वाला निकल गया.

रामपाल भी कम नहीं

कुछ इसी तरह का मामला राम पाल मामले में भी सामने आया था. एक इंजीनियर से संत बनने की रामपाल की कहानी भी अजीब है.

कानून को ठेंगा दिखाकर हिसार के बरवाला के सतलोक आश्रम में बैठे बाबा रामपाल को पकड़ने में पुलिस के पसीने छूट गए थे. रामपाल के गुर्गों ने जिस तरह से आश्रम को किले में तब्दील कर दिया था, उसे भेद पाना पुलिस के लिए मुश्किल हो गया था.

rampal-baba

रामपाल पर देशद्रोह और हत्या के आरोप लगे थे. लेकिन अपने-आप को भगवान का अवतार मानने वाले इस बाबा की गिरफ्तारी के बाद उसकी असली कारगुजारी सामने आनी लगी. अपने-आप को कबीरपंथी बताने वाले रामपाल के बरवाला के सतलोक आश्रम में जांच के दौरान अश्लील साहित्य और कुछ इस तरह की संदिग्ध चीजों का मिलना उसके संत होने पर सवाल खड़ा कर गया.

अब आसाराम के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद उनके अंधभक्तों की तरफ से किसी अनहोनी की आशंका रोकने की पूरी कोशिश की गई है. फैसले को लेकर यूपी के शाहजहांपुर में पीड़ित लड़की के घर की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पीड़िता के घर के बाहर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है. इसके अलावा आसाराम के शाहजहांपुर के रुद्रपुर आश्रम पर भी नजरें रखी जा रही हैं.

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राम रहीम और रामपाल मामले से सबक लेते हुए जोधपुर सेंट्रल जेल को जाने वाली दोनों सड़कों को सुरक्षा के मद्देनजर सील कर दिया गया है. जेल के आसपास मीडियाकर्मियों को छोड़कर किसी को भी जाने की इजाजत नहीं है. ड्रोन कैमरों के जरिए जेल के बाहर नजर रखी जा रही है क्योंकि आसाराम पर फैसला जेल के भीतर ही सुनाया गया है.

आसाराम को सजा सुनाए जाने के बाद पीड़िता को इंसाफ भी मिला है. लेकिन, इन बाबाओं के लिए एक सबक भी है जो कि धर्म की आड़ में अपने गोरखधंधे को अंजाम देते रहे हैं. आसाराम को सजा राम का नाम रखकर अपने काले काम को अंजाम देने वाले बाबाओं के लिए एक सख्त संदेश भी है.

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