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आसाराम का कहना था 'ब्राह्मज्ञानी का ये सब करना पाप नहीं होता'

अभियोजन पक्ष के गवाह और आसाराम के करीबी रहे के सच्चर ने कोर्ट में बयान दिया कि आसारन रेप को पाप नहीं मानते थे

Updated On: Apr 26, 2018 11:12 PM IST

FP Staff

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आसाराम का कहना था 'ब्राह्मज्ञानी का ये सब करना पाप नहीं होता'
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बुधवार को नाबालिग लड़की के बलात्कार के दोष में आसाराम को आजीवन कारावास की सजा मिली है. अभियोजन पक्ष के गवाह राहुल सच्चर ने आसाराम के खिलाफ गवाही दी थी. सच्चर आसाराम के करीबी थे और उनकी 'कुटिया' (झोपड़ी / निवास) तक उसकी पहुंच थी. उन्होंने अदालत से कहा कि वह अपनी यौन शक्ति बढ़ाने के लिए दवाएं लेने के अलावा, कभी-कभी अफीम का भी प्रयोग करते थे.

सच्चर ने कहा कि आसाराम जब आश्रम घूमते थे तो अपने साथ तीन लड़कियां रखते थे. आसाराम आश्रम की सभी लड़कियों में से तीन लड़कियों पर टॉर्च लाइट मारकर उनका चुनाव करते थे. घूमने के बाद यह तीन लड़कियां उनके साथ उनकी कुटिया में जाती थी. अभियोजन पक्ष के गवाह ने यह भी खुलासा किया कि तीन महिला सहयोगी भी होती थी जो इन लड़कियों गर्भपात करवाने का काम करती थी.

 ब्राह्मज्ञानी का ये सब करना पाप नहीं होता: आसाराम

सच्चर ने बताया कि एक दिन वो आसारम की कुटिया की दिवार पर चढ़ गया और वहां उन्होंने आसाराम को लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करते हुए देखा. उन्होंने आसाराम को उनकी इन हरकतों को लेकर पत्र लिखा लेकिन उन्होंने उसे अनदेखा कर दिया. जब उन्होंने आसाराम को दूसरा पत्र भेजा फिर भी उन्होंने जबाव नहीं दिया. इसके बाद सच्चर एक दिन जबरदस्ती कुटिया में घुस गए आसाराम से सवाल किया, तब आसाराम ने उनसे कहा 'ब्राह्मज्ञानी का ये सब करना पाप नहीं होता'.

अफीम का कोडवर्ड था 'पैंचेड बुटी'

तब सच्चर ने उनसे पूछा कि कैसे उनके अंदर ऐसी भावनाएं आ जाती है. इस बात का आसाराम ने कोई जवाब नहीं दिया और वो अंदर चले गए और अपने गार्ड अनुयायियों को सच्चर को बाहर फेंकने का आदेश दे दिया. उन्होंने अदालत के आगे कहा कि अपनी यौन शक्ति बढ़ाने के लिए दवाएं लेने के अलावा, आसाराम भी अफीम का उपभोग करते थे. 'पैंचेड बुटी' सच्चर को छोड़कर बाकी सब के लिए अफीम के लिए कोडवर्ड था.

सच्चर ने कहा कि जब उन्होंने आसाराम का आश्रम छोड़ा, तो 2004 में उनपर हमला हुआ था. हालांकि उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज की, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई. 77 वर्षीय आसाराम और उनके दो सहयोगियों को बुधवार को भारतीय दंड संहिता, पीओसीएसओ (यौन अपराध से बच्चों के संरक्षण) अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम, धारा 376 डी के तहत दोषी पाए गए हैं.

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